Problems and life

समस्या और जीवन | Kavita Samasya aur Jeevan

समस्या और जीवन

समस्या और जीवन
दोनों रहते हैं संग-संग l
दोनों की महिमा का
भारी विचित्र प्रसंग l

घुल-मिल ऐसे रहते
पति-पत्नी जैसे संग l

टांगें पकड़ खींचें
कोई निकले न आगे l
गाजे-बाजे-गाजे साथ-साथ
इक दूजे की बारात l

कोई किसी से
जीत न पाया l
नूरा कुश्ती का आज
तक अंत न आया l

जीवन है तो समस्या है
समस्या में छिपा है जीवन है l
ना हो एक दूजे का संग
जिंदगी हो जाए बेरंग l

समस्या और जीवन
एक सिक्के के दो पहलू l
अंधियारी रात के बाद
जैसे उगता नव प्रभात l

समस्या से ही जीवन है,
जीवन ही एक समस्या है l
इसमें चढ़े नित-नव-रंग l
वरना जीवन बदरंग l

जीवन में समस्या का
आना अच्छा है l
इससे जीवन निखरता है
सोने जैसा दबंग।

समस्याओं से गुजर कर
आदमी बनता है सोना
चमचमाता है जीवन।

Rajendra Rungta

राजेंद्र कुमार रुंगटा
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

यह भी पढ़ें:-

किताबें खुशबू देती हैं | Kavita Kitaben Khushboo Deti Hai

Similar Posts

  • Kavita अनमोल धरोहर

    अनमोल धरोहर ( Anmol Dharohar )   बेटी हैं अनमोल धरोहर, संस्कृति और समाज की। यदि सभ्यता सुरक्षित रखनी, सींचो मिल सब प्यार से ।।   मां के पेट से बन न आई, नारी दुश्मन नारी की । घर समाज से सीखा उसने, शिक्षा ली दुश्वारी से।।   इच्छाओं को मन में अपने, एक एक…

  • मेरा भाई है वो | Mera Bhai Hai Wo

    मेरा भाई है वो ( Mera Bhai Hai Wo )   क्या कहूं, किसे कहूं, कौन है वो, मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है वो, ना शिकायतें उसे मुझसे, ना शिकवा करे वो, मेरी हर बात बिन कहे ही समझ जाता वो, कब, कहां,कैसे पता नहीं, पर मेरे जीवन का सबसे अहम हिस्सा है…

  • किस पर लिखूँ | Poem kis par likhu

    किस पर लिखूँ ( Kis par likhu )    1. आखिर,किस पर क्या लिखूँ || कलम उठा ली हांथ मे, कागज कोरा ले लिया | बैठा गया मै सोच के, किसी परी पर कविता लिखूँ |  आखिर,किस पर क्या लिखूँ || 2.लिखने बैठा तो सोच मे पड गया, किस-किस की अदाएं लिखूँ | मगर दिख…

  • मौन निमंत्रण | Kavita Maun Nimantran

    मौन निमंत्रण  ( Maun nimantran )    मुझे क्या पता!  वह सामने था लिए कुछ भाव भरा संदेश खड़ा, किंतु मैं पूछ पड़ा तुम कौन यहां ? क्या कर रहा है? भला, मुझसे क्या चाहते हो? या मुझे बताना चाहते हो! कुछ अंतर्मन में लिए भाव भरा। वह मौन था पर कौन था यह  था…

  • ऑटोग्राफ प्लीज | Autograph please kavita

     ऑटोग्राफ प्लीज  ( Autograph please )    सुन मुन्ना सुन पप्पू सुन सुन,सुन सुन मेरे मनीष | ऑटोग्राफ प्लीज , ऑटोग्राफ प्लीज || सुन सूरज सुन चन्दा सुन सुन,सुन सुन मेरे गिरीश | ऑटोग्राफ प्लीज , ऑटोग्राफ प्लीज || 1. तुम भारत के नव भविष्य हो, तुम्हीं हो कल के नेता | जो अपने बस…

  • उपभोक्ता की समस्या | Kavita

    उपभोक्ता की समस्या ( Upbhokta ki samasya )   उद्योगों के विकास में औद्योगिक क्रांति देश में लाया| औद्योगिक क्रांति ने देश में उत्पादन को बढ़ाया| पर बड़े-बड़े कंपनियों ने ग्राहक को उपभोक्ता बनाया| इस उपभोक्ता को विज्ञापन ने खूब रिझाया| इस विज्ञापन ने बिना जरूरत के सामान को जरूरत बनाया| देश की प्रथम जरूरत…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *