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हे आर्य पुत्र | Kavita He Arya Putra

हे आर्य पुत्र

( He Arya Putra )

हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला

दर्श पथ कंटक बाधा ,
किंचित नहीं घबराना ।
थोड़ा चिंतन मनन कर,
मूल कारण पत्ता लगाना ।
फिर लगा दुगुनी ताकत,
दिखा मनुज जलजला ।
हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला ।।

बुलंद हौसलों संग होती,
हर मंजिल आसान ।
संघर्ष सीमा उस पार ,
मिलता सुंदर जहान ।
श्रम निष्ठ तपिश सह,
नैराश्य पसीने संग ढला ।
हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला ।।

आत्मविश्वास मैत्री पर,
जो सदैव आगे बढ़ता ।
नव्य भव्य शिखरों पर,
कीर्तिमान वो ही गढ़ता ।
प्रसून चाह राह पर,
सीख सूल कष्ट सहन कला ।
हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला ।।

दिग्भ्रमित कभी होने पर,
अभिप्रेरणा परम मित्र बना ।
अर्जुन सी निगाहें रख,
नव ओज भर पुनीत मना ।
फिर वरण कर प्रचंड सफलता ,
अब पराजय सूर्य ढल चला ।
हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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