कवि गोपालदास नीरज

कवि गोपालदास नीरज

कवि गोपालदास नीरज

नमन है, वंदन है, जग में तुम्हारा पुनः अभिनंदन है,
लाल है भारत के, आपके माथे पर मिट्टी का चंदन है।
पद्मश्री हो आप, पद्म भूषण से सम्मानित हुए आप हो,
प्रणाम है आपको, आपका बारंबार चरण वंदन है।।

खो गए मस्त गगन में प्रेम का गीत पढ़ा करके हमको,
चले गए जग को कितने मधुर गीत सुना करके हमको।
आपकी लिखी रचनाएं पढ़कर खुद को करीब पाता हूं,
चले गए जग से आप, कैसे उदास करके जग को।।

आपके काव्य की प्रशंसा करना कोई आसान नहीं है,
अंतध्वनि,विभावरी,प्राणगीत समझना आसान नहीं है।
तेरे गीत ने जगत के अंतर्मन को झकझोर दिया है,
नमन है नीरज जी को जो कलम का बेईमान नहीं है।।

धन्य है, आपका गांव, आपकी जन्मभूमि धन्य है,
धन्य है, आपका इटावा जिला,पुरावली गांव धन्य है।
जिले का मान बढ़ाया और देश का नाम रोशन किया,
नमन करता हूं आपको,आपके माता-पिता धन्य है।।

हमको आपने सच का आईना दिखाया उम्मीद जगाई,
अपनी कविताओं में जग की काली सच्चाई बतलाई।
आपने कविताओं को लहर बनाकर उतार दिया जीवन में,
कण-कण में आपने गीत पिरोए बस आपकी याद आई।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश

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