ननिहाल

ननिहाल | Kavita Nanihal

ननिहाल

( Nanihal )

नानी का घर ननिहाल,
छुट्टियों में मौज मनाते हैं।
मां के संग में कई दिनों,
हम ननिहाल हो आते हैं।

मामा मामी मौसी मौसी,
लाड दुलार भरपूर करते।
नाना नानी हंस हंस कर,
सिर पर अपने हाथ धरते।

खेलकूद मटरगश्ती का,
अद्भुत ठौर ठिकाना है।
स्कूल की छुट्टियों में हमें,
फिर नानी के घर जाना है।

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

आओ पेड़ लगाए | Kavita Aao Ped Lagaye

Similar Posts

  • करगिल जंग | Kavita Kargil Jung

    करगिल जंग ( Kargil Jung ) युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।…

  • होता वही भगवान को जो मंजूर

    होता वही भगवान को जो मंजूर होता वही है, हे भगवान! जो मंजूर आपको होता है। किसी के कुछ भी चाहने से, किसी के ना कुछ चाहने से, क्या होता है? होता वही है, हे भगवान ! जो मंजूर आपको होता है। हे सर्वेश्वर ! हे सर्वशक्तिमान! हे सर्व समर्थवान ! हे पालनहार !सब जग…

  • गुरु गोविंद सिंह जी | Guru Gobind Singh Ji 

    गुरु गोविंद सिंह जी खालसा पंथ की स्थापना करने वाले,महान योद्धा, चिंतक देश के रखवाले।पौष शुक्ल पक्ष सप्तमी संवत् 1723 ,धरा की रक्षा के लिए अवतरित होने वाले।। अन्याय,अपराध के खिलाफ लड़ने वाले,युद्ध में मुगलों के छक्के छुड़ाने वाले।धर्म की रक्षा के लिए सरबंसदानी बने,कलगीधर,दशमेश की उपाधि पाने वाले।। पिता गुरु तेग बहादुर माता गुजरी…

  • विश्व पृथवी दिवस | Kavita Vishwa Prithvi Divas

    विश्व पृथवी दिवस ( Vishwa Prithvi Divas )   पृथ्वी या पृथिवी या मानो विशाल धरा बसता इसके ऊपर ही सृष्टि हरा भरा भू भूमि वसुधा कहो या वसुंधरा धन संपदा का है मुझ में भंडार भरा पेट की छुदा मिटाने को मैं हूं धरित्री संतान का पोषण करती जैसे मां जीवन दात्री धूप छांव…

  • आखरी सत्य | Kavita Aakhri Satya

    आखरी सत्य ( Aakhri Satya ) बहुत दिनों से मेरी फड़क रही थी आँखे। कोई शुभ संदेश अब शायद मिलने वाला है। फिर एकका एक तुम्हें आज यहाँ पर देखकर। दिल अचंभित हो उठा तुम्हें सामने देखकर।। बहुतों को रुलाया हैं जवानी के दिनों में। कुछ तो अभी जिंदा है तेरे नाम को जपकर। भले…

  • हम गांवों के किसान | Kisan

    हम गांवों के किसान ( Hum gaon ke kisan )    हम है गांवों के ग़रीब किसान, करते-रहते है खेतों पर काम। मिलता नही हमको पूरा दाम, लगे रहते खेतों में सवेरे शाम।। पत्नी बच्चे और ‌सभी घरवाले, करते है काम खेतों पर साथ। मिलता है हमें रोटी एवं प्याज, मिलजुल कर खाते हम साथ।।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *