Kanhaiya Padharo hamare Angana

कन्हैया पधारो हमारे अंगना | Kanhaiya Padharo hamare Angana

कन्हैया पधारो हमारे अंगना

( Kanhaiya padharo hamare angana )

 

कन्हैया पधारों आप हमारे भी अंगना,
शांति-समृद्धि की दे हमें शुभ कामना।
कही भटक न जाएं हम गलत राह पर,
शरण मे रखना एवं हमको ना ‌भूलना।।

सारे जग के कान्हा तुम हो प्यारे-प्यारे,
दिलों में बसे हो बुड्ढे बच्चें जवान सारे।
तुझे सांवरिया गिरधारी कहते बनवारी,
किस-किस नाम से तुम्हें जगत पुकारे।।

तुमको पूजते धरती पर सभी नर-नारी,
कब आओगे देवकीनंदन कृष्ण मुरारी।
ये अंखियां हो रही जो व्याकुल हमारी,
इस जगत में पाप बढ़ रहा देखो भारी।।

सूना- सूना है वृन्दावन मोहन तेरे बिन,
अब लगता ‌नही है हमारा यहां पे मन।
नही रहे ग्वाल, गाय और शुद्ध माखन,
आकर सुना दो बांसुरी की प्यारी धुन।।

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • घर घर तिरंगा लहराए | Ghar ghar tiranga lahraye | Geet

    घर घर तिरंगा लहराए ( Ghar ghar tiranga lahraye )   घर-घर तिरंगा लहराए, हम गीत वतन के गाए। शौर्य पराक्रम की गाथा, जन मन जोश जगाये। घर-घर तिरंगा लहराए, घर-घर तिरंगा लहराए।   आजादी जश्न मनाएं, जन गण मन गाए प्यारा। वंदे मातरम वंदे मातरम, सबका है एक ही नारा।   क्रांति काल में…

  • संयम करना सिखा दिया

    संयम करना सिखा दिया तेरे प्यार ने सिखा दिया, कैसे दर्द को हँसते हुए सहना है। तुझे अपनी यादों में बसाकर, तुझमें ही खोया रहना है। तेरे ख्यालों ने समझाया, दूरी को कैसे सहेजा जाता है। तेरी याद मात्र से भी मुस्काना, यह प्यार में कितना मज़ा आता है। तेरी बातों की मिठास, हर दर्द…

  • महफिल | Mehfil

    महफिल ( Mehfil )   महफिले आम न कर चाहत मे अपनी लुटेरों की बस्ती मे न बसा घर अपना बच के रह जरा ,बेरुखी जहां की नजर से इस महफिल का उजाला भी शराबी है घरौंदे से महल के ख्वाब ,ठीक नही होते दीए का उजाला भी ,भोर से कम नहीं होता ये महफिल…

  • सबल- स्वस्थ हो देश

    सबल- स्वस्थ हो देश।।   योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग। तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत। आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।। खुश रहते हर पल सदा, जीवन में वो लोग। आत्म और परमात्म का, सदा कराते योग।। योग करें तो रोग सब, भागे…

  • बात एक कॉल की | Baat ek Call ki

    बात एक कॉल की ( Baat ek call ki )    14 अक्टूबर 14:14 पर कॉल आया, उसी पर मैंने यह हास्य व्यंग बनाया । एक दिन दोपहर में आया मुझे फोन, घंटी उसकी सुनकर हो गया मैं मौन। देखा मोबाइल तो नॉर्मल कॉल आया था, पूजनीय सतीश जी ने कॉल लगाया था। कुछ पल…

  • कोरोना काल का पक्ष एक और | Kavita

    कोरोना काल का पक्ष एक और! ( Corona Kal Ka Pach Ek Or )   जरा सोचें समझें कैसा है यह दौर? भविष्य हमारा किधर जा रहा है? देखो कोई चांद पर मंगल पर बस्तियां- बसा रहा है! उधर हम देख सोच भी नहीं पा रहे हैं हम अनजाने डर से डरे जा रहे हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *