ग़ज़ल खंडहर | Khandhar

खंडहर

(Khandhar ) 

 

वक्त के साथ मशीनों के पुर्जे घिस जाते है
जाने कितने एहसासों में इंसान पिस जाते है।

ज़िन्दगी का शिकार कुछ होते है इस कदर
उबर कर भी कितने मिट्टी में मिल जाते है।

शामोसहर बेफिक्री नहीं सबके नसीब में
जीने का सामान जुटाने में ही मिट जाते है।

ताकीद करता है दिल नई किसी दस्तक पर
नज़रों के सामने कई अहलेवफ़ा छिप जाते है।

जरूरत न हो तो पूछने से भी कतराते फिरते
महलों के पत्थर भी खंडहर बन बिछ जाते है।

 

शैली भागवत ‘आस’
शिक्षाविद, कवयित्री एवं लेखिका

( इंदौर ) 

यह भी पढ़ें :-

हिंद का गौरव-हिंदी | Hindi Diwas ki Kavita

Similar Posts

  • उसका मज़ा ले

    उसका मज़ा ले गुलों सी ज़िन्दगी अपनी खिला लेजो हासिल हो रहा उसका मज़ा ले मुहब्बत हो गई है तुझको मुझसेनिगाहें लाख तू अपनी चुरा ले खरा उतरूंगा मैं हर बार यूँहींतू जितना चाहे मुझको आज़मा ले लुटा दूँगा मैं चाहत का समुंदरकिसी दिन चाय पर मुझको बुला ले घटा छाती नहीं उल्फ़त की हर…

  • यूं ही रखना सदा ख़याल अपना।

    यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। दूर जाकर भी ख़ुश जमाल अपना।यूं ही रखना सदा ख़याल अपना। जो भी है आपका ही है वल्लाह।हम को कुछ भी नहीं मलाल अपना। कुछ तो बतलाओ ऐ तबीब-ए-दिल।ह़ाल कैसे हो अब बह़ाल अपना। कौन देखेगा माहो-अन्जुम को।छत पे आ जाए गर हिलाल अपना। ह़ालत-ए-ह़ाल भूल जाओगे।हम दिखा दें…

  • प्यार की ये अजब रीत है | Pyar Ki ye Ajab Reet Hai

    प्यार की ये अजब रीत है ( Pyar Ki ye Ajab Reet Hai ) प्यार की ये अजब रीत है।हार में भी छुपी जीत है।। किससे शिकवा करें हम कहो,पास में जब नहीं मीत है।। धूप के साथ है छांव भी,ज़िन्दगी ऐसा ही गीत है।। दूर होकर लगे पास वो,हां यही सच कहूं प्रीत है।।…

  • बेहाल हर घड़ी | Behal har Ghadi

    बेहाल हर घड़ी ( Behal har ghadi )   बेहाल हर घड़ी बड़ी बेचैन जान है ये इश्क जानिए कि कड़ा इम्तिहान है। हैं मस अले तमाम ख़फा तिस पे वो हुए सर पर उठा के रखा हुआ आसमान है। सब मानते वो शख़्स नहीं ठीक है मगर हर दिल अज़ीज़ यूं है के मीठी…

  • मंदिर मस्जिद | Poem on Mandir Masjid

    मंदिर मस्जिद ( Mandir Masjid )   करना क्या है ? मंदिर मस्जिद और खाना है ! मंदिर मस्जिद भर रक्खी है नफ़रत दिल में कर रक्खा है मंदिर मस्जिद खूब लड़े हैं भाई भाई मुद्दा क्या है ? मंदिर मस्जिद आपका बेटा पढ़ा लिखा है क्या करता है ? मंदिर मस्जिद ख्वाहिश जो पूछो…

  • अक्ल नहीं है | Ghazal Akal Nahi Hai

    अक्ल नहीं है (Akal Nahi Hai )   अक्ल नहीं है उस जाहिल में खोया दिल उसका ग़ाफ़िल में रब टाल मुसीबत सर पे है जा है मेरी तो मुश्किल में बात छुपा न सनम तू कोई बोल ज़रा जो तेरे दिल में यादों की फुवारे आती है मोज़े उठती जो साहिल में सारे आये…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *