Kahani Aankhon ki Chamak

आंखों की चमक | Kahani Aankhon ki Chamak

राधिका शादी होने के बाद अपने ससुराल में आई थी भरा पूरा परिवार था। ससुर भी पढ़े लिखे थे। दकियानूसी विचारधारा को नहीं मानते थे। राधिका को याद है एक बार मोहल्ले में एक बुजुर्ग महिला का देहांत हो गया था।

राधिका उनके यहां बैठने गई। लौट कर आने पर दरवाजे पर ही नहाना पड़ता है। राधिका जैसे ही पानी की बाल्टी बेटे से मांगने लगी। तो राधिका के ससुर बोले गंगाजल की कुछ बूदे सर पर डलवा कर अंदर आ जाओ। नहाने की बाहर क्या जरूरत है। क्या कोई भूत लग जाएगा।

वृद्धा अवस्था में उनके विचार सुनकर राधिका आश्चर्यचकित रह गई। राधिका की स्वयं के पिताजी गुज़र चुके थे। और ससुर अब 90 के होने जा रहे थे। राधिका को वह दिन भी याद है। जब पीएचडी के लिए राधिका के फॉर्म भरने के बाद भी परीक्षा देने नहीं जा रही थी।

चाय पीते पीते ससुर जी ने पूछा एंट्रेंस पेपर कब है? कल है राधिका ने धीरे से जवाब दिया तो जाने की तैयारी कर ली ससुर साहब ने अगला प्रश्न रख दिया ?राधिका ने धीरे से मना किया पर वह बोले क्यों?

पेपर क्यों नहीं देना है। पेपर तो देने जाना चाहिए। कल तुम पेपर देने जाओगी और अपने बेटे को आदेश दे दिया कि कल इसे पेपर दिलाने ले जाना। समय गुजरता चला गया।

राधिका उन्हें पापा जी ही कहने लगी। पापा को भजिए मंगोड़ी, उड़द की दाल के बड़े बहुत पसंद थे, उन्हें जब भी खाना होता था । वह राधिका से कह देते थे।

वह झट से बना कर दे भी देती थी। वह तारीफ भी बहुत करते थे। पति को ऐसा ना लगे कि वह ख्याल नहीं रख पा रही है । वह बार-बार उन्हें खाने के लिए फोर्स करती थी। वह बडा नपा तुला ही खाना खाते थे।

एक दिन भजिया दूसरे दिन मंगोड़ी, गाजर का हलवा, गुजिया खाने से शायद उनका पेट खराब हो गया था। राधिका दूसरे दिन दही चावल लेकर पहुंच गई। गर्मियां भी शुरू हो चुकी थी मौसम के बदलने का असर बुजुर्गों पर जल्दी पड़ता है।

राधिका ने उनसे जाकर कहा मेरे कारण आपकी तबीयत खराब हो गई आप पपीता और केला खा लो। वह करीने से फलों को काटकर पापा के पास ले गई थी ।

उसकी इतनी ही सुनते पापा तुरंत बोल नहीं नहीं मैंने ही ज्यादा खा लिया था। बेटा कुछ ठंडा हो तो कोको कोला, , ,ला दो राधिका समझ रही थी कि अभी पेट खराब है।

कोकोकोला नुकसान करेगा वह हां कह कर लौट आई आकर उसने केले मैं दूध डालकर थोड़ी चीनी इलायची डालकर शेक बना दिया। ठंडा करने रख दिया फ्रिज में और फिर गिलास में भरकर पापा को देने चली गई।

90 वर्षीय पापा को उसने यह कहकर गिलास पकड़ाया कोको कोला नुकसान करता है आप यह केले का शेक पी लो। तो उनकी आंखों की चमक देखकर चुपचाप वापस चली आई हमारे बुजुर्ग कुछ अपेक्षा नहीं रखते हैं सिर्फ उनका थोड़ा सा ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है उनके आशीर्वाद की दुआओं से पता नहीं व्यक्ति कहां का कहां पहुंच जाए।

उस एक गिलास की ठंडाई ने बूढ़ी आंखो मे चमक ला दी थी। बूढ़े व्यक्ति हमसे कुछ मांगे उससे पहले यदि हम उन्हें दे दे तो वह बड़े खुश हो जाते हैं। उन आंखों की चमक और आशीर्वाद राधिका के लिए सबसे बड़ा तोहफा था।

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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