Kavita toofan

तूफान | Kavita toofan

तूफान

( Toofan )

 

सर पे आसमां रखता दिल में समाए तूफां रखता।
शमशीरो का आगार हूं हृदय में हिंदुस्तान रखता।

 

तूफान उठे उठने दो चाहे बिजलिया गिरे अविरत।
बुलंद हौसला रखे दिल में रहती माँ भारती मूरत।

 

हम आंधी तूफानों को भी मोड़ नया दिखा देंगे।
काली अंधियारी रातों में हम राष्ट्रदीप जला देंगे।

 

कलम जब बोल देती है तूफान खड़ा हो जाता है।
सत्ता की उन गलियों में बवाल बड़ा हो जाता है।

 

जब जब सच्चाई पर चले कई तूफान झेले हैं।
ये दुनिया बड़ी रंगीन किरदारों के लगते मेले हैं।

 

आंधी तूफानों में पलते प्यार के मोती लुटाते हैं।
दर्द की दवा हम बनकर सबको गले लगाते हैं।

 

यही संस्कार हमारे हैं सभ्यता जो हमने जानी है।
आदर करना सीखा हमने एक सब हिंदुस्तानी हैं।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

जल संरक्षण | Poem jal sanrakshan

Similar Posts

  • समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • रक्षाबंधन का बसंत | Raksha Bandhan ka Basant

    रक्षाबंधन का बसंत  ( Raksha Bandhan ka Basant )    अब न रिस्तों का होगा अंत रक्षा बंधन का आया है ले लेकर खुशियों का बसंत अब न रिस्तों का होगा अंत।   रंग बिरंगे उन धागों का गुच्छ अनोखा अनुरागों का, गांठ बांध कर प्रीति सजाकर अरुण भाल पर तिलक लगाकर,   दीप जलाकर…

  • दिल तो बच्चा है जी | Kavita dil toh baccha hai ji

    दिल तो बच्चा है जी ( Dil toh baccha hai ji )    सुनता कहां किसी की कभी करता रहता ये मनमानियां दिलकश अदाएं इसकी बड़ी चुपचाप रहता संग खामोशियां किसी को बताता बिल्कुल नहीं मनमौजी बहुत करता नादानियां गुमसुम नहीं ये, यह मालूम है मुझे है पता दिल तो मशगूल अपनी ही धुन मैं…

  • सफर | Kavita Safar

    सफर ( Safar )   हंसाती भी है रुलाती भी है जिंदगी न जाने कितने मोड पर लाती है जिंदगी कटते जाता है सफर दिन रात की तरह मौसम के जैसे बदलती जाती है जिंदगी मिलते हैं अपने भी और पराये भी यहाँ सभी के साथ ही गुजरती जाती है जिंदगी बहते रहना है हमें…

  • मेरे हिस्से का प्रेम

    मेरे हिस्से का प्रेम मैं तुम सेदूर हूँधूप और छाँव की तरहपुष्प और सुगंध की तरहधरा और नील गगन की तरहदिवस और निशा की तरहजनवरी और दिसम्बर की तरहसाथ-साथ होते हुए भीबहुत दूर- बहुत दूर परन्तुप्रति दिन मिलता हूँतुम सेतुम्हारी नयी कविता के रूप मेंनये शब्दों के रूप में जीवन मेंकभी कोई सुयोग बना..तोमैं तुम…

  • भाग्य | Poem on Bhagya

    भाग्य ( Bhagya )   भाग्य निखर जाये हमारा जब तकदीरे मुस्काती। ग्रह आकर साथ देते, खुशियों की घड़ी आती। सेवा स्नेह संस्कार हृदय में विनय भाव पलता है। सद्भावो की धारा में, पुष्प भाग्य खिलता है। पुष्प भाग्य खिलता है किस्मत के तारे चमकते, सुखों का लगता अंबार। अनुराग दिलों में पलता, जीवन में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *