नन्ही चिड़िया की सीख | Chidiya poem in Hindi

 नन्ही चिड़िया की सीख 

( Nanhi chidiya ki seekh )

 

नन्ही चिड़िया की सीख….||
1. नन्ही-मुन्ही,नीली-पीली,लाल-गुलाबी,सतरंगी |
चिडिया उडती डाल-डाल पर,पंख फैलाए बहुरंगी |
पत्ती-पत्ती,बूटा-बूटा,सब स्वागत उसका करते हैं |
नन्ही चिडिया को बैठाकर,दूर थकाबट करते हैं |

नन्ही चिड़िया की सीख….||
2. सौ बार गिरी,सौ बार उठी,पंख फैला चलना सीखा |
है खुश बड़ी माँ भी उसकी,कम से कम उडना सीखा |
उठना,गिरना,गिर के उठना,मंजिल की पहली सीढ़ी है |
आगे बढें इसी साहस से,तो सफलता अंतिम सीढ़ी है |

नन्ही चिड़िया की सीख….||
3. छोटे-छोटे पंखो से,कितने करतब दिखती है |
मीठी प्यारी बोली से,एक मधुर संगीत सुनाती हैं |
पहली बार उडी गगन मे,बार-बार थक जाती है |
घर बैठी प्यारी माँ को,अपना अन्दाज बताती है |

नन्ही चिड़िया की सीख….||
4. चिडिया की मधुर चह-चह,उठना-गिरना,फिर उडना |
ऊँची-नीची राहें कैसी भी,आत्म बिश्वास से आगे बढना |
निश्चित ही मिलेगी सफलता,एक प्रण तो ठान कर चलो |
नन्ही चिड़िया की भांति,अपना लक्ष्य पहचान कर चलो |

नन्ही चिड़िया की सीख….||

 

लेखक–> सुदीश भारतवासी

 

यह भी पढ़ें : –

किस्मत | Kismat kavita

Similar Posts

  • नंदलाल आयो रे बधाई | Geet

    नंदलाल आयो रे बधाई ( Nandlal aayo re badhai )   आई आई शुभ घड़ी आई, वृंदावन धाम रे। यशोदा घर बजे शहनाई, कन्हैया नाम रे।   लीलाधारी नटखट कान्हो, नंद घर आयो। राधा संग गोपिया नाची, कान्हो मुरली मधुर बजायो।   गोकुल में बंटे मिठाई, दे रहे सब जन खूब बधाई। आयो माधव मुरली…

  • आश्रित | Aashrit

    आश्रित ( Aashrit )   कुछ चीजों पर अपना वश नही होता दिल पर हर बार काबू नही होता मुखवटे हर बार चढाये नही जाते आंसू हर बार छिपाए नही जाते गम का चश्मा चढ़ाया नही जाता हर बार दूरियां निभाई नही जाती लफ्जों को वापस पाया नही जाता टूटा हुआ रिश्ता निभाया नही जाता…

  • जय जय भोलेनाथ | Jai Bholenath

    जय जय भोलेनाथ ( Jai Jai Bholenath )    काशी के वासी अविनाशी, भूतनाथ महादेव। नीलकंठ शिवशंकर भोले, सब देवों के देव। जय जय भोलेनाथ, जय जय भोलेनाथ त्रिनेत्र त्रिशूल धारी, जटा में बहती भगीरथी धारा। डम डम डमरू कर में बाजे, नटराज नृत्य प्यारा। भस्म रमाए भोले बाबा, कैलाशी शिव शंभू नाथ। भर देते…

  • मेरे प्रभु श्रीराम | Shri Ram par Kavita

    मेरे प्रभु श्रीराम ( Mere prabhu shri Ram )    सभी याद करते है उस ईश्वर को उस वक्त, चाहें वह हो नास्तिक हिल जाता है तख्त। ख़ून की कमी में मिल ना रहा हो उसे रक्त, दुःख पीड़ा चाहें कष्ट हो बनते है वो भक्त।। धर्मात्मा तो हर समय करतें है इनको याद, भूख…

  • युद्ध के बोझ से | Yuddh Par Kavita

    युद्ध के बोझ से ( Yuddh ke bojh se )   क्यों न आसमां को सुस्ताने दिया जाए, कुछ बरस तक युद्ध को जाने दिया जाए। इंशा की लालच का कोई इंतिहाँ नहीं, पहचाने जो चेहरा आईना दिया जाए। युद्ध के बोझ से वो कब का है थका, बैठ गई आवाज, गर्म पानी दिया जाए।…

  • मूर्ख दिवस | Kavita Murkh Divas

    मूर्ख दिवस ( Murkh Divas )   हम मुर्ख बने मुर्ख रहे आज भी मुर्ख बनें हैं मुर्ख हैं सोचे हि नहीं कभी तात्पर्य इस मूर्खता का कर लिए स्वीकार्य हंसकर चली गई चाल थी यह हमारी संस्कृत्ति के तोड़े जाने की पावन पुनीत चैत्र प्रतिपदा को मुर्ख दिवस साबित करने की हा, हम मुर्ख…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *