तेरी याद में जिया ही नहीं ( Teri yaad mein jiya hi nahin ) कैसे जीते हैं सब ? मैं तो तेरी याद में जिया ही नहीं सांसो की हर तार ने, सिवा तेरे नाम किसी का लिया ही नहीं कपकपाती हाथों में थमा गया जाम महफिल में कोई छलक गया होंठो तक जाते…
जीस्त तन्हाई की सहेली है! ( Jeest Tanhai Ki Saheli Hai ) जीस्त तन्हाई की सहेली है! कट रही जिंदगी अकेली है नफ़रतों की बू कम नहीं होती देखो फ़िर भी खिली चमेली है जो सुलझती नहीं बातें दिल की बन गयी वो उल्फ़त पहेली है दोस्ती के टूटे है वो…
ऐसे बहाने ढूंढता हूं ( Aise bahane dhundhta hoon ) वो हंसी आज़म इशारे ढूंढ़ता हूं! प्यार के ऐसे बहाने ढूंढ़ता हूं दें रवानी प्यार की ख़ुशबू हमेशा प्यार के ऐसे नजारे ढूंढ़ता हूं जो हमेशा दें वफ़ाओ का सहारा शहर में ही वो सहारे ढूंढ़ता हूं डूबा हूं ऐसा…
बहुत समझाया, बहुत मनाया ( Bahot Samjhaya Bahot Manaya ) बहुत समझाया, बहुत मनाया डराया भी ,धमकाया भी वक़्त की नज़ाकत समझो फासलों को नजदीकियां… पर वे तो ऐसे थे एक हुए बगावत के सुर बोल रहे एक एक करते थे जुट हुए धरने पर वो जैसे बैठे हुए … अशआर कभी कोई नज़्म…
वतन ( Watan ) इश्क,आशिकी,महोब्बत , जुनूं , तुझसा ही वतन, वतन सा ही है तू…. कहाँ वो अमन, कहाँ मिले सुकूं न सरहदों के इधर , न सरहदों से दूर…. आज़ाद हुये मगर गुलाम अभी तलक बात मज़हबों की , इंसानियत से दूर…. खून तो खौलता है, बहता भी है…
आपके ही गॉंव में,कब से नदी इक ठहरी है ( Aap Ke Hi Gaon Me Kub Se Nadi Ek Thahri Hai ) आपके ही गॉंव में,कब से नदी इक ठहरी है। और नीचे बस्तियों में,जल की अफ़रा-तफ़री है। जो विमानों से शहर की, दूरियों को मापते हैं, उनको क्या मालूम कैसी,जेठ की…