Poem Dhoop Sekne

धूप सेंकने वो आती नहीं | Poem Dhoop Sekne

धूप सेंकने वो आती नहीं!

( Dhoop sekne wo aati nahi ) 

 

आओ कुछ काम करें हम भी जमाने के लिए,
कोई रहे न मोहताज अब मुस्काने के लिए।
लुप्त होने न पाए संवेदना इंसानों की,
कुछ तो बची रहे इंसान कहलाने के लिए।

सुनो,जालिमों हुकूक मत छीनों मजलूमों का,
कभी न सोचो इनका हुनर दफनाने के लिए।
उसकी आदत है वो रोज नया गुल मसलता है,
ऐसा भी ये ठीक नहीं दिल लगाने के लिए।

आओ लौट चलें हम अपने संस्कारों की तरफ,
फिर से अपना दिल ये चीरकर दिखाने के लिए।
दर्द का अंधेरा न लील जाए उजाला कहीं,
गम में सूरज जल रहा चलो बचाने के लिए।

उम्रभर कौन हसीन और कौन जवाँ रहता है,
चलो चलें उस मन से वो गर्दा हटाने के लिए।
धूप सेंकने वो आती नहीं कि हम आँख सेंकें,
जिन्दगी है खफ़ा चलो उसे मनाने के लिए।

इन बादलों को बरसने का सलीका तक नहीं,
सुलग रही है कितनी जवानी नहाने के लिए।
दिल दुखाओ नहीं नदियों,पर्वतों,पंखुड़ियों का,
कुदरत इन्हें बनाई है दिल बहलाने के लिए।

 

रामकेश एम.यादव (रायल्टी प्राप्त कवि व लेखक), मुंबई

यह भी पढ़ें :-

मुँह से फूल झरते हैं | Poem Muh se Phool Jhadte Hain

Similar Posts

  • दीवारों के कान | Geet

    दीवारों के कान ( Geet : deewaron ke kaan )   कितने घर उजाड़े होंगे, सारे भेद ले जान। सारी दुनिया ढोल पीटते, दीवारों के कान।   मन की बातें मन में रखना, सोच समझ ले इंसान। राम को वन में भिजवा दें, दीवारों के कान।   कहीं मंथरा आ ना जाए, घर में कृपा…

  • बच्चे | Bache

    बच्चे ( Bache ) नन्हें-मुन्ने प्यारे-प्यारे, होते सबके दुलारे,बच्चे ही हमारे घर, आँगन की शान हैं। भाषा वो दुलारी लगे, सबको है प्यारी लगे,बोलती जो तुतलाती, बच्चों की जुबान है। है आज का दिवस जो, कहाता बाल दिन है,चौदह है नवंबर, आज बाल गान है। कोई धैर्यवान होता, कोई वीरवान होता,सीधा सादा होता कोई, बहुत…

  • डॉ. मनमोहन सिंह का मान

    डॉ. मनमोहन सिंह का मान सादगी का स्वर, ज्ञान का था दीप।जिसने रच दिया, बदलाव का सीप।मनमोहन सिंह, वह नाम है अमर,जिनपर भारत देश को गर्व है प्रखर। गाह(पाक)के गाँव से उठकर चले।विद्या के दीप संग, तम को पले।कैम्ब्रिज,ऑक्सफोर्ड के ज्ञानी प्रणेता,भारत की माटी का वह अमूल्य रचयिता। आर्थिक संकट जब आया करीब।देश को मिला…

  • हम तुम्हारे है सनम | Hum Tumhare Hain Sanam

    हम तुम्हारे है सनम ( Hum Tumhare Hain Sanam )   मन में कभी तुम ना लाना प्रियवर ऐसा ये विचार, छोड़ जायेगी हमको ऐसे कर देगी जीवन बेकार। सात-वचन से बंधकर आयी मैं पतिव्रता यह नार, साथ रहूॅंगी पूरी उम्रभर मैं भरती हूॅं ऐसी हूॅंकार।। एक तेरे ही खातिर छोड़ आई हूॅं मैं सारा…

  • उम्मीद

    उम्मीद   शांत सी जिंदगी में फिर से शोर होगा इस अंधेरी दुनिया में फिर कोई भोर होगा। इसी उम्मीद में देखो कितनी बड़ी हो गयी मैं थोड़ी मासूम तो थोड़ी नकचढ़ी हो गयी मैं। कुछ अपनों को जाते देखा तो परायों को आते देखा। जिंदगी क्या है, लोगों से सुनते देखा पर असल जिंदगी…

  • तबस्सुम | Poem on Tabassum

    तबस्सुम ( Tabassum )    तरोताजगी भर जाती तबस्सुम महफिल को महकाती तबस्सुम दिलों के दरमियां प्यारा तोहफा चेहरों पे खुशियां लाती तबस्सुम गैरों को अपना बनाती तबस्सुम रिश्तो में मधुरता लाती तबस्सुम खिल जाता दिलों का चमन सारा भावों की सरिता बहाती तबस्सुम घर को स्वर्ग सा सुंदर बनाती तबस्सुम सुंदरता में चार चांद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *