Bhukhmari par Kavita

भुखमरी की पीर | Bhukhmari par Kavita

भुखमरी की पीर

( Bhukhmari ki peer ) 

 

भूखे नंगे लाचारों की नित पीर सुनाया करता हूं।
मैं सत्ता के गलियारों में अलख जगाया करता हूं।

जठराग्नि आग बन जाए भूखमरी हो सड़कों पे।
मैं कलम की नोक से आवाज उठाया करता हूं।

बेबस मासूम पीड़ा की तकदीर सुनाया करता हूं।
कचरों में भोजन चुनती तस्वीर दिखाया करता हूं।

लेखनी मशाल जलाके अंधकार मिटाया करता हूं।
मुफलिसी के मारो को नित प्यार जताया करता हूं।

उन अबोध हृदय की वेदना दर्द मैं गाया करता हूं।
नन्ही नन्ही आंखों के मैं अरमान सुनाया करता हूं।

छोटे छोटे नन्हे हाथों की किस्मत जगाया करता हूं।
शिक्षा का दीप जले कोई रोशनी दिखाया करता हूं।

कैसी ये तस्वीर हमारी आइना बतलाया करता हूं।
कविता की हर कड़ी में संवेदना जताया करता हूं।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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