Karm Path

कर्म पथ | Karm Path

कर्म पथ

( Karm Path )

 

जुड़ने की कोशिशों मे
टूटा हूं कई बार
अपनों के साथ होने मे
छूटा हूं कई बार
पहुंचकर भी ऊंचाई तक
गिरा हूं कई बार
फिर भी अभी हारा नही हूं
कमजोर जरूर हूं,बेचारा नही हूं….

मरते देखा हूं कई बार
अपनों के नाते ही स्वाभिमान को
कर लिए हैं समझौते ,मगर
थामने नही दिया हूं गिरेहबान को
आदमी हूं,ईमान बेचकर
खुश होना भाया ही नही कभी
शब्द बेचकर लेखनी थामी नही कभी….

जो भी हूं जैसा भी हूं
इच्छाओं को मारकर भी जिया हूं
कोई अपने हों या बेगाने
न पीछे चला , न कभी चलना चाहा
गैरत के साथ चलता हूं
अपने आप मे भला हूं…

चंद सांसे भी जब अपनी खुद की नही
तब करूं क्यों जीवन से तकरार
बस ,चल रहा हूं कर्म पथ पर अपने
मिले जीत या मिले हार…

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/yahi-var-do-maa/

Similar Posts

  • ये गूंगी शाम

    ये गूंगी शाम ये गुंगी शाम मेरे कानों में कुछ कहती है, तु है कहीं आसपास ये अहसास मुझे दिलाती है,बेशक तू मुझे छोड़ गया, वादा अपना तोड़ गया, किया था वादा तूने ता-उम्र साथ निभाने का, हर ग़म मेरा बांट कर मुझे खुशी के फूलों की लड़ियां दिखाने का, दे गया तू ग़म उम्र-भर…

  • कुछ दिन पहले

    कुछ दिन पहले     कुछ दिन पहले मैं आकर्षित हो गया था उसके गौर वर्ण पर उसके मदहोश करते लफ़्ज़ों पर उसके उभरे उरोजों पर……   उसने कहा था-   तुम भी मुझे अच्छे लगते हो मैं जुड़ तो सकती हूं पर…… कैसे तेरे साथ आ सकती हूं.? शंकाओं ने घेरा हुआ है आऊँ…

  • मिनखपणो पिछाणो | Rajasthani poem

    मिनखपणो पिछाणो ( Rajasthani kavita )     मुंडो देख र टीकों काढै गांठ सारूं मनुवार करै। घर हाळा सूं परै रवै और गांवा रा सत्कार करै।।   मीठी-मीठी मिसरी घोळे बातां सूं रस टपकावै। टोळ गुढ़ावै घणी मोकळी मतळब खातर झूक ज्यावै।।   माळा टूटी अपणेस री भायां री बातां लागै खारी। मेळ जोळ…

  • महाबली पराक्रमी रावण | Raavan par kavita

    महाबली पराक्रमी रावण ( Mahaabali Parakrami Raavan )   दसो दिशा में देवलोक तक दशानन करता राज। स्वर्ण नगरी सोने की लंका लंकेश रावण महाराज।   महा पराक्रमी बलशाली योद्धा गुणी पंडित वो सुरज्ञान। कला कौशल सिद्धियां पाकर हुआ शक्ति का अभिमान।   इंद्रजीत अतुलित बल योद्धा रावण सुवन सुकुमार। भ्राता कुंभकरण बलशाली वैभवशाली भरा…

  • समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • शक | Hindi Poem Shak

    शक ( Shak )   बिना पुख़्ता प्रमाण के शक बिगाड़ देता है संबंधों को जरा सी हुई गलतफहमी कर देती है अलग अपनों को काना फुसी के आम है चर्चे तोड़ने में होते नहीं कुछ खर्चे देखते हैं लोग तमाशा घर का बिखर जाता है परिवार प्रेम का ईर्ष्या में अपने भी हो जाते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *