मित्र ( Mitra ) बाद वर्षो के कितने मिले हो मुझे, अब कहो साल कैसा तुम्हारा रहा। जिन्दगी मे कहो कितने आगे बढे, जिन्दगी खुशनुमा तो तुम्हारा रहा। मित्र तुम हो मेरे साथ बचपन का था, पर लिखा भाग्य मे साथ अपना न था। ढूँढता मै रहा हर गली मोड पर,…
ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ! अंदर से इतना टूटा हूँ दिल से उसका मेरे भुला रब यादों में जिसकी रोता हूँ नफ़रत उगली है उसने ही जब भी कुछ उससे बोला हूँ ग़ैर हुआ वो चेहरा मुझसे उल्फ़त जिससें मैं करता हूँ…
अब रहा है कौन अपना गांव में ( Ab raha hai kaun apne gaon mein ) अब रहा है कौन अपना गांव में रह गया हूँ देखो तन्हा गांव में! वो नहीं आया नगर से लौटकर रस्ता उसका रोज़ देखा गांव में छोड़ आया हूँ नगर मैं इसलिए है मकां ए…
तुझसे जब तलक़ मुहब्बत करते रहे हम ( Tujhse Jab Talaq Muhabbat Karte Rahe Ham ) तुझसे जब तलक़ मुहब्बत करते रहे हम बड़े सलीके से इबादत करते रहे हम मंजूर-ए-खुदा है इश्क़, किया जाए इस बात पर सदा बगावत करते रहे हम उसको रास्तों पर जब जब भी देखा हमने…
जीस्त तन्हाई की सहेली है! ( Jeest Tanhai Ki Saheli Hai ) जीस्त तन्हाई की सहेली है! कट रही जिंदगी अकेली है नफ़रतों की बू कम नहीं होती देखो फ़िर भी खिली चमेली है जो सुलझती नहीं बातें दिल की बन गयी वो उल्फ़त पहेली है दोस्ती के टूटे है वो…
न खुशियां मिली ( Na khushiyan mili ) न खुशियां मिली आस पास में कटे रोज़ दिन अब उदास में बुझा प्यास रब भेज कोई अब मुहब्बत कि जिस डूबा प्यास में दिखाते वही दुश्मनी मुझे देखे बैठे पास पास में न पीने कि वो दे गया क़सम भरा जाम…