Kavita Bejubano ko Pyar do

बेजुबानों को प्यार दो | Kavita Bejubano ko Pyar do

बेजुबानों को प्यार दो

( Bejubano ko pyar do ) 

 

नन्हे बालक भोले भाले
हाथी घोड़े शेर पाले

पशुओं से प्रेम जताते
खग पखेरू दाने डाले

जीवो पर दया दर्शाते
गले मिलके स्नेह जताते

हिल मिलकर ऐसे रहते
जैसे हो कोई पुराने नाते

कुत्ता बिल्ली हो खरगोश
उत्साह उमंग लाते जोश

ऊंटों की सवारी भाती
मनमोहक मुस्कान आती

कुदरत का श्रंगार जीव
सृष्टि का सुंदर उपहार

पशु पक्षी बेजुबान को
दीजिए थोड़ा सा प्यार

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

जिधर देखो उधर | Kavita Jidhar Dekho Udhar

Similar Posts

  • तुलसी | Tulsi par kavita

    तुलसी ( Tulsi )   हरी पूजन तुलसी बिना रहता सदा अधूरा हैl विष्णु आशीष से पूजित घर-घर तुलसी चौरा है l वृंदा के पतिव्रत के आगे नारायण भी हारे है l शालिग्राम से ब्याह रचाया तुलसी मान बढ़ाया हैl भोग बिना तुलसी के हरि को कब भाया हैंl नारी की सतीत्व ने हरि को…

  • Romantic Kavita | दरकार

    दरकार ( Darkar )   हमको  है  दरकार  तुम्हारी हर  शर्त  स्वीकार  तुम्हारी हमसफर हो जीवन पथ की तुझ पर हम तो है बलिहारी   एक जरूरी किस्सा हो तुम दिल की धड़कन हो प्यारी मेरे  जीवन का हिस्सा हो हमसफर  हो  तुम  हमारी   प्रेम   भरी   पुरवाई   हो झोंका मस्त  बहार  का सजा हुआ…

  • पति-पत्नी | Pati patni par kavita

    पति-पत्नी ( Pati patni )     लिखा है लेख यही ईश्वर ने हमारा, सोचकर बनाया है ये रिश्ता प्यारा। कहा जन्में हम‌ और कहा पर तुम, फिर भी इतना प्यार है यह हमारा।।     जीवन का डोर ये बंध गयी है ऐसे, सात फेरों का सारा खेल यह जैसे। पति और पत्नी कहलाएं…

  • एक ऐसा एहसास | Ehsaas kavita

    एक ऐसा एहसास ( Ek aisa ehsaas )      कविता नही, कुछ खास लिख रहा हूं तेरे लिए एक ऐसा, एहसास लिख रहा हूं।   मिल कर न बिछड़ने का बिछड़कर फिर मिलने का तेरे लिए मन का, विश्वास लिख रहा हूं।   कविता नही कुछ खास लिख रहा हूं तेरे लिए एक ऐसा,…

  • मेरे अवगुण हर लो ना प्रभु | Kavita Mere Avgun Har lo na Prabhu

    मेरे अवगुण हर लो ना प्रभु ( Mere avgun har lo na prabhu )    दर आया लेकर अरदास, मेरी झोली भर देना प्रभु। मैं मूरख नादान हूं ईश्वर, मेरे अवगुण हर लेना प्रभु। सृष्टि का संचार तुमसे ही, तुम ही पालनहारे प्रभु। भर देते भंडार सबके, सारे जग के रखवारे प्रभु। मन मंदिर में…

  • क्या हम आजाद हैं | Kya Hum Azad Hain

    क्या हम आजाद हैं कहने को आज़ाद तो कहलाते हैं, पर आज़ाद रह नहीं पाते हैं। कोई गुलाम जातिवाद का, कोई राजनीति के गुलाम बन जाते हैं। साम्प्रदायिकता और दलों के फेर में, बंधकर हम रह जाते हैं। अन्याय और अत्याचार सह सहकर, यूं ही घुटकर रह जाते हैं। आज भी देश में दहेज प्रथा,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *