Kavita Itihas

इतिहास | Kavita Itihas

इतिहास

( Itihas )

 

उड़ती हैं नोट की गड्डियाँ भी
दरख़्त के सूखे पत्तियों की तरह
होती है नुमाइश दौलत की
फ़लक पे चमकते सितारों की तरह

बेचकर इमां धरम अपना
बन गई है सिर्फ खेल यह जिन्दगी
अय्याश का भोग हि जीवन बना
धरी की धरी रह गई है बंदगी

शिक्षा जरिया बनी धन का
टूट चुका है बांध मन का
सभ्यता छूटी संस्कार छूटा
बढ़ गया है मोल झूठी शान का

नारी भी रही सिर्फ जात की नारी
शर्मो हया का परदा हटा
बाज़ार सी वो बन चली है
बहुत हि कम मे है अब भी अदब डटा

यही क्या है विकास की परिभाषा
क्या इसी पर रहेगा कल टिका
समझ हो वक्त की वक्त से पहले
तब हि इतिहास उसका बचा

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

सफर का अकेलापन | Kavita Safar ka Akelapan

Similar Posts

  • मैं अपना | Main Apna

    मैं अपना ( Main Apna )    मैं अपना सर्वस्व लुटा दूँ. फिर भी तुम्हारी नजर में नहीं आऊँगा क्योंकि तुम्हारी निरपेक्षता केवल जिहवा पर आती है. तुम बहुत ही माइनर हो, तुमने रचकर छद्म मकड़जाल इसीलिए लोगों को शिक्षा से वंचित किया, जिससे तुम मिटाकर सारी वास्तविकता इतिहास से बता सको दुनिया को नहीं…

  • साथ रहो जब तुम | Saath Raho Jab Tum

    साथ रहो जब तुम ( Saath raho jab tum )   तुम साथ रहते हो तो दुनिया हरी भरी सी लगती हैं। हां साथ रहो जब तुम यह वादी खिली खिली सी दिखती हैं। साथ रहो जब तुम हर पल खुशी बरसती हैं। हां साथ रहो जब तुम पेड़, पौधे ,पत्तियां, भी महकी महकी सी…

  • चलें आओ कन्हैया | Chale aao Kanhaiya

    चलें आओ कन्हैया ( Chale aao Kanhaiya )    चलें-आओ कन्हैया अब नदियाॅं के पार, सुन लो सावरियाॅं आज मेरी यह पुकार। देकर आवाज़ ढूॅंढ रही राधे सारे जहान, इस राधा पर करो कान्हा आप उपकार।। कहाॅं पर छुपे हो माता यशोदा के लाल, खोजते-खोजते क्या हो गया मेरा हाल। आ जाओ तुमको आज राधा…

  • मैदान-ए-जंग में | Maidan-e-jung par Kavita

    मैदान-ए-जंग में ( Maidan-e-jung mein )   मैदान-ए-जंग में जब उतर पड़े रणधीर। हर हर महादेव गूंजे ले हाथों में शमशीर। वंदेमातरम वंदेमातरम बोल रहे रणवीर। महासमर में महारथी कूद पड़े सब वीर। आजादी का बिगुल बजे तीरों पे चले तीर। जान हथेली पे लेकर जब बढ़ चले महावीर। शौर्य पराक्रम ओज भर मैदान में…

  • परम हितकारी है करेला | Karela

    परम हितकारी है करेला ( Param hitkari hai karela )    परम हितकारी एवं औषधीय गुणों का है यह भण्डार, जिसका नियमित-सेवन पेट रोगों में करता है सुधार। ये मधुमेह के रोगियों के लिए जो है औषधि रामबाण, इन हरि सब्जियों में मानों जैसे ये सबका है सरदार।। कड़वा होने पर भी बहुत लोग इसको…

  • दरख़्त कुल्हाड़ी | Kavita

    दरख़्त कुल्हाड़ी ( Darakht kulhari )     बूढ़ा दरख़्त बोल पड़ा कुल्हाड़ी कहर बहुत ढहाती बिन लकड़ी के तू भी व्यर्थ चोट नहीं पहुंचा पाती   जिस लोहे की बनी हुई वह भी तो चोटे सहता है अपना ही जब चोट करें तो दर्द भयंकर रहता है   बिन हत्थे के तू कुल्हाड़ी चल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *