मौन अभिव्यक्ति | Kavita Maun Abhivyakti

मौन अभिव्यक्ति

( Maun Abhivyakti )

जब सूर्य क्षितिज के नीचे होता है,
और–
आकाश में जब चमक होती है,
उस शांति को सँजोये हुए,
ये छायाएँ चाँदनी की कोमल,
चमक में मिल जाती है,
वही भावनाओं की एक ध्वनि,
उड़ान भरती है,
तब—
मैं रात में अपने दिल की,
फुसफुसाहट सुनती हूँ।
मेरे अन्तःकरण की गहराई में,
प्रेम की कोमल प्रतिध्वनि की-,
प्रतिध्वनि सुनाई पड़ती है,
जो मेरे मीत की आह में,
हल्की हवाओं की तरह,
मेरे ह्रदय की सरगोशी में,
निकट से दुलारती है।
मैं हर धड़कन के साथ,
एक कहानी बुनने लगती हूँ,
उन मीठी स्मृतियों की,
जिन पर मुझे विश्वास है,
जो सपनों की चिलमन में,
निवास करती है,
ये मेरे ह्रदय का विश्वास है,
वही मेरे ह्रदय का मार्गदर्शक है।
वे उन पलों की बात कहते है,
जो कोमल और सच्ची,
साझा हँसी और दबे,
हुये आँसुओं की,
चुराई हुई आँखों की,
मेरे प्रीत की निगाहों की,
जो है प्रेम के वशीभूत,
भूल-भुलैया के उल्लास की।
आधी रात की शांति में,
मैं उनका स्पर्श महसूस करती हूं,
जबकि वो बहुत दूर, मीलों दूर–
मेरे विभाजन को पाटते है,
ये ह्रदय की आहें है,
प्रेम की शीतल, चमकदार लहर है।
प्रेम के आलिंगन पाश में,
ह्रदय ज्ञान पाता है,
हर हड़बडाहट में,
वे प्रेम की कला को चित्रित करते है,
ये ह्रदय की घबराहटें है,
प्रेम की कितनी विचित्र है।
जीवन के यायावर में,
एक मृदुल हवा की तरह,
वे जीवन की बैचेनी के मध्य,
मेरे कदमों का मार्गदर्शन करते है,
वो मुझे उस आश्रय स्थल तक,
ले जाते है,
जिसकी मुझे तलाश है,
ये ह्रदय की आहटों का,
एक ऐसा नम्र प्रेम है।
वे दृढ़ और सच्चे वादों-
की बात करते है,
ये एक ऐसी अभिव्यक्ति है,
प्रेम की,
जो टिकती भी है,
और साझा बोझों के द्वारा,
ली गई परीक्षाएं है,
ये ह्रदय की झलनंकृत घोषणायें है।
सुख और दुःख के साथ,
हर पल में, प्रेम बसता है,
दिल की प्रसन्नता की धुनों में,
ह्रदय की बैचेनियों में,
ये प्रेम की दृढ़ उड़ानें है।
मैं जब इनकी कोमल,
पुकार सुनती हूँ,
मैं बह जाती हूँ उनमें,
मेरी रूह मंत्रमुग्ध हो जाती है,
इस प्रेम के आलिंगन में,
मैं स्वयं सांत्वना पाती है,
ये मेरे ह्रदय की सनसनाटों में,
प्रेम का पवित्र महल है।
इसलिए—-
रात्रि के पहर में,
आलिंगन के सन्नाटे में,
मैं इन सरगोशियों को,
अपने प्रेम की मधुरतम,
स्मृतियों में संजोकर रखती हूं,
क्योंकि उनकी लय में,
मैं प्रवेश पाती हूँ,
और अपने ह्रदय की,
कहानियों से,
हमेशा खुश रहती हूँ।
हर धड़कन में वें गूँजतें है,
यह प्रेम इतना गहरा,
और गहरा है कि-
कम तो हो नही सकता,
वे मेरी जीवन की,
समस्त परीक्षाओं में,
मेरा मार्गदर्शन करते है,
यह मेरे ह्रदय की ध्वनि का,
शाश्वत भाग्य है।
मैं इन प्रिय पलों में,
अपनी ही आवाज पाती हूँ,
कुछ अनकहे शब्द,
फिर भी मेरी रूह को,
आनंदित करते है,
क्योंकि उन सार में ही,
हम अपना स्वयं का चुनाव करते है,
आनंदित होते है,
उस प्रेम के जादू में।
इन शांत पलों में,
हम जब अलग होंगे,
मैं अपने साथ अपने दिल-
की गुनगुनाहट ले जाऊँगी,
प्रेम की मधुर स्मृतियाँ,
एक शाश्वत प्रेम की–
जो कभी विलग ही नही होगी।
तब उन मौन अभिव्यक्तियों में,
हम पायेंगे—–
दिल की सिसकियों को,
जो आपस मे गुंथी हुई है,
ये एक जो प्रेम जो इतना गहरा,
इतना असीम,
गूंथे हुये ह्रदयों के रागो में।
जब सूर्य क्षितिज के नीचे,
हरितिमा के आलिंगन की शांति
में रहता है,
मैं इन सिसकती आहटों को,
शालीनता से संजोकर रखूंगी,
प्रेम की इन मधुर धुन के साथ,
जो पवित्र प्रेम की ठाम की सुंदरता
खोज सके।।

डॉ. पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’
लेखिका एवं कवयित्री
बैतूल, मप्र

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