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संत्रास | Gitika chhand
ByAdminसंत्रास ( Santras ) ईर्ष्या, पीड़ा, शत्रुता, अति, अभाव का त्रास ! हीन भावना , विवशता , से निर्मित संत्रास !! मन में पाया बिखरता, जब इनका अंधियार चाहा कारण खोज ले, क्यों है यह प्रतिभास !! मन ने सुन ली सहज ही , मन की सारी पीर समझ लिया था जान…

चाँद को निखार कर
ByAdminचाँद को निखार कर चाँद को निखार कर आज बहुत प्यार दूँ,प्रेमिका की झूमती लटे बिन कहे संवार दूँ निज हृदय प्रतीत होते प्रेम की बात हैछोड़कर समाज य़ह कामना की बात हैहृदय के प्रकोष्ठ यूँ अनुभाव कांपते रहेहृदय को न्यौछावर कर भावना की बात हैरूप कांच को छुए नहीं दृश्य को संवार लूँअपनी निश्चल…

Best Hindi Kavita | Best Hindi Poetry -मन की बातें
ByAdminमन की बातें ( Man ki Baaten ) इस रात मे तन्हाई हैं, बस मैं हूँ और परछाई है। खामोश से इन लम्हों में, हुंकार और रूसवाई है। ऐसे मे तुम आ जाओ गर,खामोशी में शहनाई है। कहता है मन बेचैन है,तुम आ मिलो ऋतु आई है। ठण्डी हवा मदमस्त है,फिंजा…

खूबसूरत है बोलने का ही उसे लहज़ा नहीं
ByAdminखूबसूरत है बोलने का ही उसे लहज़ा नहीं खूबसूरत है बोलने का ही उसे लहज़ा नहीं! सच कहूँ मैं प्यार से ही पेश वो आता नहीं सोचकर करना है ये इजहार दिल से प्यार तू प्यार का आसान देखो ये इतना रस्ता नहीं प्यार से देखें हमेशा के लिये मुझको वही…

साहब | Sahab par Kavita
ByAdminसाहब ( Sahab ) जब भी मुॅंह को खोले साहब। कड़वी बोली बोले साहब। नफरत दिल में यूॅं पाले हैं, जैसे साॅंप, सॅंपोले साहब। राजा के संग रंक को क्यों, एक तराजू तोले साहब। भीतर कलिया नाग बसा है, बाहर से बम भोले साहब। वोट के लिए दर-दर घूमे, बदल-बदल…

मृदुल वाणी | Mridul Vani
ByAdminमृदुल वाणी ( Mridul vani ) मृदुल वाणी मधुर वचन मन मोह लेते बोल सदेव मीठी वाणी मन मोह लेते मोर बोले मृदुल नाचे वन उपवन में मोरनी का मन भावन वन उपवन में मोर रंग रूप-स्वरूप सुंदर सुहाना सलोना मानव प्राणी सुन तान पावन सुहाना सलोना सुंदर स़ूरत मोहक मूर्त पग काले कलूटे…

