मेरा प्यार 

मेरा प्यार | Kavita Mera Pyar

मेरा प्यार 

( Mera Pyar )

दिल है सुंदर मन है सुंदर।
और तुम भी हो सुंदर।
दिलकी बातें कह नहीं पाती।
पर मन के भाव दिखती हो।।

करते हो यदि प्यार तुम
तो आँखो से कह दो।
प्यार तुम्हारा छुप न रहा।
अब तो तुम कुछ कह दो।।

मन तेरा अब भटक रहा है।
दिल भी तेरा डोल रहा है।
मुखसे क्यों नही बोल रहा है।
पर आँखों से बोल रहा है।।

प्यार तुझे जब मुझसे हुआ है।
फिर क्यों तू अब डर रहा है।
हुआ मिलन जब दिलका दिलसे।
तो क्यों नहीं गले लगा रहा है।।

Sanjay Jain Bina

जय जिनेंद्र
संजय जैन “बीना” मुंबई

यह भी पढ़ें :-

कुदरत का करिश्मा | Kavita Kudrat ka Karishma

Similar Posts

  • जीवन-भाग-1

    जीवन-भाग-1 हम अपने जीवन मेंचले जा रहें है कोईदौड़े जा रहे तो कोईदिशाहीन से भटक रहे हैआखिर हम सब जाकहां रहे हैं? मंज़िल कीतलाश है राह दिखती नहींराह तो है पर मंजिलनिश्चित नहीं राह औरमंज़िल दोनों है पर गति नहींआखिर क्या करे ?कैसी ये पहेली है किजीवन जीते सब हैंपर विरले ही जीवनअपना सार्थक जीते…

  • हिंदू नव वर्ष | Kavita Hindu Nav Varsh

    हिंदू नव वर्ष ( Hindu Nav Varsh )   मोहक पल्लव सुगंधि, पिंगल के अभिनंदन में चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा, अद्भुत अनुपम विशेष । नव सत्संवर अनूप बेला, रज रज आनंद अधिशेष । धरा गगन पुनीत पावन, जनमानस रत साधना वंदन में । मोहक पल्लव सुगंधि, पिंगल के अभिनंदन में ।। प्रकृति अंतर यौवन उभार,…

  • सोच कर देखो | Pakshi par Kavita

    सोच कर देखो ( Soch kar dekho ) पक्षी पर कविता   किसी आशियाना को कोई कब तक बनाएगा, जब उखाड़ फेंकने पर कोई तुला हो, बाग बगीचा वन उपवन को छिन्न-भिन्न कर हमें बसाना कौन चाहता है? आज कल वह कौन है जो पेड़ लगाने वाला कोई मिला हो, सुबह होते ही हम कलरव…

  • दिमागी खेल | Dimagi Khel

    दिमागी खेल ( Dimagi khel )    हम चाहते हैं पाना सब बस मेहनत नही चाहते चाहते हैं ऊंचाई नभ की बस ,चढ़ाई नही चाहते… मंजिल दूर हो भले कितनी तलाशते हैं शॉर्टकट रास्ते झुंके क्यों किसी के सामने रखें क्यों किसी से वास्ते… कोई कमी ही क्या है हममें कुछ खास भी क्या उसमे…

  • Hindi poem on child | समझदार हुए बच्चे:हम कच्चे के कच्चे

    समझदार हुए बच्चे:हम कच्चे के कच्चे ( Samajhdar Hue Bache : Hum kache ke Kache )   वह खेल रहा था खेले ही जा रहा था सांप हिरण शेर हाथी और जिब्रा से बिना डरे बिना थके बिना रूके कभी उनके लिए घर बनाता तो कभी छत पर चढ़ाता कभी झूला झुलाता कभी गिराता उठाता…

  • मित्र याद आ गऍं | Mitr ki Yaad

    मित्र याद आ गऍं ( Mitr yaad aa gaye )    मित्रता दिवस पर मित्र याद आ गऍं, अब पुरानें सभी दिन वह कहाॅं गऍं। लड़ना झगड़ना ख़ुशी पल भूल गऍं, सब अपनी दुनियाॅं में जैसे खो गऍं।। गुजारें थे जो पल हमनें साथ रहकर, बेरी के बेर खाए थे पेड़ पर चढ़कर। सॅंग स्कूल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *