चुनावी हलचल

चुनावी दंगल | Kavita Chunavi Dangal

चुनावी दंगल

( Chunavi dangal )

देश चुनावी दंगल
की चपेट में
भाषणों,वायदों,कसमों
के लपेट में
मग्न हैं
नेतागण लहरदार ।

जनता सुन रही
मनभावन सम्बोधन
टकटकी लगाए बैठे
स्वप्नदर्शी की तरहा

चुनावी हलचल की
दलदल से आहत
कराहते एक कुत्ता
हुआ बेचैन

भीड चीर कर
लपका मंच को
कुत्ते ने नेता
को कोसा

काटा उसे बेरहम
और-फिर डांटा
लगायी फटकार
बेशर्मी मुद्रा में

कुछ यूं धिक्कारा-
शर्म नहीं तुझे
हमारी तरह भौंकते हो
व्यर्थ शक्ति झौंकते हो

कुछ काम करो
” रचनात्मक ”
मनुष्य को न कर
” बदनाम ” !

मेरी इनडोर आदतें;
पूंछ हिलाना
तलबे चाटने
लंगी मारना

है पुराना धंधा
अब मेरे पेट का
आखेट करते हो?
निवाला नोंच-नोंच कर ।

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :- 

शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry

 

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