प्रशांत भूषण की निडरता!

प्रशांत भूषण की निडरता | Prashant Bhushan par kavita

प्रशांत भूषण की निडरता!

*******

यह बोल प्रशांत भूषण के हैं –
न झुकेंगे
न सच का दामन छोड़ेंगे
सच कहते थे
सच कहते हैं
सच कहते रहेंगे।
न सत्ता के आगे घुटने टेकेंगे,
न कोर्ट से डरेंगे।
ना ही माफीनामा दायर करेंगे,
कोर्ट जो सजा देगी-
हंस हंस कर सहेंगे।
भारत में नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकार-
की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
इनके हौसले देखकर कोर्ट ने भी
दो दिन का वक्त दिया है,
सजा का ऐलान नहीं किया है।
लेकिन प्रशांत के तेवर देख ऐसा नहीं लगता
कि वे अपना वक्तव्य बदलेंगे,
या अदालत से मांफी मांगेंगे ?
यह देखना दिलचस्प होगा,
कि आगे क्या होगा?
कोर्ट का निर्णय क्या होगा?
लेकिन सच के सिपाही भूषण के साथ
हमें खड़ा रहना होगा,
उनका साथ देना होगा;
उनके बुलंद हौसले को सलाम करना होगा।
ताकि नेताओं और
मनमाने ढंग से व्यवस्था चलाने वालों का घमंड चकनाचूर हो-
इस व्यवस्था के खिलाफ जो लड़ें,
उसे जनता का साथ जरूर मिले।
समतामूलक समाज की स्थापना और
संवैधानिक दायरे में शासन व्यवस्था चले,
संविधान की सर्वोच्चता बरकरार रहे।
इसके लिए भी इनका साथ देना जरूरी है।
वरना सब खत्म हो जाएगा..
व्यवस्था के आगे सब घुटने टेक रहे हैं,
न्यायालय पर भी इसके प्रभाव पड़ रहे हैं।
अब नागरिक अधिकार धीरे-धीरे समाप्त करेंगे,
उठो ! जागो, चेतो वरना कहीं के ना रहेंगे।
भविष्य में सब छिन्न भिन्न हो जाएगा,
मूर्ख जनता ! तब रो रोकर पछताएगा;
कुछ नहीं तू कर पाएगा।

***

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

यह भी पढ़ें :-

साहसी राष्ट्रपति मार्सेलो | Poem in Hindi on president Marcelo

Similar Posts

  • कुछ | Kuch

    कुछ ( Kuch )    चल आज कुछ सुनाती हूं लफ्जों मे अपने बया करती हूं ज़िंदगी का यह बहुत प्यारा अहसास है दूर होकर भी सब के दिल के पास है मानो खुशियों का मेला है, यह जीवन भी कहां अकेला है सब ने गले से लगाया है मुझे तोहफों से सजाया है मुझे…

  • खिलखिलाया करो | Khilkhilaya Karo

    खिलखिलाया करो ( Khilkhilaya karo )    तलब इतनी न अपनी बढ़ाया करो, दाग-ए-दिल न किसी को दिखाया करो। गर्म आँसू हैं आँखों में देखो बहुत, घुट -घुटके न जीवन बिताया करो। अच्छे लोगों से दुनिया है भरी-पटी, रोज संग में तू भी खिलखिलाया करो। जाँ को बेचो नहीं, दिल को बेचो नहीं, दिल दुखाने…

  • देश आवाज अब दें रहा

    देश आवाज अब दें रहा   देश आवाज अब दें रहा खून अपना बहा दो कभी   मुल्क है मुश्किलों से घिरा जान सब की बचा लो अभी   इस वतन से अदूँ दो भगा आग है इक दिलों में लगी   देश भर में अमन ही रहे रोशनी भी जलेगी कभी   किस तरह…

  • बदरा अब तो बरसो रे | Poem in Hindi on Badal

    बदरा अब तो बरसो रे ( Badra ab to barso re )    प्यारे बदरा अब तो बरसो रे, काले बदरा यू नही तरसा रे। तरस रही हमारी अंखियां रे, झमा झम करते बरस जा रे।। तुझे पूजे सारी यह दुनियां रे, अब बरसों मेघों के राजा रे। नही करो अब कल परसो रे, तुमसे…

  • तिरंगा | Tiranga par Kavita

    तिरंगा! ( Tiranga )    आजादी की कोख से निकला तिरंगा, प्राणों से प्यारा है हमको तिरंगा। बीज आजादी का देखो ये बोया, हम सबकी आँखों का तारा तिरंगा। बलिदानियों का खून इसमें समाया, इंकलाबी राह भी सजाया तिरंगा। क्रांति और शांति का देता है संदेश, जवानी लुटाना सिखाया तिरंगा। जवान-किसान का सबका दुलारा, मर…

  • ज्ञान का दीप

    ज्ञान का दीप जिनका किरदार सदाकत है lजिनकी तदरीस से पत्थर पिघलत है llअकेले चलने का आभास न कराया lहमेशा साथ देकर सफल कराया ll ” मित्र ” कहूँ तो ” मन ” शांत है l” भाई ” कहूँ तो ” आत्मा ” तृप्त है ll” गुरु ” कहूँ तो ” पद ” शेष है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *