Kanshiram

मान्यवर कांशीराम साहेब | Poem in Hindi on Kanshiram

मान्यवर कांशीराम साहेब

( Manyavar Kanshiram Saheb )

 

समाज सुधारक व राजनीतिज्ञ थें ऐसे दलितों के नेता,
बहुजन नायक एवं साहेब से जिनको जनता जानता।
वर्ण व्यवस्था में इन्होंने बहुजनों का एकीकरण किया,
न्याय चाहिये तो शासक बनों यें था जिनका कहना।।

१५ मार्च १९३४ में जन्में ०९ अक्टूबर २००६ निर्वाण,
शोषित दलितों व अछूतों हेतु आपने किया कल्याण।
प्रथम जीवन व शिक्षा आपने स्थानीय स्कूल से लिया,
जातिगत-भेदभाव का सामना कर बनायी पहचाण।।

एक रामदासिया परिवार में जन्मे यें साहेब कांशीराम,
जो निम्न-जातियों के लाभांवित हेतु किये ढ़ेरों काम।
१९८२ में एक लिखी पुस्तक ‘द चमचा एज’ था नाम,
सामाजिक परिवर्तनो के लिए लड़ते रहें सवेरे शाम।।

जिनके पिता का नाम था हरि सिंह व माॅं बिशन कौर,
सात भाईयों में सबसे बड़े थें वह कांशीराम उस दोर।
२ करोड़ समर्थकों के साथ बौद्ध बनने का था सपना,
अपनें हितों की रक्षा हेतु जिन्होंने लगाया पूरा जोर।।

आंबेडकर जी के दर्शनो ने इन्हें बहुत किया प्रभावित,
जो एससी एसटी व ओबीसी के लिए लड़ते रहें हित।
अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ स्थापना भी जिन्होंने की,
बहुजन समाजवादी पार्टी बनाकर हुए बहुत चर्चित।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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