मेरे ख़ुलूस को

मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

मेरे ख़ुलूस को

मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देना
मेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना

कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देना
वफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना

तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों में
नज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना

जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैं
मेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना

मैं बढ़ रहा हूँ किसी अजनबी सफ़र की तरफ़
चराग़ तुम ही कोई राह में जला देना

वफ़ा का उसकी मुझे ऐतबार आ जाये
सबूत ऐसा मेरे दोस्त तुम दिखा देना

बहुत हैं दूर क़दम मेरे अपनी मंज़िल से
अज़ीज़ों तुम ही मेरा हौसला बढ़ा देना

कहीं हैं ग़ज़लें तुम्हारे ही प्यार में साग़र
इन्हें कभी तो मुहब्बत से गुनगुना देना

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • मुक़द्दर से सामना है मेरा | Muqaddar se Samna hai Mera

    मुक़द्दर से सामना है मेरा ( Muqaddar se Samna hai Mera ) बड़े अजीब से मंज़र से सामना है मेरा बग़ैर कश्ती समुंदर से सामना है मेरा जहाँ जलाई गईं हसरतें मेरे दिल की उसी चराग़ उसी दर से सामना है मेरा अजीब दिल की ये हालत है क्या बताऊं तुम्हें किसी हसीन के पत्थर…

  • बिजलियां | Bijliyan

    बिजलियां ( Bijliyan ) किस क़दर रक़्स़ां हैं हाय बहरो-बर में बिजलियां।ख़ौफ़ बरपा कर रही हैं दिल-जिगर में बिजलियां। जिनकी हैबत से लरज़ता है बदन कोहसार का।बन्द हैं ऐसी तो मेरे ख़स के घर में बिजलियां। या ख़ुदा मेह़फ़ूज़ रखना , आशियाने को मिरे।वो गिराते फिर रहे हैं शहर भर में बिजलियां। क्या डरेंगे हम…

  • नज़र नहीं आता | Nazar Nahi Aata

    नज़र नहीं आता ( Nazar nahi aata )   वो मुझे कहीं भी अब तो नज़र नहीं आता ? यूं सकून दिल को मेरे मगर नहीं आता वो सनम न जानें मेरा किस हाल में होगा कोई भी उसी की लेकर ख़बर नहीं आता ए ख़ुदा बता क्या ग़लती हुई मुझी से है क्यों मगर…

  • जाने क्यों इतराते हैं लोग…?

    जाने क्यों इतराते हैं लोग…? खुद को समझदार समझकर जाने क्यों इतराते हैं लोग,प्रश्नों के जाल में आकर खुद ब खुद फँस जाते हैं लोग। सच की परछाई से डरकर नज़रें क्यों चुराते हैं लोग,झूठ के सहारे दुनिया में मेले क्यों सजाते हैं लोग। रिश्तों की सौदागरी में दिल का वज़न भुला बैठे,फ़ायदे की ख़ातिर…

  • पर तू बदल गया | Par tu Badal Gaya

    पर तू बदल गया ( Par tu Badal Gaya ) मौसम विसाले यार का फिर से निकल गयामैं तो वहीं खड़ी रही पर तू बदल गया मिसरे मेरे वही रहे मौज़ूं फिसल गयामेरी ग़ज़ल पे तेरा ही जादू जो चल गया ममनून हूँ सनम मैं करूँ शायरी नईनज़रों पे मेरी तीर मुहब्बत का चल गया…

  • इंसान | Insaan

    इंसान ( Insaan )    हर सू हैं झूठे इंसान अब कम हैं सच्चे इंसान मेरी मुट्ठी में भगवान करता है दावे इंसान अपनी ख़ुदग़र्ज़ी में अब भूल गया रिश्ते इंसान सोच समझ के कर विश्वास अब कम हैं अच्छे इंसान लोगों को जो चुभ जाये शौक़ न वो पाले इंसान जिस रस्ते पर दाग़…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *