Kavita gardishon mein muskurate rahe

गर्दिशों में मुस्कुराते रहे | Kavita gardishon mein muskurate rahe

गर्दिशों में मुस्कुराते रहे

( Gardishon mein muskurate rahe )

 

हंसते रहे हम गाते रहे गर्दिशों में मुस्कुराते रहे
तूफां आते जाते रहे हौसलों से रस्ता बनाते रहे
उर उमंगे उठती रही गीत प्यार भरे गुनगुनाते रहे
मौसम बदले रूप कई रूठे को अक्सर मनाते रहे
गर्दिशो में मुस्कुराते रहे

आंधियों में खेले कभी तूफानों में हम पले
मुश्किलों से लड़कर मंजिलों को हम चले
मुस्कानों के मोती ले दीप आशाओं के जलाते रहे
खुशियों के पल सुहाने हंसकर यूं हम बिताते रहे
गर्दिशों में मुस्कुराते रहे

लोग आते रहे कारवां बना बुलंदियां हुई भावन
बाधाएं झुक सी गई आई खुशियां बनके सावन
चेहरे खिले होठों की हंसी तराने सुहाने आते रहे
सबसे गले मिलके हम प्यार के मोती लुटाते रहे
गर्दिशों में मुस्कुराते रहे

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

निर्मल मन के दर्पण में | Geet nirmal man ke darpan mein

Similar Posts

  • माता वैष्णो देवी का धाम | Mata Vaishno Devi

    माता वैष्णो देवी का धाम ( Mata Vaishno Devi ka dham )    त्रिकुटा की पहाड़ियों पर एक गुफ़ा में है ऐसा स्थान, काली सरस्वती लक्ष्मी माता वहाॅं पर है विराजमान। करीब ७०० वर्ष पहले बनवाया यें मंदिर आलीशान, पं श्रीधर ऐसे भक्त हुये थें नहीं कोई जिनके समान।। है विश्व प्रसिद्ध मन्दिर यह माता…

  • अल्बर्ट आइंस्टीन | Albert Einstein

    अल्बर्ट आइंस्टीन ( Albert Einstein )   तुम्हें आशिक कहे या वैज्ञानिक कुछ ना समझ मैं पाता। दुनिया ने माना तुम्हें महानतम वैज्ञानिक । जिसके बुद्धि का लोहा आज भी माना जाता । लेकिन तुम्हारे दिल में जीवन भर रही एक टींस एक प्यास अपने प्रियतम को पाने की। प्रेम की खोज में खोज डालें…

  • शीर्ष लोकतंत्र | Shirsh Loktantra

    शीर्ष लोकतंत्र ( Shirsh loktantra )    हिंद अनुपमा,दिव्य भव्य नव्य रोहक शीर्ष लोकतंत्र वैश्विक श्रृंगार, शासन प्रशासन नैतिक छवि । सुशोभित प्रथम स्थान संविधान, लिखित रूप अंतर ओज रवि । प्राण प्रियल राष्ट्र ध्वज तिरंगा, शौर्य शांति समृद्धि संबोधक । हिंद अनुपमा,दिव्य भव्य नव्य रोहक ।। बाघ उपमित राष्ट्रीय पशु, देश पक्षी शोभना मोर…

  • साथ तुम आ जाओ | Romantic Poetry In Hindi

    साथ तुम आ जाओ   ( Saath tum aa jao ) साथ आज तुम आ जाओ तो, संबल मुझको मिल जाए। जीवन  नैया डगमग डोले, उजड़ी बगिया खिल जाए।।   कंटक पथ है राह कठिन है, कैसे मंजिल पाऊंगा। हाय अकेला चला जा रहा, साथी किसे बनाऊंगा। फिर भी बढ़ता जाऊंगा, शायद किनारा मिल जाए।…

  • अलौकिक प्रतिष्ठा

    अलौकिक प्रतिष्ठा तुम शब्दों से परे हो,तुम्हें बयाँ करना मेरे लिए आसान नहीं।तुम्हारी सरलता में छिपा है गहराई का सागर,तुम्हारी मुस्कान में है दुनिया का उजाला। तुम वो हो, जो खुद को भूलकर,हर पल दूसरों के लिए जीता है।तुम्हारी सोच, सकारात्मकता का एक दर्पण है,जो हर अंधकार में रोशनी लाती है। तुम्हारे कंधों पर समाज…

  • अदावत है | Poem Adawat Hai

     अदावत है! ( Adawat hai )    रूस से अमेरिका की पुरानी अदावत है, दुनिया की शांति के साथ ये बगावत है। कितनी उम्र तक लड़ना चाहेगा अमेरिका, बताओ,यू.एन.ओ. किस तरह की अदालत है। नकेल नहीं कस पाया उसकी जरूरत है क्या, कहीं न कहीं वो भी विश्व के लिए मुसीबत है। नाइंसाफी हो रही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *