हिन्दी
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हिन्दी

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भारत की शान है हिन्दी
भारत की पहचान है हिन्दी।
संस्कृत की संतान हैं हिन्दी ,
हमारी संस्कृति की शान है हिन्दी।
भारत के भाल की है बिन्दी,
हम सब का अभिमान है हिन्दी।
हिन्दी से है हिन्दुस्तान,
जग में है इसका नाम।
ज्ञान का भंडार है हिन्दी ,
कई भाषाओं को दी हैं जिंदगी;
जी हां जी हां हमारी हिन्दी।
हमारी राष्ट्र भाषा , मातृभाषा भी है,
विश्व के प्रमुख भाषाओं में इसकी गिनती है,
लाखों करोड़ों जनता जिसे बोलती है।
जानती समझती अपनाती है,
सबसे स्नेह दुलार यह पाती है;
विदेशों में भी खुल रही हिन्दी यूनिवर्सिटी है।
हमारे अस्तित्व का है सूचक ,
है गुरू और शिक्षक ।
सीखने सिखाने में है सहायक,
वार्तालाप में यह आनंददायक।
निर्णय लेने में है निर्णायक,
पग पग पर खड़ा पथप्रदर्शक;
इसकी अवहेलना है निरर्थक।
इसी से है आशा,
जन जन की है भाषा।
हमारी राष्ट्र भाषा/मातृभाषा हिन्दी,
बदल रही लाखों की जिंदगी।
है प्रगतिपथ पर अग्रसर,
चीन जापान में भी बोली जा रही है धड़ाधड़।
सबके होंठों की बन रही है मुस्कान,
भारत को मिली है इससे विशेष पहचान।
स्वतंत्रता आंदोलनों में है जिसका योगदान,
मानव सभ्यता पर भी है इसका एहसान ।
इसी ने सही मायने में दी जिंदगी है,
हम-सब का अभिमान हिन्दी है;
हमारी और देश की पहचान हिन्दी है।

 

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नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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