राम के नाम पे | Kavita Ram ke naam pe

राम के नाम पे

( Ram ke naam pe )

 

राम के नाम पे न कीचड़ उछालो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।

छोटे- बड़े का अदब जो सिखाया,
अमन-ओ-अमन का बीड़ा उठाया।
सफर जिन्दगानी सुहानी बना लो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।
राम के नाम पे न कीचड़ उछालो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।

खड़ाऊँ के बल भरत शासन चलाए,
राम के नाम की कीमत दिखाए।
मजहबी खुदाओं से खुद को बचा लो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।
राम के नाम पे न कीचड़ उछालो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।

न सोने की लंका को हाथ लगाए,
विभीषण को देखो राजा बनाए।
गलत ख्वाहिशें जेहन में न पालो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।
राम के नाम पे न कीचड़ उछालो,
बिगड़ी हुई तू अपनी बना लो।

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
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