मैं शून्य हूँ

मैं शून्य हूँ | Kavita Main Sunay Hoon

मैं शून्य हूँ

( Main Sunay Hoon )

मैं शून्य हूँ
जिसे शिखर का अभिमान है
आवारगी है रगों में मेरी
जिसका सहारा अम्बर है
मैं अस्तित्व हूँ बूंद की
जिसे साहिल का गुमान है
मैं शब्द हूँ
जिसका ये सारा जहां है
मैं तुम में हूँ
जो तुम्हारा निशां है
तुम पिता हो मेरे
तुम्हारे बिना मेरा
अस्तित्व कहाँ है।।

डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’
लेखिका एवं कवयित्री
बैतूल, मप्र

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