Kavita sita swayamvar

सीता स्वयंवर | Kavita sita swayamvar

सीता स्वयंवर

( Sita swayamvar )

 

सीता स्वयंवर रचा जनक ने धनुष यज्ञ करवाया।
भव्य पावन था अनुष्ठान महारथियों को बुलवाया‌

 

दूर-दूर के राजा आए अब भाग्य आजमाने सभी।
बली महाबली हर कोई बाणासुर आए रावण तभी।

 

विश्वामित्र महामुनि ज्ञानी पधारे जनक पुरी धाम।
गुरु संग हर्षित होकर तब आए लक्ष्मण श्रीराम।

 

चढ़ा सका नहीं प्रत्यंचा कोई धनुष को हिला ना सका।
कामी पुरुष जैसे कोई सती सतीत्व को हिला ना सका।

 

जनक राज व्यथित हुए शिव धनुष अब कौन तोड़ेगा।
कौन है वो भाग्यशाली जनक सुता से नाता जोड़ेगा।

 

राजा महाराजा सारे धनुष तनिक हिला ना पाए।
विश्वामित्र वंदन कर तब प्रभु राम स्वयं आए।

 

मन ही मन प्रणाम गुरु को झट से धनुष उठा लिया।
प्रत्यंचा कसी राम ने जनकराज संताप मिटा दिया।

 

वरमाला सीता माता ने डाली रामचंद्र रघुराई को।
मर्यादा पुरुषोत्तम प्यारे भरत लखन के भाई को।

 

दशरथ नंदन राजदुलारे माता कौशल्या राघव प्यारे।
अवधपुरी के सूर्यवंशी आये सारे जग के पालनहारे।

 

ढोल नगाड़े संग बजे बज उठी शहनाई अब।
मंगल गीत गोरी गाये जनकपुरी हरसाई तब।

 

आज बराती अवधपुरी के सज धज लाए हाथी घोड़े।
झूम झूमकर हर कोई नाचे प्रभु श्रीरामचंद्र धनुष तोड़े।

 

?

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-main-kya-doon-watan-ko/

Similar Posts

  • अस्तित्व | Astitv

    अस्तित्व ( Astitv )    समाज ही होने लगे जब संस्कार विहीन तब सभ्यता की बातें रह जाती हैं कल्पना मात्र ही सत्य दब जाता है झूठ के बोझ तले अवरुद्ध हो जाते हैं सफलता के मार्ग चल उठता है सिर्फ दोषा रोपण का क्रम एक दूसरे के प्रति मर जाती है भावनाएं आपसी खत्म…

  • अच्छा हुआ दोस्त | Kavita acha hua dost

    अच्छा हुआ दोस्त ( Acha hua dost )    अच्छा हुआ दोस्त, जो भ्रम टूट गया साथ होने का तेरा वादा, जो अब छूट गया ।। तुझे बादशाही मुबारक तेरे शहर की, मुझे मेरे गांव का मुसाफिर ही रहने दे ।। अच्छा हुआ चलन नहीं रहा अब किसी के विश्वास का खुद के खुदा को…

  • रख | Kavita

    रख ( Rakh : Hindi Kavita  )   खुशियो भरा पिटारा रख । दिल मे जज्बा प्यारा रख ।। तुझे अकेले चलना है । आगे एक सितारा रख ।। मन मे हो मझधार अगर । अपने साथ किनारा रख ।। धुन्धले पन के भी अंदर । सुंदर एक नजारा रख ।। दुनिया से जो भिड़ना…

  • पर्यावरण दिवस | Hindi Poem on World Environment Day

    पर्यावरण दिवस   पेड़-पौधे काटकर बैनर,पोस्टर बना रहे है, संदेशो में जागरूकता अभियान चला रहे है । विलासिता पूर्ण जीवन जीने की चाहत में, हम प्राकृतिक सम्पदा को नित मिटा रहे है। अपने ही हाथो से घोंटकर गला दरख्तों का, मशीनीकरण के आदी हो जीवन बिता रहे है। किसे परवाह क्या होगा आने वाली पीढ़ी का,…

  • शिक्षक न होते | Shikshak na Hote

    शिक्षक न होते ( Shikshak na hote ) शिक्षक ना होते तब क्या होता ? ये सुंदर , सभ्य संसार ना होता । होने को सब कुछ होता पर , विज्ञान का विस्तार ना होता । फूल भी होती , बाग भी होता , पर वो खुशबूदार ना होता । शिक्षक से ही सुगंध है…

  • धीरे धीरे | Dheere Dheere

    धीरे धीरे ( Dheere dheere )    होता है प्यार ,मगर धीरे धीरे उठती है नजर,मगर धीरे धीरे चढ़ता है खुमार,मगर धीरे धीरे होता है इजहार,मगर धीरे धीरे…. खिलती है कली,मगर धीरे धीरे आते हैं भंवरे ,मगर धीरे धीरे होती है बेकरारी ,मगर धीरे धीरे बढ़ता है इंतजार ,मगर धीरे धीरे…. लरजते हैं होठ,मगर धीरे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *