मैं शून्य हूँ

मैं शून्य हूँ | Kavita Main Sunay Hoon

मैं शून्य हूँ

( Main Sunay Hoon )

मैं शून्य हूँ
जिसे शिखर का अभिमान है
आवारगी है रगों में मेरी
जिसका सहारा अम्बर है
मैं अस्तित्व हूँ बूंद की
जिसे साहिल का गुमान है
मैं शब्द हूँ
जिसका ये सारा जहां है
मैं तुम में हूँ
जो तुम्हारा निशां है
तुम पिता हो मेरे
तुम्हारे बिना मेरा
अस्तित्व कहाँ है।।

डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’
लेखिका एवं कवयित्री
बैतूल, मप्र

यह भी पढ़ें :-

प्रित का प्रेम | Prit ka Prem

Similar Posts

  • परंपरा | Kavita Parampara

    परंपरा ( Parampara ) यह कैसी परंपरा आई, दुश्मन हो रहे भाई-भाई। घर-घर खड़ी दीवारें घनी, मर्यादा गिर चुकी खाई। परंपराएं वो होती, संस्कारों की जलती ज्योति थी। अतिथि का आदर, खिलखिलाती जिंदगी होती थी। होली दिवाली पर्व पावन, सद्भावो की धाराएं भावन। गणगौर तीज त्योहार, खुशियों का बरसता सावन। परंपराएं जीवंत रखती है, मान…

  • रामनवमी का त्योहार

    रामनवमी का त्योहार रामनवमीअसहयोगजो व्यक्ति अकेलाप्रभु भक्ति में रतरहकर जीवनजीना जानता हैं ,वह स्वयं मेंआनंद कोखोज लेता हैं ;उसे प्रभु श्री रामकी तरह असंयममें असहयोगकरने में कोईकठिनाई नहींहोती हैं ।क्योंकि उसकेमन में कोईचाह नहीं हैं ,आकांक्षा नहीं हैं ,वह स्वयं आत्मामें संतुष्ट हैं ।जो सन्तुष्टहै वह प्रभु श्रीराम की तरहकर सकता हैअसहयोग । प्रदीप छाजेड़(…

  • Vishv Kavita Diwas Par Kavita | विश्व कविता दिवस पर

    विश्व कविता दिवस पर ( Vishv Kavita Diwas Par ) कविता प्रकृति पदार्थ और पुरुषार्थ दिखाती कविता, जीव को ब्रह्म से आकर के मिलाती कविता।।   शस्त्र सारे जब निष्फल हो जाया करते, युद्ध में आकर तलवार चलाती कविता।।   पतझड़ों  से  दबा  जीवन  जब क्रंदन करता, हमारे घर में बन बसंत खिल जाती कविता।।…

  • विचारों की शुद्धता | Poem vicharo ki shuddhta

    विचारों की शुद्धता ( Vicharo ki shuddhta )   विचारों की शुद्धता से हर नजरिया बदल जाता हैं। जीवन का कठिन से कठिन समय भी हंसते-हंसते कट जाता हैं। यह विचार ही तो है। जो हमें अच्छे बुरे सही गलत, यश अपयश के बारे में बताते है। एक राष्ट्र भी न जाने कितने समूहों, समुदायों,से…

  • जलधारा से बहे जा रहे हैं | Kavita Bahe ja Rahe Hain

    जलधारा से बहे जा रहे हैं ( Jal dhara se bahe ja rahe hain )    गीत पुराने कहे जा रहे हैं, जलधारा से बहे जा रहे हैं। भाव सिंधु काबू रखो, कब से खड़े हम सहे जा रहे हैं। ये संसार दुखों का सिंधु, पग पग तूफां बने आ रहे हैं। बाधा मुश्किल अड़चन…

  • बोलो जय श्रीराम | Bolo Jai Shree Ram

    बोलो जय श्रीराम ( Bolo Jai Shree Ram )   घर -घर में छाए राम, विराजे देखो अयोध्या धाम, कि बोलो जय श्रीराम, कि बोलो जय श्रीराम। भगवा झंडा लहराया, वर्षों बाद राम को पाया, पूरी दुनिया उमड़ी अयोध्या, ये देखो उसकी माया। जन-जन में है उत्साह, कितना प्यारा है वो नाम, कि बोलो जय…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *