ख्वाब की ताबीर हो तुम | इक नज़्म

ख्वाब की ताबीर हो तुम

( Khwab ki tabeer ho tum ) 

 

खुदा की लिखी कोई तहरीर तुम हो
या किसी भूले ख्वाब की ताबीर हो तुम

तस्सव्वुर में आये किसी ख्याल की तदबीर हो
या तकाज़ा मेरी तकदीर का हो तुम

मेरी किसी तमन्ना की जैसे तासीर तुम हो
या दिल में बसी कोई पुरानी तस्वीर हो तुम

तलब़ भी है तुम से, तकरार भी हो तुम
तौफ़ीक भी तुम ,जीने की वज़ह भी हो तुम

तक़वा है कुछ, और कुछ तूफान से है डर
वरना तक्सीर कर कुछ ऐसा, तर’दमान हो जायें हम.

 

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

तुम कहो तो | Tum Kaho to

Similar Posts

  • सीखी है अय्यारी क्या

    सीखी है अय्यारी क्या सीखी है अय्यारी क्याइस में है फ़नकारी क्या सब से पंगा लेते होअ़क्ल गई है मारी क्या ऐंठे-ऐंठे फिरते होशायर हो दरबारी क्या लगते हो भारी-भरकमनौकर हो सरकारी क्या जाने की जल्दी में होकरली सब तय्यारी क्या तोपें खींचे फिरते होकरनी है बमबारी क्या सबको धोखा देते होअच्छी है मक्कारी क्या…

  • मैं भी था | Main Bhi Tha

    मैं भी था तुम्हारे हुस्न-ओ-अदा पर निसार मैं भी थातुम्हारी तीर-ए-नज़र का शिकार मैं भी था मेरे गुनाह ख़ताएं भी फिर गिना मुझकोतेरी नज़र में अगर दाग़दार मैं भी था बहुत ही ख़ौफ़ ज़माने का था मगर सचमुचतुम्हें भी अपना कहूँ बेकरार मैं भी था यक़ी न होगा तुझे पर यही हक़ीक़त हैहसीं निगाहों का…

  • सताया न कर | Sataya na Kar

    सताया न कर ( Sataya na Kar )   ज़ब्त रब का कभी आज़माया न कर बेवज़ह मुफ़लिसों को सताया न कर। है खफ़ा तो पता ये उसे भी लगे ख़ुद ब ख़ुद आदतन मान जाया न कर। रंजिशें दरगुज़र भी किया कर कभी तल्ख़ियां बेसबब यूं बढ़ाया न कर। तोड़ कर ख़्वाब ग़र तू…

  • सँभलना जो सिखातें हैं

    सँभलना जो सिखातें हैं सँभलना जो सिखातें हैं यहाँ बापू मिले मुझको ।बिठाकर काँध पर घूमें वही चाचू मिले मुझको ।।१ जहाँ में ज्ञान सच्चा जो सिखाये सीख लेता हूँ ।मुझे जो राह पे लाये वही अब गुरु मिले मुझको ।।२ तमन्ना आखिरी अब यह कहीं मैं तीर्थ पे जाऊँ ।वहाँ भगवान के ही रूप…

  • नोचे वही वरक़ | Noche Wahi Varak

    नोचे वही वरक़ ( Noche wahi varak )   बाक़ी हुरूफ़ जो ये मेरी दास्तां के हैं अहसान यह भी मुझ पे किसी मेहरबां के हैं रह रह के बिजलियों को है इनकी ही जुस्तजू तिनके बहुत हसीन मेरे आशियां के हैं क़ुर्बानियाँ शहीदों की भूले हुए हैं लोग गुमनाम आज नाम उन्हीं पासबां के…

  • दो बूँद पानी चाहिए | Do Boond Pani Chahiye

    दो बूँद पानी चाहिए ( Do boond pani chahiye )   बात तो अहल-ए-ख़िरद यह भी सिखानी चाहिए हर बशर को देश की अज़्मत बढ़ानी चाहिए ऐ मेरे मालिक ये तेरी मेहरबानी चाहिए काम आये सब के ऐसी ज़िंन्दगानी चाहिए दे गया मायूसियाँ फिर से समुंदर का जवाब जबकि मेरी प्यास को दो बूँद पानी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *