जिन्दगी का सफर

जिन्दगी का सफर | Zindagi ka safar kavita

 “जिन्दगी का सफर” 

( Zindagi ka safar )

सफर जिन्दगी का कठिन है, “नामुमकिन”नहीं ||

राह-नई मंजिल-नई, हम भी नए जमाने में |
जाने कब कहाँ पहुँचेंगे, जाने किस ठिकाने में |
जब से जीना सीखा हमने, दिन-रात चुनौती रहती है |
सफर हमारा जारी है, स्वीकर हर चुनौती रहती है |

 

सफर जिन्दगी का कठिन है, “नामुमकिन”नहीं ||

जिन्दगी के इस सफर में, अनेकों मुश्किल आती हैं |
डट कर सामना करने पर, हल भी होती जाती हैं |
जो होती जटिल समस्या, तब मन घबडा जाता है |
उठा-पटक कर ठीक करें, तो बडा सुकून आता है |

 

सफर जिन्दगी का कठिन है, “नामुमकिन”नहीं ||

कोई घबराता-कोई सरमाता, कोई राह बदलता है |
कोई असफल हो त्यागता जीवन, तब मन दहलता है |
सोचे जान गंवा कर मेरी, मुश्किलें खतम हो जाएंगी |
तुम तो चले जाओगे पर, घर में तकलीफें बढ जाएंगी |

 

सफर जिन्दगी का कठिन है, “नामुमकिन”नहीं ||

किस्मत् से मिलता है जीवन, वो भी मानव काया मे |
सब कुछ कर सकता है, फिर भी पीछे भागे माया मे |
भाग्य से राई घटे न तिल बढे, काहे को मनवा ईश करे |
जिसे जहाँ जितना मिला है, उसी मे जीवन व्यतीत करे |

 

सफर जिन्दगी का कठिन है, “नामुमकिन”नहीं ||

कवि :  सुदीश भारतवासी

 

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