काल

काल | प्रेरक कहानी

एक मनुष्य शहद बेच रहा था । उसने शहद से भरी उंगली को दीवार से पोछ लिया। दीवार पर शहद लगने की देर थी कि उसकी खुशबू पाकर एक मक्खी उस पर आ बैठी और आंखें बंद करके शहद खाने लगी।

अभी शहद खा ही रही थी कि एक छिपकली ने देख लिया कि यह तो मेरा शिकार है। उसने झटपट मक्खी को शहद समेत खा लिया। उस दुकानदार ने बड़े प्यार से एक बिल्ली पाल रखी थी।

बिल्ली छिपकली पर झपटी और उसको एक ही बार में खा गई । पास ही एक ग्राहक का कुत्ता खड़ा था, उसने बिल्ली पर हमला करके उसको मार डाला। दुकानदार को बहुत गुस्सा लगा।

उसने अपने नौकर से कहा, “मारो कुत्ते को।” उन्होंने डंडे मार-मारकर कुत्ते को मार डाला। कुत्ता पास ही खड़े ग्राहक का था। उस ग्राहक को बहुत गुस्सा आया । दुकानदार पर टूट पड़ा, दोनों आपस में लड़ने लगे।

दुकानदार के साथ उनके नौकर थे और ग्राहक के साथ बहुत से लोग खूब घमासान लड़ाई हुई और दोनों आदमी अधमरे हो गए। काल का चक्र घूमता रहता है, पता नहीं कब किस पर आ जाए। इसलिए सावधान होने की जरूरत है। इस संसार से जाएं लेकिन अच्छा कर्म करके जाएं।


दिनेंद्र दास
कबीर आश्रम करहीभदर
अध्यक्ष, मधुर साहित्य परिषद् तहसील इकाई बालोद,
जिला- बालोद (छत्तीसगढ़)

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