रिश्तों की डोर | Kavita Rishton ki Dor

रिश्तों की डोर

( Rishton ki Dor )

घरौंदे टूटकर फिर बनते हैं
बदलते हैं महल खंडहर और
खंडहर महल में
सतत चलती ही रहती है यह प्रक्रिया

हार के बाद कभी जीत न मिली हो
ऐसा नहीं होता किसी के साथ
कोशिश तो करिये और एक बार
शायद सफलता इसी मे हो

होती नहीं कमजोर उम्मीद की डोर
धैर्य और प्रयास बनाये रखिये
मकान रहे न रहे
रिश्तों की गर्माहट मे जान जरूर होती है

न बनाइये कच्ची मिट्टी का घडा इन्हे
पके गागर मे रखा जल हो या भोजन
स्वाद उसका अद्वितीय होता है

काम आते हैं रिश्ते हि हर हाल में
जरूरत तो होती है हर किसी को
माना कि आज उनकी है
नहीं होगी कल तुम्हें कैसे कहें

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

ख़्याल | Kavita Khayal

Similar Posts

  • मतदान करो | Kavita Matdan Karo

    मतदान करो ( Matdan Karo )   कन्यादान को हि कहा गया दान सर्वोच्च किंतु, समय की बदलती धारा में अब, मत दान हि है उच्च करना है यह पुण्य कर्म सभी को अत्यावश्यक् है यह धर्म सभी को इसमें नही भेद भाव उच नीच का समझना है भविष्य का मर्म सभी को एक वोट…

  • कागा की कलम | Kaga ki Kalam

    खोज जो खोजा वो पाया गोता मार गेहराई में ,सीपों में छुपे है मोती मिले गेहराई में ! बीते दिन जीवन के बेठे रहे किनारे पर ,जब ख़्याल आया खोजने का मिले गेहराई में ! कंगाल कोई नहीं सबके अंदर मोजूद माणक लाल ,डूबने का डर छलांग मारी मिले गेहराई में ! जान का ख़त़रा…

  • प्रेम के दो बोल | Prem ke Do Bol

    प्रेम के दो बोल दो बोल मोहब्बत के बोल प्यारेजिंदगी में न ज़हर घोल प्यारेतनहाइयां भरी है जमाने मेंकुछ तो मीठा बोल प्यारे।। क्या लाए हो क्या लेकर जाओगेकुछ न धन का मोल प्यारेदुनिया प्रेम की दीवानी हैप्रेम ही अनमोल प्यारे।। मोहब्बत कर लो थोड़ी जवानी मेंबुढ़ापे में अक्सर झोल प्यारेयाद करेगा कभी जमानाबस दो…

  • धनतेरस | Dhanteras par kavita

    धनतेरस ( Dhanteras ) धन की देवी लक्ष्मी, सुख समृद्धि भंडार। यश कीर्ति वैभव दे, महालक्ष्मी ध्याइये। नागर पान ले करें, धूप दीप से पूजन। दीप जला आरती हो, रमा गुण गाइए। रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ, सब सद्गुण की दाता। खुशियां बरसे घर, दीपक जलाइए। रोली मोली अक्षत ले, पूजन थाल सजाएं। मन वचन कर्म…

  • मोबाईल से दूरी बनाएं | Mobile se Doori Banaye

    मोबाईल से दूरी बनाएं ( Mobile se doori banaye )    मोबाईल के इस शोख ने आज सबको हिला दिया, छोटे-बड़े बच्चें एवं बुड्ढे सबको नाच ये नचा दिया। टेलिविज़न रेडियों एवं एसटीडी को भी भुला दिया, पाश्चात्य संस्कार संस्कृति धीरे-धीरे ये छुड़ा दिया।। धूल-भरी है आज ज़िंदगी व सब जगह पर ‌गन्दगी, खो गई…

  • इच्छाओं का मर जाना | Ichchaon ka Mar Jana

    इच्छाओं का मर जाना अभी भी जीवित है पुष्प, शाख से टूट जाने के बाद, कर्म उसका महकना है, मंजिल से न बहकना है, हो जायेगा किसी प्रेमिका के नाम या आयेगा वीर की शैय्या पे काम, उसे अभी कर्तव्य पथ जाना है, अपने होने का फ़र्ज़ निभाना है वो जीवित है अपनी इच्छओं पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *