स्वतंत्रता का उपहार | Kavita Swatantrata ka Upahar

स्वतंत्रता का उपहार

( Swatantrata ka Upahar )

आए निडर हो कर वो,
किया त्याग और बलिदान ।

गर्व करते हैं हम उन पर,
जिन्होंने दी अंग्रेजों को हार ।

बापू की लाठी, आज़ाद का तेज़,
भगत का नारा और लक्ष्मीबाई की तलवार।

वो हैं हमारे वीर महान,
जिन से मिला आजादी का उपहार।

पुरनित कु. दिक्षित

कक्षा – ४ बी ( गुरुग्राम )

यह भी पढ़ें :-

रंगों की बातें | Rangon ki Baatein

Similar Posts

  • चंदामामा | बाल मनुहार | पत्र

    प्रिय चंदा मामा सुनो ना, चंदा मामा! मां जब मैं आपसे मिलने की जिद करता हूं तो मुझे थाली में पानी भरकर तुम्हे दिखाती है। कहती है कि जैसे तुम्हारे पापा वीडियो कॉल करते है ना वैसे ही है । जब पूछता हूं चंदा मामा बोलते क्यू नही तो कहती है ‘ उन्हें बहुत से…

  • बच्चों के चंदा मामा | Chandamama Bal Kavita

    बच्चों के चंदा मामा ( बालकाविता )   मम्मी कहती, बहुत दूर है चंदा मामा, नभ न तारें बिखराते। इतनी दूर भला कैसे, बच्चे के हाथ पहुंच पाते। गहरा रिश्ता उनका हमसे, तभी चांदनी पहुंचाते। बच्चों, ज्यादा दूर नहीं मैं तुमसे, चंदा मामा बतलाते। इसरो ने फिर हमें बताया, मिलने की हो चाह जहां, मिल…

  • पिकनिक | वनभोज

    पिकनिक  ( Picnic ) जाता नहीं कोई रोज, मनाने को वनभोज, करते मुझे क्यों हो तंग, चलो पिकनिक हर रोज, बच्चों जरा पढ-लिख लो, खुल गई है स्कूल, फिर छुट्टी के दिन चलेंगे, करेंगे छुट्टी वसूल, बड़े-बूढ़े और बच्चे खुश, हो जाते हैं पिकनिक से, सारी चिंताएं वो भूल, वहीं हो जाते हैं मसगूल, जाते…

  • आओ पेड़ लगाएं

    आओ पेड़ लगाएं बच्चो आओ पेड़ लगाएं।अच्छे से फिर हम उन्हें बचाए,पेड़ो को हम देखे भाले।समय समय पर पानी डालें, पेड़ो को हम खूब सजाएं।पेड़ो पर भी चित्र बनाएं,पेड़ो पर भी बच्चे खेले।उन पेड़ो पर झूला झू‌ले, पेड़ो पर हम खेले कूदे।झूला डाल कर झूला झू‌ले। असदुल्लाह एजाजकक्षा 6विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय बनकसही यह भी…

  • चिड़िया रानी | Kavita Chidiya Rani

    चिड़िया रानी ( Chidiya Rani )   चिड़िया रानी चिड़िया रानी क्यो करती इतना मनमानी! रोज सवेरे तुम हो आती आकर पुन:कहां हो जाती !! चाहूं साथ खेलना तेरे क्या खेलोगी साथ तुम मेरे ! आना-जाना अब तुम छोड़ो खेलो साथ में मिलकर मेरे !! देखो फिर ना फुर हो जाना नये नये नित गीत…

  • महत्त्व समय का | Mahatva Samay ka

    महत्त्व समय का ( Mahatva samay ka )    सुनो सुनो प्यारे बच्चे, मन से सच्चे, अक्ल के कच्चे। आओ “समय की कहानी” सुनाऊं, बात पते की तुम्हें बताऊं। प्रातः समय से जो उठता है, सबसे आगे वो रहता है। काम वक्त से कर लेता है। नहीं समय जो खोता है। आलस्य की चादर ओढ़…

11 Comments

  1. Awesome and a very strong poem. The rhyming words are so confidently matching with each other. Happy Independence Day.

Leave a Reply to Neeti Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *