काम किया हर पल पेचीदा

Hindi Ghazal Poetry | काम किया हर पल पेचीदा

काम किया हर पल पेचीदा

( Kaam Kiya Har Pal Pechida )

 

 

काम किया हर पल पेचीदा

खुशियाँ देकर दर्द ख़रीदा

 

दूर गये हो जिस दिन से तुम

रहता हूँ तब से संजीदा

 

जब देखा मज़हब वालों को

टूट गया हर एक अक़ीदा

 

कैसे ख़ुश रह पाऊँ बोलो ?

कोई मुझमें है रंजीदा

 

सोच रहा हूँ पढ़ ही डालूँ

तेरी शान में एक क़सीदा

 

मैं क्या हूँ ,वो जान गया है ?

कोई मुझमें है पोशीदा

 

दुख ही देखा तब हर शय में

जब अहसास हुआ अंजीदा !

 

शायर:अमित ‘अहद’

गाँव+पोस्ट-मुजफ़्फ़राबाद
जिला-सहारनपुर ( उत्तर प्रदेश )
पिन कोड़-247129

यह भी पढ़ें :

Romantic Ghazal | Love Ghazal | हर घड़ी मिलता रहे दीदार तेरा

Similar Posts

  • ग़ज़ल खंडहर | Khandhar

    खंडहर (Khandhar )    वक्त के साथ मशीनों के पुर्जे घिस जाते है जाने कितने एहसासों में इंसान पिस जाते है। ज़िन्दगी का शिकार कुछ होते है इस कदर उबर कर भी कितने मिट्टी में मिल जाते है। शामोसहर बेफिक्री नहीं सबके नसीब में जीने का सामान जुटाने में ही मिट जाते है। ताकीद करता…

  • गिले-शिकवे की रीत

    गिले-शिकवे की रीत पहर-दर-पहर वो मुझे शिद्दत से याद आते रहे, वो क्या जाने ये चांँद-सितारे किस कदर उनकी यादों के नश्तर मेरे सीने में चुभाते रहे, बहुत चाहा था कि भूल जाएं उस बेवफ़ा को, मगर ख़्याल उनके दिल से निकलते ही नहीं, बनाकर आशियाना इस कदर वो दिल में हलचल मचाते रहे, शब-ए-हिज्रा…

  • मुझे गहराई का चस्का लगा था

    मुझे गहराई का चस्का लगा था मुझे गहराई का चस्का लगा थातभी इक झील में डूबा हुआ था हक़ीक़त का मज़ा अपना मज़ा हैमुहब्बत का नशा अपना नशा था हुई जब गुफ़्तुगू ऐसे खुला वोकोई मोती जो सीपी में छिपा था तुम्हारा दिल महक कैसे रहा हैतुम्हारा दिल तो पत्थर का सुना था बता देता…

  • सुनाऊँ अब किसे हाले दिल अपना | Sunaoon ab Kise Haal – E – Dil Apna

    सुनाऊँ अब किसे हाले दिल अपना ( Sunaoon ab kise haal e dil apna )    ख़ुशी के ज़ीस्त में साये नहीं है ! गमों के क्यों ढ़लते लम्हे नहीं है उदासी में कटे दिन इसलिये ही यहाँ दिन भी मगर अच्छे नहीं है सुनाऊँ अब किसे हाले दिल अपना यहाँ वो अब मगर रहते…

  • तुम्हें जिस घड़ी | Tumhen Jis Ghadi

    तुम्हें जिस घड़ी ( Tumhen Jis Ghadi ) तुम्हें जिस घड़ी चश्मे नम देखते हैं। दिल ए मुज़तरिब में अलम देखते हैं। निगाहों से दिल की जो देखो तो जानो। तुम्हें किस मुह़ब्बत से हम देखते हैं नज़रबाज़ हम को समझ ले न दुनिया। ह़सीनों को हम यूं भी कम देखते हैं। अ़दू को भी…

  • मिलने जब यार से चला होगा

    मिलने जब यार से चला होगा मिलने जब यार से चला होगाप्यार का तब नशा चढ़ा होगा खिल गए फूल दिल में खुशियों केबनके महताब जब मिला होगा इतनी चाहत भरे हो तुम दिल मेंगुल भी तो प्यार का खिला होगा जब भी आया तुझे सनम मिलनेहाल दिल का बयां हुआ होगा कुछ सुना हाल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *