किसी के प्यार में

किसी के प्यार में | Pyaar mein kavita

किसी के प्यार में

( Kisi ke pyaar mein )

 

जब हम किसी के

प्यार में होते हैं तो……

बहुत से अपनों को खो देते हैं

सबसे कतराते रहते हैं

एक डर सा बना रहता है

चेहरे की हवाइयां उड़ी रहती है

मन में भी एक खटका रहता है।

 

जब हम किसी के

प्यार में होते हैं तो…..

प्रेमिका के सिवा बस

ओर कुछ नज़र आता ही नहीं है

सब बिसर जाता है

अपनों से नज़र भी

नहीं मिल पाती है अपनों से!

 

जब हम किसी के

प्यार में होते हैं तो…….

धीरे धीरे घर में भी

तक़रार होना शुरू हो जाती है

छोटी छोटी बातों पर

क्रोध आने लगता है

फिर दूरियाँ भी बढ़ जाती है !

 

जब हम किसी के

प्यार में होते हैं तो……..

मन में ईर्ष्या घर कर जाती है

नफ़रत भी होने लगती है

किसी की भी नहीं सुनते

सबकी बातें अनुचित लगती है……..!!

 

 

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें :

मौला तू करम करना

Similar Posts

  • मुझे बच्चा ही रहने दो

    मुझे बच्चा ही रहने दो क्या कोई मेरा दर्द जानेगामेरी पीड़ा को पहचानेगासबसे पहले तो आप सब को नमस्तेतीन साल की उमर से टंगे भारी बस्तेपापा और मम्मी के सपनो के वास्तेरोज परीक्षा और परिणाम की टेंशनपड़ोसी बच्चो के आगे निकल जाना होता मेंशनस्कूल और परिवार का फर्स्ट आने का दबाबकौन देगा मेरे बचपन का…

  • क्या आचार डालोगे रूप का | Kya Achar Dalogi Roop ka

    क्या आचार डालोगे रूप का आज समोसा बोला कवि से,क्यों इतना घबड़ाते हो। मिलाकर चटनी,खट्टी मीठी,अपना स्वाद बढ़ाते हो। मेरी कैसी दुर्गति होती,क्या तुम कभी लिखपते हो। देख तड़पता मुझको तलते,अपना हाथ बढ़ाते हो।। पहले पानी डाल मजे से,घूंसे से पिटवाते हो। हाथों से फिर नोच नोच कर,बेलन से बेलवाते हो। हरा लाल मिर्चों की…

  • नव वर्ष का आगमन

    नव वर्ष का आगमन नव वर्ष का आगमन, बीते का अवसान।इस मिश्रित बेला में, देता हूँ यह पैगाम।। हुआ साल पुराना, वर्ष नया आएगा।बीते दिनों का, लेखा-जोखा पाएगा।। हर्ष-उल्लास के, अक्सर कई पल पाए।एक नहीं अनेक, दुखद प्रसंग भी आए।। जाने-अनजाने, अवसर भी रहे होते।कुछ को पाया हमने, बाकी रहे खोते।। रख विषाद साल पूरे,…

  • अवध पहुंचे राम रघुराई | Awadh Pahunche Ram

    अवध पहुंचे राम रघुराई ( Awadh Pahunche Ram Raghurai )    शुभ बेला आज फिर आई, अवध पहुंचे राम रघुराई। लंका पर विजय जब पाई, घर घर बंट रही मिठाई। दंभ मिटा दशानन सारा, बाण मार पापी को तारा। लंका राज विभीषण दीना, रामनाम महिमा अपारा। रामेश्वर की करी स्थापना, रामसेतु नल नील बनाया। सुग्रीव…

  • विरह वेदना | Virah Vedna

    विरह वेदना ( Virah Vedna )    सोहत सुघर शरीर नीर अखियन से बहे आतुर अधर अधीर पीर विरहन के कहे। चित में है चित चोर शोर मन में है भारी सालत शकल शरीर तीर काम जब मारी । शीतल सुखद समीर शरीर तपन जस जारे दाहत प्रेम की पीर हीर बिन कौन उबारे। मन…

  • नाग पंचमी | Poem Nag Panchami

    नाग पंचमी ( Nag Panchami ) गाय दुग्ध मे नहलाते नागों को नाग लोक मे, जले अग्नि मे महाभारत काल नाग यज्ञ में, रक्षा नागों की ब्राम्हण आस्तिक ने रोंक यज्ञ की, श्रावण शुक्ल पंचमी का दिन था यही विपुल, भाई बहन की है कथा इसमें बड़ी पावन, हम हर्षाते नागपंचमी कह इसे मनाते, दूं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *