Hindi poetry on life

  • चाहिये | Chahiye poetry

    चाहिये ( Chahiye )   तेरे मेरे बीच की अब धुन्ध छटनी चाहिये । आग की दीवार दरिया में बदलनी चाहिये ।।   जमाना कठपुतलियों का बहुत पीछे रह गया । उनको सीधे उंगलियों से ही उलझना चाहिये ।।   मेरी मेहनत तुम्हारी दौलत का झगड़ा बात से । नहीं सुलझा , सड़क पर उसको…

  • Poem on truth of life in Hindi | सुख दुख सब मन की माया

    सुख दुख सब मन की माया ( Sukh dukh sab man ki maya )   उर जोत जला आशा की नेह का दीप जलाता आया मुस्कानों के मोती बांटो सुख-दुख सब मन की माया   अटल हौसला जोश जज्बा साहस उर भर लो भरपूर प्रेम के मोती लुटाकर प्यारे जग में हो मशहूर   सेवा…

  • उलझन | Hindi poetry on life

    उलझन ( Uljhan )   उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है।   जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े।   रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले।   विकास…

  • कितना आसाँ है कहना – भूल जाओ | Ghazal

    कितना आसाँ है कहना – भूल जाओ ( Kitna aasan hai kehna – bhool jao )   इस दिल पे इतनी सी इनायत करना सुर्ख लबो में अलफ़ाज दबाये रखना खामोश रही आँखो पे सवालात न करना चंद रौशनदानो को भी घर में खुला रखना   हवा का रुख बदलेगा जमाना जब भी घर की…

  • मत करना अभिमान | Kavita

    मत करना अभिमान ( Mat karna abhiman )   माटी  का  ये  पुतला  तेरा,दो दिन का मेहमान। न जाने कब क्या हो जाए,मत करना अभिमान।।   सुंदर काया देख लुभाया , मोह माया में जकड़ गया।। अन्न धन के भंडार भरे जब, देख ठाठ को अकड़ गया। बिना  काम  ही  झगड़  गया,  सोच  समझ  नादान।।…

  • साथ तुम आ जाओ | Romantic Poetry In Hindi

    साथ तुम आ जाओ   ( Saath tum aa jao ) साथ आज तुम आ जाओ तो, संबल मुझको मिल जाए। जीवन  नैया डगमग डोले, उजड़ी बगिया खिल जाए।।   कंटक पथ है राह कठिन है, कैसे मंजिल पाऊंगा। हाय अकेला चला जा रहा, साथी किसे बनाऊंगा। फिर भी बढ़ता जाऊंगा, शायद किनारा मिल जाए।…

  • सड़क सुरक्षा | Kavita

    सड़क सुरक्षा  (Sadak  Suraksha )   अपने और अपने परिवार पर कुछ तो तरस खाइए सड़क पर यूँ लापरवाही से गाड़ी मत चलाइएँ । जिंदगी है अनमोल रत्न इसे व्यर्थ ना गवाइएँ सड़क सुरक्षा नियमों को अपने जीवन में अपनाइए ।।     कुछ नौजवान बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते हैं कहते हैं हेल्मेट से…

  • पहचान | Kavita

    पहचान ( Pehchan )   प्रेम के मोती लुटाओ प्रतिभा कोई दिखाओ पहचान  जग  में  कोई  नई  बनाईए सफलता मिल सके पर्वत भी हिंल सके जंग  भरी  दुनिया  में  हौसला  बनाइए लगन से मेहनत रंग जरूर लाएगी पहचान जग में आप ऐसी बनाईए पूर्वजों की साख में चार चांद लग जाए कर्म  पथ  पर  अपनी …

  • मेरा बचपन | Poetry On Bachpan

    मेरा बचपन ( Mera bachpan)   वो रह रह कर क्यों याद आता है मुझे वो मेरा बचपन जो शायद भूल मुझे कहीं खो गया है दूर वो मेरा बचपन… वो पापा की बातें मम्मी का झिड़कना इम्तिहान के दिनों में मेरा टीवी देखने को ज़िद करना…. कितना मासूम था भोला था वो कितना न…

  • कौन हूँ मैं | Kavita

    कौन हूँ मैं? ( Kaun hoon main kavita )   सहमी सहमी कमजोर नहीं हूं भीगी भीगी ओस नहीं हूं आसमान पर उड़ने वाली चंचल चितवन चकोर नहीं हूँ   कोमल कच्ची डोर नहीं हूं अनदेखी से उड़ने वाली शबनम सम छोटी बूँदों जैसी खुशबू भीनी हिलौर नहीं हूं   कुछ जुमलों से डर जाउंगी…