ऋतुराज | Rituraj par Kavita

ऋतुराज

सर्दियों को कर दो अब तुम विदा
बसंती पवन पे सब हो रहे फिदा

ऋतुराज की ये मनमोहक अदा
मेहरबान धरती पर हो जैसे खुदा

अंबर से देखो सरसों का रूप खिला
हरि हरि चुनर को ओढ़ के गेहूं खिला

कोयल का आमों पर डेरा डला
अमवा की बोर से लगे ताज सजा

पलाश टेसू के फूलों से पूरा लदा
सरस्वती के साधक को ज्ञानमिला

लहलहाती फसलें हैं मेहनत का सिला
कामदेव को जैसे आमंत्रण मिला

रति को पहले अपने साथ लिया
प्रकृति से धरती का सिंगार किया

सूर्यनारायण को मन में नमन किया
भंवरो ने फूलों पर गुंजन किया

मधुमास ने बेरो की गंध संग आगमन किया
बसंती पवन पर सब हो रहे हैं फिदा

मदमस्त बयार संग बहके है पिया
गोरी से मिलन को धड़के जिया

बसंती पवन पर सब हो रहे हैं फिदा
ऋतुराज की यह है मनमोहक अदा

 

डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार
टीकमगढ़ ( मध्य प्रदेश )

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