Hriday

हृदय | Hriday

हृदय

( Hriday )

हृदय वक्ष में स्थित,
करे तंत्र संचार।
जैसा रखे विचार मानव,
वैसा प्रवाहित हो ज्ञान।
कहते हृदय स्वस्थ रखो,
करते इसमें प्रभु निवास।
यदि दुष्टता भाव रखो,
न लग पाओगे पार।
नित योग, व्यायाम करो,
निर्मल भाव सदा रखो।
हृदय नियंत्रण तन करे,
रक्त को शुद्ध करे।
बिना रुके, बिना थके,
हृदय प्रक्रिया जारी रखे।
सागर की लहरों जैसी,
तरंगे उठती इसमें वैसी।
प्रेमियों की धड़कन हृदय,
प्रकट करे प्रेमाभाव।
नयनों में बेताबी लाए,
अधरों में शब्दो के भाव।
करता चौबीस घंटे स्पंदन,
न करता विश्राम।
इसमें भक्ति ऐसी समाई,
सर से पांव तक करे गति।

नन्द किशोर बहुखंडी
देहरादून, उत्तराखंड

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • रखवारे राम दुलारे | Bhajan Rakhware Ram Dulare

    रखवारे राम दुलारे ( Rakhware Ram Dulare )     रखवारे रखवारे, हे हनुमत राम दुलारे। अंजनी के लाला आजा, आजा हनुमान प्यारे। रखवारे रखवारे -2   गिरि द्रोण संजीवनी लाए, लक्ष्मण प्राण बचाए। सिंधु पार सीता माता को, ले मुद्रिका दे आए। आग लगा पूंछ को सीधे, जला दिए घर द्वारे। दहक उठी लंका…

  • प्यारा भास्कर | Poem on sun in Hindi

    प्यारा भास्कर ( Pyara bhaskar )   रोज़ाना निकलता आसमान चीरकर, अंधेरा मिटाता आता प्यारा भास्कर। ख़ुश होते सब सूर्य नारायण देखकर, वन्दना करों सूरज को जल चढ़ाकर।। देता सारे जग को प्रकाश, उजियारा, हर लेता यह सारे ब्रह्मांड का अंधेरा। प्यारी- प्यारी भोर लगे बहुत निराली, सवेरे सवेरे सुहानी लगती यह लाली।। नदियों का…

  • तेरे नयनों की बरसात

    तेरे नयनों की बरसात तेरे नयनों की बरसातसावन भादो की है जैसे सौगातमैने रखी है जतन कर अपने पासतेरे नयनों की बरसात …विरह बिछोह बड़ी लंबी है आईआ जाओ तुम की ह्दय प्राण से मैने पूकार है लगाईयाद करे मन मेरा तुम्हे दिन-राततेरे नयनों की बरसात ….सावन भादो की है जैसे सौगातमैने रखी है जतन…

  • मानवता हनन | Manavata hanan par kavita

    मानवता हनन ( Manavata hanan )    हे प्रभु इस धरती पर नर को दानवता क्यों भाती है। ईर्ष्या द्वेष नफरते हावी सारी मानवता खा जाती है।   लालच लोभ स्वार्थ में नर इंसानियत क्यों भूल गया। मतलब कि इस दुनिया में क्यों मझधार में झूल गया।   लूट खसोट भ्रष्टाचार की नर राहें क्यों…

  • हिन्दी के अन्तर के स्वर

    हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा मान्य किये जाने के लिये १९७५ में लोकसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव अमान्य कर दिये जाने के क्षोभ और विरोध में “हिंदी के अंतर के स्वर” शीर्षक रचना लिखी गई।१९७६ में मारीशस के द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह रचना प्रस्तुत हुई तो यह वहाॅं प्रशंसित और अभिनन्दित हुई।इस रचना के…

  • बिहार में पुल बह रहे हैं | Kavita Bihar mein

    बिहार में पुल बह रहे हैं! ( Bihar mein pul bah rahe hain )  बिहार में विकास की गंगा नहीं पुल बह रहे हैं, नेता प्रतिपक्ष तो यही कह रहे हैं। बाढ़ से नवनिर्मित पुलों का ढ़हना जारी है, ढ़हने में अबकी इसने हैट्रिक मारी है। पहले सत्तरघाट- फिर किशनगंज और अब अररिया, के पुल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *