लाली उषा की | Lali Usha ki

लाली उषा की

( Lali usha ki )

 

युगों की रची
सांझ उषा की
न पर कल्पना
बिम्ब उनमें समाये
बनाये हमने तो
नयन दो मनुज के
जहाँ कल्पना
स्वप्न ने प्राण पाये।
हंसी में खिली
धूप में चांदनी भी
दृगों में जले
दीप मेघ छाये।
मनुज की महाप्रणता
तोड़कर तुम
अजर खंड
उसको कहाँ जोड़ दोगे ?

 

डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’

लेखिका एवं कवयित्री

बैतूल ( मप्र )

यह भी पढ़ें :-

कमरा | Kamra

Similar Posts

  • मुहब्बत | Muhabbat Shayari Hindi

    मुहब्बत ( Muhabbat )    जाति , धर्म , मजहब का बहाना अच्छा नहीं लगता। प्यार में गुणा, भाग,जोड़, घटाना अच्छा नहीं लगता।। जीत का जज्बा लेकर कितने हारे मैदान ए मुहब्बत में, वरना किसी जंग में हार जाना अच्छा नहीं लगता।। मुश्किलें हमसफ़र हो जाती हैं राह ए मुहब्बत में यहाँ, वरना किसी मुसाफिर…

  • नही है कर्ण जैसा कोई दानी | Karn par Kavita

    नही है कर्ण जैसा कोई दानी ( Nahi hai karn jaisa koi dani )   जगत में कई है बलवान और महा-ज्ञानी, लेकिन नही है इस कर्ण जैसा कोई दानी। कोई पीने को ना देता एक गिलास पानी, उसने तो दिया कवच कुण्डल महा-दानी।। सूर्य-नारायण का वह ऐसा महाबली पुत्र, कौरवों की सेना में दुर्योधन…

  • टिकने नहीं देते चोटी पर | Tikne Nahi Dete

    टिकने नहीं देते चोटी पर ( Tikne nahi dete choti par )    मेहनत लगन हौसला ही प्रगति का आधार मिला। बुलंदियों का आसमां हसीं उन्नति का सिलसिला। काबिलियत हूनर हारे सवाल खड़ा हो रोटी पर। घात लगाए बैठे लोग टिकने नहीं देते चोटी पर। शब्दों का जादू चल जाए कीर्ति पताका जग लहराए। कलमकार…

  • ख्वाबों में जलाएगी | Kavita Khwabon mein Jalayegi

    ख्वाबों में जलाएगी! ( Khwabon mein Jalayegi )    ये जिस्म नहीं है बस आग बुझाने के लिए, अंतिम है इसका लक्ष्य मोक्ष पाने के लिए। अपनों से जंग बताओ कोई क्या लड़ेगा, अगर करो भी सौदा तो हार जाने के लिए। होता है गम बाढ़ के पानी के जैसा दोस्तों, बस साँसें टिकाए रखो…

  • चंदन | Chandan

    चंदन ( Chandan )  चंदन शब्द से ही एक अद्भुत भीनी-भीनी सुगंध की अनुभूति होती है चंदन के वृक्ष पर हजारों विषधर लिपटे हुए रहते हैं फिर चंदन अपनी गुणवत्ता को नहीं खोता ठीक वैसे ही मानव का भी आचरण हो जाए तो सारी धरती प्रेम करुणा सद्भाव की सुगंध से सुवासित हो जाए प्रेम…

  • क्या तुम कभी | Kavita Kya Tum Kabhi

    क्या तुम कभी? ( Kya tum Kabhi ) हाँ, तुम मुझे जानते हो…, पर अगर प्रश्न करूँ, कितना जानते हो…? तुम अनमने से हो जाते हो, बहुत सोचते हो, पर जवाब क्या है? कुछ आदतों को बताते हो, पर स्त्रीत्व को नहीं समझ पाते हो। एकांत क्या है, यह स्त्री से पूछो। आदतों और व्यवहार…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *