बातें

बातें

बातें

*

करो सदा पक्की
सच्ची और अच्छी!
वरना…
ये दुनिया नहीं है बच्ची,
सब है समझती।
समझाओ ना जबरदस्ती!
बातें…
ओछी खोखली और झूठी
नहीं हैं टिकतीं।
जगह जगह करा देतीं हैं
बेइज्जती!
सच्चाई छुप नहीं सकती,
बेवक्त है आ धमकती!
होश फाख्ता कर देती है,
सिर झुका देती है।
तेज़ ही उसकी इतनी होती है!
पल में घोर अंधेरा चीर रौशनी है लाती,
ऐसी है सच की हस्ती;
खाली हो जाती झूठ की बस्ती।
मान लो ‘मंजूर’ की बात,
खाली न रहेगा कभी तेरा हाथ;
देना सदा सच का ही साथ।
मिलेगा तुझे सदा अच्छे लोगों का साथ!
सूरज सा चमकोगे
और निकलोगे बनके महताब।

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : 

इंसान और पेड़ में अंतर

 

Similar Posts

  • नीरज चोपड़ा | Niraj Chopra Par Kavita

    नीरज चोपड़ा ( Niraj Chopra Par Kavita )   सुहाषिनी सुदर्शनी सी लगी, लो शुभ बिहान आ गया।   सौभाग्य से स्वर्णीम पदक ले, भारत का लाल आ गया।   गर्वित  हुआ  आनन्द  मन  उल्लास,  वृहद  छा  गया,   भगवा भवानी भारती के, सौन्दर्य निखर के आ  गया।     कवि :  शेर सिंह हुंकार देवरिया…

  • विश्वगुरु भारत | Vishwa Guru

    विश्वगुरु भारत ( Vishwa Guru Bharat )   वो सोने की चिड़िया मेरी अब शेरो सी दहाड़ रही है, अपने दम पर अकेले दुनियां को पछाड़ रही है। स्वदेशी अपना कर हमने विदेशी को भगाना है, अब अपनी मातृभूमि मिट्टी की ताकत को संसार को दिखाना है। दुश्मन तो आजकल हमारे बस नाम से कांप…

  • सड़क

    सड़क   पहुंच सुदूर क्षितिज धरा तक सुंदर रेखा मात्र दिखती हूं, श्याम वर्णी स्वस्थ सलोने गात दिन रात अटखेलियां खेलती हूं, पकड़ पगडंडी की राह पाया चतुर्भुज रूप चंचला आगे बढ़ती,संवरती हूं अनुपम अवतरित छटा, अव्यवस्थित पर अति आर्द्र शीत की उष्णता में तपती हूं।। अवस्थापन से हर्षातिरोक्ति हुयी कब जब मेरे कतरों की…

  • वतन की खुशबू | Watan ki khushboo

    वतन की खुशबू! ( Watan ki khushboo )   मेरी हर साँस में रहती है वतन की खुशबू, मुझे कितनी अजीज है इस चमन की खुशबू। उतर के आ जाओ ऐ! आसमां में रहनेवालों, रखी है बाँध के वो गंग-ओ-जमन की खुशबू।   यहाँ फजाओं में गूँजती हैं ऋषियों की सदाएँ, वही ऋचाएँ बढ़ाती हैं…

  • मैं आ रहा हूँ | Main Aa Rahan Hoon

    मैं आ रहा हूँ ( Main Aa Rahan Hoon ) कान तरस गए यह सुनने को, “मैं आ रहा हूँ” एक बार तो कह दीजिए प्रभु! “मैं आ रहा हूँ” अँखियाँ बिछा देती मैं राह में, बांवरी मैं हुई आपकी चाह में, कब से राह मैं तक रही हूँ, सहन पीड़ा करने कैसे सक रही…

  • बाल-गोपाल नन्द के लाल | Kavita Nand ke Lal

    बाल-गोपाल नन्द के लाल ( Bal-Gopal Nand Ke Lal )    बाल- गोपाल बाबा नन्द के लाल, कर दो कन्हैया फिर ऐसा ‌कमाल। जग मे रहें ना कोई दुःखी इन्सान, जीवन बने यह सब का खुशहाल।। सारे जगत के हो आप पालनहार, भवसागर से करते है सबको पार। बिन कृष्णा नाम के जीवन बेकार, तुम्हारी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *