कभी तो कोई बात होना चाहिये
कभी तो कोई बात होना चाहिये

 कभी तो कोई बात होना चाहिये

( Kabhi to koi baat hona chahiye )

 

 

बाद मसरूफ ही सही , कभी तो कोई बात होना चाहिये
लाख फासले हो, फिर भी ‘होने’ का एहसास होना चाहिये

 

समझ  लो  हमारी  ज़िद या तकाज़ा-ए-वक्त इसको
मगर न कहना, मौजू-ए-गुफ्तगू भी कुछ होना चाहिये

 

खामोश रहना तुम, न कहेंगे कुछ हम भी
दिल को दिल से इर्तिआ’श भी होना चाहिये

 

कुरबत-ए-तवील होने को , धड़कनों का
ब’एक-वक्त हम असर भी होना चाहिये

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Suneet Sood Grover

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

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