Kavita koi mol nahi us veer ka

कोई मोल नही उस वीर का | Kavita koi mol nahi us veer ka

कोई मोल नही उस वीर का

( Koi mol nahi us veer ka )

 

 

जो औरों के लिए जिएं ज़िन्दगी मुकम्मल है वही,

बन जाएं मरहम किसी का सच्चा इन्सान है वही।

बिना रूके बिना थके जिसका जीवन चलता रहें,

कोई मोल नही उस वीर का देश की शान है वही।

 

यह सरहदें भी क़ायम है उसके खून व पसीने से,

कागज नही वह पेन है जो स्याही छोड़ देते वही।

मां भारती भी रोती है जब जवान शहीद होता है,

उनकी कुर्बानियों पर गर्व करें सच्चा वीर है वही।।

 

मुल्क हिफाजत करते रहते है जांबाज मरते-दम,

चाहे कठिनाइयां आती रहे इनको कदम-कदम।

भिड़ जाते फौलाद बनकर मातृ भूमि के खातिर,

अडिग रहते डटे रहते अपने कर्तव्यों पर हरदम।।

 

जैसे दीपक अंधेरे में रहकर सबको प्रकाश देता,

संघर्ष की कसौटी पर यही जवान खरा उतरता।

वतन की आन बान शान पर आंच ना आने देता,

दीया तले अंधेरा रहता वैसा पाठ ये पढ़ा जाता।।

 

सदैव देश धर्म तिरंगे संविधान की ये रक्षा करता,

हिंद हमारा है हमारा रहेगा आवाम को जगाता।

सेवा भक्ति और विश्व शांति का यही संदेश देता,

आपातकाल भूकंप बाढ़ में सबको यह बचाता।।

 

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • पिता के संग | Pita ke sang

    पिता के संग ( Pita ke sang ) पिता के संग देखे है कई रंग जीवन की आंख मिचोली वक्त के भिन्न रंग दिल में दबे पिता के अरमान आँखों में सजे सपने भूतकाल की जमीं गर्द भविष्य के उजले सवेरे की उम्मीद बांहों में खेलने से लेकर उनके काँधे तक पहुंचने का सफर जिंदगी…

  • माँ का अंश | Maa ka ansh par kavita

    माँ का अंश ( Maa ka ansh )   साँसों का चलना ही जीना होता तो मकसद क्यूं बनते, आपका जाना भी मकसदों का मिटना है माँ- थोड़े और दिन तो मेरे मकसदों का हिस्सा बनते। मैंने पाया है चाहे लाख गुना, पर दिल की गुज़ारिशों के आगे सब फीके लगते, आपका अंश मैं आप…

  • अधर | Muktak adhar

    अधर ( Muktak adhar  ) ( मात्रा भार 16-16 )   अधरों पर जब मुरली बाजे मोर मुकुट पीतांबर साजे राधा कृष्ण प्रेम दीवानी घट घट वासी हृदय बिराजे   अधरों पर मुस्कान ले आती कविता मंचों पर छा जाती भाव भरी बहती गंगा है साहित्य सरिता सबको भाती     कवि : रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला…

  • ईवीएम मशीन दुखियारी

    ईवीएम मशीन दुखियारी बिना बात के ही हैं कोसी जाती , फिर भी चुपचाप सब सह जाती मशीन हैं इसलिए कुछ न कह पाती झूठे सारे आरोप ये दुनिया लगती ।। यही ईवीएम जब किसी पक्ष को जीताती तो उस पक्ष की ये फिर सगी बन जाती वही विपक्ष से तब ये खाती हैं गाली…

  • वाहवाही लूटने लगे | Kavita vaahavaahi lootane lage

    वाहवाही लूटने लगे ( Vaahavaahi lootane lage )   छा गए बड़े मंच पर लेकर शब्दों के माया जाल। हथकंडों से शोहरत पा छवि बनाई बड़ी कमाल।   वाकपटुता के माहिर हो वाह वाही लूटने लगे। प्रसिद्धि के चक्कर में तार दिलों के टूटने लगे।   अपार जनसमूह सारा चलती हास्य की फुहार। व्यंग्य बाण…

  • बापू | Gandhi Smaran

    बापू  ( गाॅंधी स्मरण ) ( Bapu : Gandhi Smaran )   तीन  गोलियों  से  तुमने  चिर  जीवन  पाया बापू !  तुम  अश्वत्थामा  बन  अमर  हो  गये और  हजारों  बरसों   की   कटुता  मलीनता अपने  शोणित गंगाजल  से  सहज धो गये !!   लेकिन तुमने  जिन  पुत्रों से  प्यार  किया था जो  थे  रूठ  रूठ  कर  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *