Kavita Mohabbat

मोहब्बत नाजुक सा एहसास | Kavita Mohabbat

मोहब्बत नाजुक सा एहसास

( Mohabbat nazuk sa ehsaas ) 

 

मोहब्बत नाजुक सा एहसास
बेपनाह इश्क है ये मेरे यार
दर्द भरी दास्तां कह दो या
दिलों का उमड़ता सा प्यार

धड़कनों से होकर उतरता है
दिल की गहराइयों को जाता
तार दिलों के जुड़े होते अटूट
हर कोई शिद्दत से निभाता

दिलवालों की बस्ती में इश्क
हसी वादियो में प्रीत पलती है
प्यार के तराने गूंजते यहां पे
प्रेम की पावन ज्योत जलती है

दीवानों का सुखचैन है प्यार
बहती जहां प्रेम की रसधार
मोहब्बतें गीत नये रचती है
इश्क में महफिले गुलजार

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

जवानी का जोश | Kavita Jawani ka Josh

 

Similar Posts

  • जीवन एक यात्रा | Kavita Jeevan ek Yatra

    जीवन एक यात्रा ( Jeevan ek yatra )  जीवन एक यात्रा है, सपनों का साज है, खुशियों की बगिया है, दुखों का भी राज है। उजालों की मस्तियाँ हैं, अंधेरों का ख्याल है, कभी-कभी कांटों की चुभन, कभी फूलों की माल है। राहें हैं कठिनाइयों की, संघर्ष का मैदान है, हिम्मत से जो चले यहाँ,…

  • इतिहास | Itihaas par Kavita

    इतिहास ( Itihaas )    तकलीफ तो होती ही है, इतिहास पढ करके मुझे। सब सच पे झूठ को लाद कर, बकवास पढ करके मुझे। तकलीफ तो होती ही है…. यह राम कृष्ण की है धरा, जो चिर सनातन सत्य है, फिर क्यो बनाया सेकुलर, यह बात टिसती है मुझे। तकलीफ तो होती ही है…….

  • तुम्हे रुलाने आया हूँ | Marmik kavita

     तुम्हे रुलाने आया हूँ  ( Tumhe rulane aya hun )   हंसने वालो सुनो जरा तुम तुम्हे रुलाने आया हूँ। अश्कों की बरसातों मे आज तुम्हे नहलाने आया हूँ।। जिसको सुनकर झुम उठो तुम ऐसा न संगीत मेरा। अन्तर्मन तक कांप उठेगा दर्द भरा सुन गीत मेरा।। न चाहिये कोई ताली मुझको न अभिनंदन चाहता…

  • भारत रत्न लता मंगेशकर | Lata Mangeshkar par kavita

    भारत रत्न लता मंगेशकर ( Bharat Ratna Lata Mangeshkar ) स्वर-कोकिला और महान थी गायिका, भारत वर्ष की शान ऐसी वो पुण्यात्मा। आवाज़ से बनाई जिसने ऐसी पहचान, ग़वाह है जिसका धरती एवं आसमान।। स्वभाव से शान्त और प्रतिभा की धनी, हिंदुस्तान की धड़कन हस्ती थी ख़ास। मराठी था परिवार लता मंगेशकर नाम, कॅंठो में…

  • कविता परिवर्तन | Kavita Privartan

    कविता परिवर्तन ( Kavita Parivartan )   सोचने को मजबूर एक सोच सुबह के आठ बजे आते हुए देखा एक बेटी को शौच करते हुए नजरें मैंने घुमा ली शर्म उसे ना आए मुझे देख कहीं लज्जित ना हो जाए बना है घर पर शौचालय नहीं शादी के लिए सोना तो जोड़ा पर सुरक्षा के…

  • रब की अदालत

    रब की अदालत   1. वो मजलूमों को बेघर कर बनाया था अलीशां मकां यहां, गरीब,लचारों की बद्दुवा कबूल हो गई रब की अदालत में वहां अब बरस रहा बद्दुवाओं का कहर देखो , जमींदोज हो रहा अलीशां मकां यहां। 2.     हुआ घमंड जब-जब वो गिराते रहे बार-बार, हुआ तालीम, परोपकार जब-जब उन्हीं दुवाओं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *