Kavita sab kathputli hai ishwar ki

सब कठपुतली है ईश्वर की | Kavita sab kathputli hai ishwar ki

सब कठपुतली है ईश्वर की 

( Sab kathputli hai ishwar ki ) 

 

हम कठपुतली सब ईश्वर की,

उसी परमपिता-परमेश्वर की।

जैसे नाच-नचाऐ हम सबको,

फ़ितरत है यही  खिलौने की।।

 

सदा चारों तरफा प्रकाश तेरा,

हर फूल-पत्तों में यह रंग तेरा।

जैसे नाच नचाऐ  हम-सबको,

जन्म व मरण यही खेल तेरा।।

 

ईश्वर खिलाड़ी, हम बाॅल तेरा,

मेंरे सिर पर रखना हाथ तेरा।

हमें बनाना बाॅल या फुटबाॅल,

लेकिन हाथ पांव रखना तेरा।।

 

ईश्वर ही सभी का है रचियता,

जन्म देके नांव में बिठा देता।

सबको कठपुतली सा नचाता,

मृत्यु देके नांव से उतार लेता।।

 

संसार ईश्वर का सारा रंग-मंच,

बाज़ीगर से निराले इनके ढंग।

हम तो कठपुतली खिलौने सी,

तुम डोर हो हमको नचाने की।।

 

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

 

Similar Posts

  • आओ म्हारा राजस्थान मं | Rajasthan diwas special kavita

    आओ म्हारा राजस्थान मं ( Aao mhara Rajasthan ma )   रंग रंगीलो प्यारो म्हारो धोरा रो राजस्थान वीरा री आ धरती मीठां मोरां रो राजस्थान   मरुधरा हेत घणो उमड़ै ईं धोरा री मुस्कान मं पलक पांवड़ा राह बिछावा आओ म्हारा राजस्थान मं   राणा सांगा कुंभा जनम्या राणा प्रताप री आन अठै जौहर…

  • पुष्प | Pushp

    पुष्प ( Pushp )   टूट के डाल से जुदा हो गया फूल तो अपना नूर खो गया मुरझाया मगर खुशबू दे गया बिन कहे बहुत कुछ कह गया जिंदगी बस यूं ही तमाम होगी मुस्कुराया अलविदा हो गया नाम था अब बेनाम हो गया काम का अब बेकाम हो गया नियति का उसे भान…

  • पिता | Pita kavita

    पिता ( Pita )   खुशियों का खजाना है, वो प्यार का सागर है। सर पर ठंडी छाया, पिता प्रेम की गागर है।   गोद में लेकर हमको, दुनिया दिखलाते जो। अंगुली पकड़ हमारी, चलना सीखलाते वो।   तुतलाती बोली को, शब्दों का ज्ञान दिया। ठोकर खाई जब भी, हमको थाम लिया।   जब जब…

  • एलर्जी एवं अस्थमा | Allergies and Asthma

    एलर्जी एवं अस्थमा ( Allergies and asthma )    रोग चाहें कोई सा भी हो वह कर देता है परेशान, वक़्त से ईलाज़ न लिया तो वह ले लेता है जान। ऑंख नाक मस्तिष्क हो चाहें पेट कान गला रोग, कई बीमारियां होती ऐसी जो करती हमें हेरान।। सर्दी व बारिश मौसम में कई लोग…

  • शरद पूर्णिमा का चांद | Sharad Purnima ka Chand

    शरद पूर्णिमा का चांद ( Sharad purnima ka chand )   चारू चंद्र का मनोरम स्वरूप कितना सुंदर कितना प्यारा, इसकी सुंदरता देख रहा है एकटक होकर ये जग सारा। शरद पूर्णिमा का चांद अपनी सोलह कला दिखलाता, मानो अंतरिक्ष के मंच पर सुंदर नृत्य सबको दिखलाता। समूचे ब्रम्हांड में चारों ओर ये चमक चांदनी…

  • मां तुम रोना मत | Maa Tum Rona Mat

    मां तुम रोना मत अब अगले जन्म में मिलनामैं बनने वाला हूंकिसी भी पल लाशयहां बस जंगल हैंगीदड़, कुत्ते, भेड़ियों के दंगल हैंखा जाएंगे नोच –मेरी देह कोतुम्हें मेरी मिट्टी भी नहीं मिलेगीवहीं अपने खेत की मिट्टी कोअपनी छाती से लगा लेनामुझे राजा बेटा कह- कहपुकार लेनामां मत रोना मुझे याद हैजब पहली बार तुमखेत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *