Manjit Singh

मनजीत सिंह की कविताएँ | Manjit Singh Poetry

सावन की फुहार

मैं यहाँ खड़ा हूँ
और अपनी खिड़की के बाहर
बारिश को गिरते हुए देख रहा हूँ।
कई दिनों से बारिश नहीं हुई है,
लेकिन जब होती है,
तो क्या रात में नहीं होती?
हर पौधा और हर फूल
इस गर्मी की बारिश के लिए बहुत आभारी है।
मैं लोगों को बिना एहसास किए
भीगे हुए बालों के साथ देखता हूँ।
वे अपने कदम तेज़ करते हैं
और भागते हैं, उम्मीद करते हैं
कि मौसम पूरे दिन नहीं रहेगा।
मैं भी उम्मीद करता हूँ कि
ऐसा न हो, ठीक वैसे ही
जैसे मैं बाद में शहर में गाड़ी चलाने की उम्मीद करता हूँ।
कार के वाइपर घूम रहे हैं।
उनके टायर पोखरों में छप रहे हैं।
आसमान धूसर है,
लेकिन मुझे थोड़ा नीला भी दिखाई दे रहा है,
शायद उम्मीद है
कि यह बारिश जल्द ही खत्म हो जाएगी?
मैं काम पर वापस जाता हूँ,
पूरे दिल से उम्मीद करता हूँ।
खराब शुरुआत के बावजूद,
आज का दिन बेहतर होगा!
मैं कार की खिड़की पर वापस आता हूँ।
आधा घंटा बीत जाता है।
और मैं आखिरकार आसमान में सूरज को देखकर बहुत खुश हूँ!
ज़मीन पर नमी वाष्पित होने लगी है,
इसलिए मैं बहुत देर होने से पहले शहर वापस चला जाता हूँ।
ऐसा लगता है कि
लंबे समय से प्रतीक्षित बारिश आ गई है।
और अंत में, यह एक खूबसूरत दिन है!

मेरा भतीजा गोलू

ओह,
20 साल कैसे बीत जाते हैं,
ओह,
समय कैसे उड़ा सकता था आपको
एक बार दूर के सपनों में आ जाते
सिर्फ़ एक विचार से,
अब मेरी बाहों में
और मेरी आँखों में
तुम्हारी सादगी हमेशा मौजूदगी से चमकती है।
तुम्हारी हँसी और मुस्कुराहट
जो मीलों तक चलती थी
वह मेरे दिल और आत्मा को गर्म करती थी
तुम इतनी तेज़ी से बड़े हो रहे हो थे
क्या पता यह दिन आएगा
मैं चाहता हूँ कि तुम्हारे साथ
बिताया हर पल हमेशा के लिए जीवित रहे।
मेरा भतीजा एक दिन बड़ा हो जाएगा,
और मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा रहूँगा
यह सोचा था
जब तुम गिरोगे तो
मैं तुम्हारे हाथ उठाऊँगा।
मैं तुम्हारा हाथ थामूँगा
और तुम्हें ऊँचा खड़ा होने में मदद करूँगा।
और जब वह दिन आए
जब तुम अकेले हो,
तो कभी मत सोचना कि तुम अकेले हो
तुम आज भी हमारे साथ हो
दिलों में
चाहे तुम कितने भी पास
या दूर क्यों न हो,
मैं हमेशा तुम्हारे दिल में हूँ।
हमेशा याद रखो
कि तुम चाहे जो भी करो,
मैं हमेशा तुमसे प्यार करूँगा
अब प्यार छुट गया
भगवान ने गलती की
मैं भगवान को कभी माफ नहीं करूंगा।
जो तुम ने ऐसा किया
क्यों किया आखिर क्यों
क्यों……….।

खेतों की आग और प्रेम

हाल ही में मैंने
एक भूख महसूस करना
शुरू कर दिया है
खेतों में आग लग गई
पूरा गांव खड़ा हो गया
लालच के साथ लेने के लिए,
एक खेत की आग की तरह
जो भस्म करती है
पूरी की पूरी फसल
हर जगह आग
और प्रत्येक हत्या के साथ
और अधिक विकराल होती जाती है।
उज्जवल आकर्षण,
जो कुछ भी मेरे रास्ते में आता है।
खुली बुग्गी में गंजा बच्चा ,
दादा, मां पिता एक साथ
आपको लगता है कि मैं केवल देखता हूं,
और आप भी,
पेड़ के पीछे दुबले-पतले प्रेमी
जो अनाज खड़ा है
उसको निहार रहा है
और आप
आपके हाथ में कागज
क्या लिखूं
और आंखों में सूरज जैसी रोशनी वाला बूढ़ा आदमी…
मेरी तरफ आंखें तकाए
आग की लपटों की तरह लिपटती हैं
मेरी नसें जलती हैं;
और, जब मैं आपसे बात कर लेता हूं,
बैलगाड़ी में, खेतों में, नहर के किनारे
खेतों के कच्चे रास्ते
पेड़ के पास बैठ कर
और उद्यान में बेंच पर बैठ कर की बातें
मैं राख के अन्दर छोटे-छोटे ढ़ेर थूकता हूं
बलग़म के
और कुछ नहीं
लेकिन मेरे अंदर दृश्य, गंध
और ध्वनियां पनपेंगी
और चलती रहेंगी
और चलती रहेंगी
मेरे अंदर वह बच्चा सोएगा
जो बैलगाड़ी में बैठा था
और सोएगा
और फिर जागेगा
और अपनी बिना दांतों वाली
मुस्कान मुस्कुराएगा
मेरे मुझमें,
सड़क के लैंप टिमटिमाएंगे,
कैमरे में लड़कियां नाचेंगी
शादी के ढोल गूंजेंगे
हिजड़े रंगीन स्कर्ट घुमाएंगे
और प्यार के उदास गीत गाएंगे,
घायल कराहेंगे,
और मुझमें आशा भरी आँखों से
मरती हुई माँ अपने बच्चे की तलाश में
इधर-उधर देखेगी,
जो अब बड़ा हो गया है
और दूसरे पड़ोसी खेतों में
दूसरी खेत की बाहों में चली गई है
आग लगते लगते
जिस को बुझाना मुश्किल है
लगने के अनेक कारण हैं
बिजली की तार की सर्किट से।

युद्ध विराम पहलगांव

यह वह कविता नहीं है
जिसे मैं तब लिखना चाहता था
जब मेरी मर्जी होगी
आज पूरे देश में भयावह की स्थिति है
जब मैं अपनी मेज़ पर बैठा था
सोच रहा था कि जो पन्ना सफेद है
वह पन्ना लाल कैसे हो सकता है
आप देखिए,
मेरे दिमाग में और भी शब्द थे,
फिर भी मैं यही छोड़ कर जा रहा हूँ
बस करो बस करो ‌।

मैंने सोचा कि
यह युद्ध को मिटाने वाली कविता है
ऐसा लगता नहीं था
इतनी शक्तिशाली कि
दो देशों में ज्वालामुखी भड़क जाएगी
दोनों तरफ के सैनिक मरेंगे
आतंकी की कोई जाति धर्म नस्ल नहीं होती
वह तो मारता रहता है
यह संघर्ष और फूट से त्रस्त हो जाता है
दुनिया के सभी घावों को भर देगी जंग
लेकिन ऐसा नहीं है।

मैंने कल्पना की थी कि
देश-प्रेमी इसे रोज़ाना उद्धृत करेंगे
कितने शहीद होंगे
कितनी माताओं के लाल
कितने पिताओं के लाल
कितनी विधवाओं के सुहाग
उनके रोते हुए बच्चों को
शांत करने के लिए इसे गाएँगी
और पूरी पीढ़ियों को नई उम्मीद मिलेगी
या नहीं।

मेरी बड़ी-बड़ी ख्वाहिशें थीं।
यकीन मानिए
मैंने कोशिश की
मानवता की परीक्षा ली
और सबक सीखे
लेकिन सही शब्द मुझसे छूट गए;
अक्सर ऐसा होता है।
इनके बदले में ये शब्द लें।

अब क्या होगा इस देश का
संसार का
हर जगह हाहाकार मची हुई है
अपने को ऊपर उठाने के लिए।

जीवन के रंग

अगर कोई चीज़ रंगहीन है,
तो तुम्हारा जीवन रंगहीन हो जाता है,
आकाश में इंद्रधनुष के अद्भुत रंग,
वे आपकी आंखें खुली रखते हैं,
हम सभी को
वे रंग पसंद होते हैं।
रंगों का एक कारण है,
वे हर अवसर पर सदैव उपलब्ध रहते हैं,
जब तुम पैदा हुए थे,
तुम्हारा रंग गुलाबी था,
आपके अम्मी-अब्बा की
आँखें ख़ुशी से चौड़ी हो गई थी
खुशी के आंसू निकले
चौधर एक कदम और आगे बढ़ गई ।
जब तुम बच्चे थे,
तो रंग हरा था,
तुम खेल के मैदान में जाओ
और चिल्लाओ
मैं आ गया हूं मेरे साथ कौन-कौन खेलेगा।
जब तुम छोटे थे,
रंग लाल था,
घबराता नहीं था परन्तु
आप अपने सपनों की लड़की को गुलाब देने से डरते हैं
जब आप अपनी जवानी से आगे निकल जाते हैं,
तो रंग नीला होता है,
जब जीवन आपको संकेत देता है,
तो आप दुनिया को चुनौती देने निकल पड़ते हैं।
जब तुम्हारी शादी होगी तो
रंग सुनहरा होगा,
आपको यह विश्वास दिलाने के लिए कि आप ज्यादा बूढ़े नहीं हैं
आपमें अभी ताकत बची है
जब आप मध्यम आयु के होते हैं,
तो रंग पीला होता है,
जब आप खुशमिजाज कहलाना पसंद करते हैं।
जब आप समझदार हो जाते हैं,
तो रंग चांदी जैसा हो जाता है
आप स्वयं को बुद्धिमान तभी बना सकते हैं
जब आपने दुनिया को पर्याप्त रूप से देखा हो।
दुनियादारी की समझ आ जाती है
जब तुम निकलते हो तो
रंग काला होता है,
आपके प्रियजन आपको याद करेंगे, यही बात वे याद रखेंगे।
काला रंग जीवन जीने का तरीका बताता है
आप अपने जीवन के रंग नहीं चुनते,
निश्चिंत रहो,
वे आएंगे,
तुम्हें बताने के लिए कि तुम क्या हो।

दहेज

मेरे बाएं हाथ में पत्नी का
कोमल दाहिना हाथ था,
और मेरे दाहिने हाथ में
सेब जैसी गेंद अर्थात ग्लोब थी
हम लेट नहीं सकते, न बैठ सकते
न खड़े हो सकते, गर्मी और ठंड के संपर्क में, बिना एक लबादे के‌‌।

“मैंने दहेज में शराब क्यों दिया?”
मुझे अपने विद्रोही दोस्त से
सलाह लेने दो जो
शिकार करता है मेरा
और तुम्हारे लिए शराब
बनाने वाले की बात
केवल एक भ्रम है
विवेक का दाग
दोस्तों के सामने फीकी पड़ सकते हैं ‌

चलो इस गेंद जैसी
जगह की तलाश करते हैं
मुझे देखने दो कि
मुझे शराब के लिए
क्या बनाना चाहिए
तुम्हारा हाथ मेरे हाथ
से फिसल जाता है,
वातावरण! हिंसक प्रहार
हमें अलग कर देते हैं,
चांदी की एक चमक
मुझे ले जाती है।

“ओ कोमल हवा,
तुम एक विभाजक हो,
मैंने अपना प्रेम खो दिया है,
पत्नी कहाँ है?
उसके बिना खुशी का
कोई आनंद नहीं
चाँद की चाँदनी
, सूरज की रोशनी हो तुम,
घर खजाना लगता है,
सेब और संतरे, गेहूँ
और जौ, अनंत खजाना!”

मुझे तुम्हारी याद आती है
मुझे मेरा प्यार याद आता है
, मुझे मेरा प्रिय याद आता है,
सुगंधित रंगीन फूल मुझे बाधा लगते हैं तुम्हारे बगैर
हालाँकि मैंने अपना दहेज खो दिया है
मेरे पास आँखें और बाहें हैं
मैं पत्नी को ढूँढूँगा
मैं खोई हुई सुंदरता को वापस लाऊँगा
जब हम फिर मिलेंगे तो
मैं शराब की भट्टी में
प्यार का काढ़ा बनाऊँगा,
अंत में मैं खुश हूँ क्योंकि अब मैं परी के बंधन से मुक्त हूँ
इसलिए खुश
बिना दहेज में
खुबसूरती खजाना है
मेरी पत्नी

आप जीवित या मृत

एक कविता,
और हम दोनों
मैं और मेरी मोहब्बत
खामोशी में उदास है
कहते हैं
मैं आज के बाद
आपकी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा
मैं अपनी चुप्पी स्वीकार नहीं करूंगा
मेरा जीवन आपके चरणों में बर्बाद हो गया है
मैं आपका चिंतन करता हूं..
और मैं आपसे सुनता हूं ..
और तुम बोलते नहीं..
मेरी खंडहर चीख
तुम्हारे हाथों में है
अपने होंठ को हिलाओ
मैं बोलता हूं
ताकि मैं बोल सकूं
मैं चिल्लाता हूं
ताकि मैं चिल्ला सकूं
मेरी जीभ अभी भी सूली पर चढ़ी हुई है
शब्दों के बीच
जीना शर्म की बात है
सड़कों पर कैद
एक मूर्ति बने रहना
कितने शर्म की बात है
और चट्टानें बता रही हैं
कि आपके नौकरों ने लंबे समय से क्या खोया है
सारी प्रार्थनाएं आप में एकजुट हो गईं
और आप दुनिया के लिए एक तीर्थस्थल बन गए
मुझे बताएं
कि मृतकों की चुप्पी क्या बता सकती है
तुम्हारे दिमाग में क्या है?
मुझे बताओ..
जमाना बीत गया..
और राजा झुक गए..
और सिंहासन गिर गए
और मैं कैद हो गया…
तुम्हारी खामोशी मेरे चेहरे पर
जीवन के लिए एक खंडहर हैं
वही खंडहर हैं इस दुनिया में आपका चेहरा।
क्या आप मर चुके हैं…
या जीवित हैं?
लेकिन आप कुछ ऐसे हैं
जो मैं नहीं जानता
आप न तो जीवित हैं…
और न ही मृत……।

प्रेम की भाषा हिंदी

ज़बानो के जमघट में
एक ज़बान है नायाब
हमारी ज़बान”हिंदी”
जिसमें एक लफ्ज़ के
होते हैं कई मुतादरीफ़।

एक “मोहब्बत व ईश्क”को
प्यार कहो या प्रेम
सुर कहो या रश्क
ममता कहो या प्रीति
संस्कृति कहो रीति रिवाज
नाज कहो या लाज….

यह हिन्दी है
माथे की बिंदी हिंदी

दहेज

मेरे बाएं हाथ में पत्नी का
कोमल दाहिना हाथ था,
और मेरे दाहिने हाथ में
सेब जैसी गेंद अर्थात ग्लोब थी
हम लेट नहीं सकते, न बैठ सकते
न खड़े हो सकते, गर्मी और ठंड के संपर्क में, बिना एक लबादे के‌‌।

“मैंने दहेज में शराब क्यों दिया?”
मुझे अपने विद्रोही दोस्त से
सलाह लेने दो जो
शिकार करता है मेरा
और तुम्हारे लिए शराब
बनाने वाले की बात
केवल एक भ्रम है
विवेक का दाग
दोस्तों के सामने फीकी पड़ सकते हैं ‌

चलो इस गेंद जैसी
जगह की तलाश करते हैं
मुझे देखने दो कि
मुझे शराब के लिए
क्या बनाना चाहिए
तुम्हारा हाथ मेरे हाथ
से फिसल जाता है,
वातावरण! हिंसक प्रहार
हमें अलग कर देते हैं,
चांदी की एक चमक
मुझे ले जाती है।

“ओ कोमल हवा,
तुम एक विभाजक हो,
मैंने अपना प्रेम खो दिया है,
पत्नी कहाँ है?
उसके बिना खुशी का
कोई आनंद नहीं
चाँद की चाँदनी
, सूरज की रोशनी हो तुम,
घर खजाना लगता है,
सेब और संतरे, गेहूँ
और जौ, अनंत खजाना!”

मुझे तुम्हारी याद आती है
मुझे मेरा प्यार याद आता है
, मुझे मेरा प्रिय याद आता है,
सुगंधित रंगीन फूल मुझे बाधा लगते हैं तुम्हारे बगैर
हालाँकि मैंने अपना दहेज खो दिया है
मेरे पास आँखें और बाहें हैं
मैं पत्नी को ढूँढूँगा
मैं खोई हुई सुंदरता को वापस लाऊँगा
जब हम फिर मिलेंगे तो
मैं शराब की भट्टी में
प्यार का काढ़ा बनाऊँगा,
अंत में मैं खुश हूँ क्योंकि अब मैं परी के बंधन से मुक्त हूँ
इसलिए खुश
बिना दहेज में
खुबसूरती खजाना है
मेरी पत्नी

जीवन

यदि आप अपने जीवन के
उतार-चढ़ाव को
अपने
दिल में रखते हैं, ,
तो आप जीवित रहेंगे।
आप लहरों की तरह बहना सीखेंगे
कभी अन्दर बाहर उपर नीचे रहे
आप जिन्दा है
आप दिल से दिल मिलने वाले
हर पल के लिए
अपनी बाहों को इस खोलेंगे
समझो आप जिन्दा है
दूसरो की बुनियाद पर खड़ा न हो
सबको एक समान समझो
आप जिन्दा हैं
गरीब की सहायता
विकलांग की सहायता
करना है फर्ज
समझो आप जिन्दा है

ज़ायका

जब मैं रसोई से बाहर आया
थोड़ा खुरदरा सिलबट्टा देखा
चटनी बनाकर और प्याज़
थोड़ा पका हुआ प्याज
थोड़ा जल गया प्याज़
थोड़ा अच्छा लगा सुंघकर
आटे से लेपित,
चटनी
जोड़े में बनाया गया रोट
मसालों के साथ तडका किया हुआ
दिल में जोश के साथ
मिट्टी की हांडी में
मिट्टी की खुशबू के साथ
हींग के तड़के की खुशबू
बनाकर
ख़ुशी से झूमना
बहुत गर्म
ताजा
उबलती भावनाएं
किसी तरह मैं बाहर निकला
नवविवाहितों की तरह
शर्मीला और झिझकने वाला
उसने डरते-डरते सेवा की
मेरी तरह
एक तीखी और अजीब कविता
प्रतिक्रिया का इंतजार है
अब इसका स्वाद तो अब दूसरे ही पहचान सकते हैं
आटे से लिपटी चटनी का स्वाद
कितना लज़ीज़
कहा नहीं जा सकता

छठ पूजा

उजाड़ भूमि नई हो गई,
यहां सभी आदमी ठीक हो जाते हैं.
संयम के दिन ख़त्म हो गए
दुनिया की ख़राब स्थिति में सुधार हो रहा है.

वार्षिक बाढ़ ख़त्म हो गई है
प्रजनन क्षमता का आनंद जारी है.
देवताओं ने अपना काम किया है,
राक्षस अपने सम्प्रदायों सहित मर गये।

दुनिया अब एक स्वतंत्र जगह है.
स्वतंत्रता, सौंदर्य और शांति से भरपूर;
पुरुष मनोरंजन के लिए स्वतंत्र रूप से घूमते हैं,
सभी को जल्दबाज़ी में ढूंढ लिया गया।

छठ वैदिक उत्सव हर जगह मौजूद है,
लोग आस्था में बहुत दृढ़ और मजबूत हैं।
सूर्य देव से गर्मी और रोशनी के लिए प्रार्थना करें।
हम आशा करते हैं कि दिन लंबे और उज्ज्वल हों।

चांद से दीदार

रात हो, चाँद हो, परिचित हो सब
फिर से नशा क्यों न किया जाए?

मैंने तुम पर पूरी जिंदगी बिता दी
तुम मेरी अनमोल संपत्ति हो फिर प्यार क्यों न किया जाए?

एक है दुनिया का डर
और प्रेम भी असीम है
क्यों न दुनिया का मुंह मोड़ लिया जाए?

हम ही नहीं रहेंगे तो रोएंगे किसको?
तुम क्या मज़ाक कर रहे हो
क्यों न ये मज़ाक थोड़ा और किया जाए?

मैं दुःख से पत्थर बन गया
क्या आराम, क्या शान्ति
क्या फुरसत में घड़ी हो आप
क्यों न आप जैसे और बनाया जाए?

दान ढल गया है अब तारों में दिखो
दुनिया मतलबी है चांद को छुपा लो
क्यों इस दुनिया का मतलब पूरा किया जाए?

अनकहे लफ्ज़

अगर तुम थोड़ा मुस्कुराते
तो मेरा दिल खुशी से भर गया है
तुम एक मुरझाए हुए फूल की तरह
मैं भी मुरझा गया हूं टूटा गुलाब खिलता है
दिखावटी मुस्कुराहट चेहरा खिल उठता है
स्वप्न का सौन्दर्य का अलंकृत है
उतना जितना पर जमीन पर उतरना
मन आकाश में उड़ता है
सपना हकीकत में छोड़ देता है
और जब वह सो जाता है
यह आपकी यादों की तरह है
वसंत झरने की तरह बहता है
सावन की फुहार, फागुन की मस्ताई
तब होती है जब मेरे पास समय नहीं होता
मुझे आपके लिए बहुत समय मिलता है
मुझे कॉल करो मैं आपसे बातें करना चाहता हूं
मैं तुम्हारे बगैर खोया हुआ महसूस करता हूँ
मुझे बादल की काली घटा जैसा महसूस होता है
तेरी लाल आँखों में रहकर भी लाल नहीं हो रहा
तुम प्यार का एक खूबसूरत एहसास हो मैं तुम्हारे साथ जीना और मरना चाहता हूं
मैं अपना दिल रखता हूँ तुम्हारे लिए मैं तुम्हें एक पत्र लिखना चाहता हूँ
जिसमें सिर्फ और सिर्फ आप का जिक्र हो
मेरी नजर में तुम सबूसे खूबसूरत चेहरा हो, मैं कई जन्मों तक आप पर निर्भर रहना महसूस करता हूं
तुम मेरी आंखों में देखो
आंखें चार करना चाहते हैं सिर्फ दो ही बचती है वो सिर्फ मेरी है
क्या करूं मैं
तुम बताओ।

औरतों का सम्मान

तुम कल थे
आज नहीं हो क्योंकि
इस दुनिया में खलबली मची हुई है
कछ लोग लड़कियों को देख
उनको नोचने की चाहत रखने वाले
मैं आपको बर्दाश्त नहीं कर सकता
तुम आज करो
तो कल आप का नहीं होगा।
तो तुम सिर्फ़ आज हो।
तुम्हारे हाथ में सिर्फ़ “आज” है।
“आज” की कद्र करो।
कल तुम बच्चे थे और सच्चे थे
आज तुम जवान हो
जवानी का घमंड मत कर
लेकिन कल नहीं करोगे
तो तुम्हारी जवानी। सिर्फ़ आज। अपनी जवानी की रक्षा करो
सोचो! ज़िंदगी सिर्फ़ “आज” है।
युवावस्था सिर्फ़ “आज” है।
देखो! इस एक “आज” की ज़िंदगी
और जवानी में हमें खुदा की इबादत और खुदा की खिदमत करनी है।
औरतों को सम्मान देना है
कल के लिए
क्योंकि आज सब खराब है
कल ठीक होगा
सभी इंसान के लिए
सोचो अगर तुम पर बीते
क्या होगा
तुम आज हो
कल नहीं है ‌

सपने

इस दुनिया में मेरे बहुत सपने थे,

जो अपने है वो न घनिष्ठ अपने थे।

आपसदारी ने से अबलह बना दिया,

 अपने अजनबियों ने मैं बेगाना बना दिया।

सपने थे मेरे जीवन में फूलवाड़ी बन जाँऊ,

 फूल समझ मेरा जीवन तुनुक मिज़ाज बना दिया।

दरवाज़ें पर खड़ा रोज़गार की भीख मांगू ,

 समानता समझी न मेरे सपने को ख़राब बना दिया।

सपने मेरे ऊँची उडान भरने को थे,

अपनों ने ही मेरे परो को बेकार बना दिया ।

निपुण था मैं हर काम में बाज़ की तरह,

सपने अपने अपने सपने खाक में मिला दिया।

सपने तब आये जब हाथ सिरहाना बना हो,

 जो हाथ अपनो के थे वो हाथ काट बेहाथ बना दिया।

फिदा मुझे पर थे बहुत अपनो ने रास्ता काटा,

सपने बुनना उडान भरना अपना ने शिकवा करा दिया।

नहीं है कोई टूटे सपने पर मरहम लगाने वाले,

मनजीत खान चाहता है कोई मरहम लगाने वाला बना दिया ‌।

शिक्षक दिवस

“हे ज्ञान के स्रोत,
आपने दिलों को पुनर्जीवित किया है”
क्षेत्र के क्षेत्र में ज्ञान स्वीकार करता है
कि आप वह समुद्र हैं
जिससे हर कोई पानी निकालता है
और आप वह वर्षा हैं
जो प्यासी आत्माओं को सींचती है
और आप में अज्ञान के अंधकार का चेहरा प्रकट होता है

हे ज्ञान के स्रोत,
आपने हृदयों को पुनर्जीवित किया है
इसलिए वे प्रकाश की किरण से पहचाने जाते हैं
आपने निर्णायक रहस्योद्घाटन में एक स्थान प्राप्त किया है
हे वह जिसकी बुद्धि से सपने एक साथ आते हैं
ज्ञान के बगीचों को बारिश से सींचा गया है
क्योंकि आप शहद की तरह हैं
जिससे प्रेम चुसता है
और आप अंधेरी रात में पूर्णिमा की तरह हैं,
तो कितने
आपने धैर्य के साथ एक मार्ग को रोशन किया है जिसका मुकुट जुनून है
आपने अच्छा किया, हे बादल जिसके साथ वफादारी आई
आपने एक ऐसे मन को बचाया है
जो अज्ञान के समुद्र में बहता है
शिक्षक एक सुनहरा खोल है
मोती, माणिक और धागा – मोती से घिरा हुआ
ज्ञान के लिए वह सभी दरवाजों से गुजरा है
लेकिन वह अपने ही दरवाजे पर खड़ा होने को मजबूर है!

हे ज्ञान के साधक,
जो ज्ञान बोया गया है
उसे चुनो प्रकाश के मार्ग पर
इसके रंग अलग-अलग हैं
और अपनी विनम्रता को उस व्यक्ति के प्रति जागरूकता के प्याले में डालो
जिसने तुम्हें एक पत्र दिया,
मेरी जान की कसम, यह एक सम्मान है
हे ज्ञान के साधक, ट्वीट करो
और कलम थाम लो
और गुमराह करने वाली
सेनाओं को आज कांपने दो
और इतिहास के शिखर पर एक महाकाव्य लिखो
इसकी धुनें हमें गाती हैं कि तुम उत्तराधिकारी हो
शिक्षक एक सूरज है जो अंधेरे में चमकता है
और उसकी आत्मा ज्ञान की सुंदरता से आच्छादित है
जब आसमान घूर रहा है तो मैं क्या लिखूं
जब तुम्हारे अंदर का अक्षर ही वर्णन कर रहा है तो मैं क्या कहूं?!
अगर कविता तुम्हें नसें देने के बारे में सोचती
तो उसकी कलाई झुक जाती और क्षतिग्रस्त हो जाती
शिक्षक को उसके गुणों के लिए पुरस्कृत नहीं किया जाता
सिवाय उसके जिसकी प्रशंसा अखबारों में की जाती है!

मां

मां है तो जन्नत है
मां से ही मन्नत है
मां घर का उजाला है
मां ने जन्म दिया
मां ने ही पाला है
मां घर की आन बान और शान है
मां पूरे विश्व में सबसे महान है
मां सुबह है
मां शाम है
मां घर का चिराग है
मां से हम उज्जवल है
मां हम आप की तितली
मां आप फूल है
हम आप की गोद में बैठे हुए
हमेशा प्यार लुटाएगी
मां तेरे हाथों का तकिया
कैसे सजाएं
मैं आज भी रात को सोता हूं
तकिया जो था वो महसूस कर रहा हूं आज
छोटा बच्चा बनकर खूब रोता हूं
मां तू स्वर्ग है
तू जहान है
तुम सर्वशक्तिमान है
मां तू इमानदार है
वफ़ा की प्रतिमूर्ति है
हमारी अन्तर आत्मा है
हमेशा मुसीबत से छुटकारा देने वाली
मां तुम समुद्र की लहर है
तुम फूल हम भंवरें है
तुम बुलबुल हो मां
आपकी माथे पर पड़ी सिकन
हमेशा कामयाबी की कहानी है
मां हमें जनून देती है
समाज से लडने व जुड़ने की ताकत है मां
मेरी मां का चेहरा इतना सुन्दर है
उनके आगे फ़रिश्ते और परियां फीकी हैं
मां तुम धन्य हो
जिसने मुझे जन्म दिया
नेक रस्ते पर चलना सिखाया।
मां तुम मां हो
जन्नत हो।

मजदूर का काम

यह ताजमहल
यह गगनचुंबी इमारतें
यह स्वर्ण मंदिर
यह चाँदी का महल
जब मेरी टूटी हुई छत का
आभार व्यक्त करतें हैं

ये इन चिप्स को चिकना करते हैं
यह रोटी, ये डबल रोटी,बार,ब्रेड
यह पनीर इन आहारों का
जब मेरा भूखा पेट
का मजाक उड़ाते हैं सब लोग

ये बिजली के खंभे
यह हीटर ,एयर कंडीशनर
ये सोफे,बेड ये कुर्सियां
जब मेरे पसीने पर
नफरत का इत्र छिड़कते हैं

यह ट्रक, यह ट्रैक्टर
ये नहरें, ये बांध
इन सड़कों का जो ये पुल बनाते हैं
जब मेरे घायल हाथ
और टूटी हड्डियों तक
उनकी उपेक्षा करते हैं

यह मंदिर, गुरुद्वारा
ये चर्च, मस्जिद,अभयारण्य चारा
यह शिवलिंग संगमरमर का
जब मेरी मेहनत है
रुपये में विनिमय ,

हाथ से गुणा करना
यह पूरी व्यवस्था
जब मेरे कूल्हे सिकुड़ जाते
और छोटी आँखों पर
बेतहाशा हंसता है।

जानिए सच्चाई
मेरा दिल करता है
मैं आत्महत्या कर लूं या करने जा रहा हूं

मेरे बिना
जैसा है वैसा दिखाओ?

कारखाना ( मजदूर वर्ग पर )

सुबह जल्दी से
अपनी बीवी को
कहकर दिन को
भोजन तैयार
कराकर
तब कारखाने
जाकर अपनी
मेहनत करनी
उन मशीनों
पर जो हमेशा
छटपटाती रहती
है
एक अजीब सी
आवाज लेकर
जो कानों को
बहरा
आंखों को
अन्धा
व खड़े रहने
से
पैरों से लंगड़ा
तब दिमाक
भी उसे कारखाने
की तरह
नहीं चलता
नहीं दिमाक में रोशनी
दिमाक के सभी
कल-पुर्जे
कारखाना मालिक
के पास जमा
कई साल
सै
बाद में
कहता है
अब तुम से
काम नहीं होता
न ही मेहनत
के समय पर
पैसे
येें है कारखानों
के हालात
और
आज की व्यवस्था
जो गरीब
तबका
बदलना तो
चाहता है
वही राजनीति
घुस जाती है
उसका नकारे
मे और
घर बैठ जाता
है लंगड़ा, अंधा
व बहरा बन
पूरा परिवार
उसे पागल कहकर
चिड़ाता है
ये कारखानों का
नतीजा।

सोच विचार

समझ मैं नहीं आता
लोगों के कैसे विचार
और कुछ है
इन विचारों में
पूरी दुनिया
समाई हुई है
लेकिन
इस संसार में
अलग-अलग चेहरे हैं
अलग अलग सोच है
अलग-अलग विचार हैं
पता नहीं मुझे
ऐसा क्यों लगता है
सभी के विचार
ज्यादातर के विचार
महिला विरोधी है
महिलाएं जींस पहनती है
महिलाएं टॉप पहनती है
और आजकल प्रचलन की सभी वस्तुएं पहनती है
लेकिन मर्दों की सोच
दिन प्रतिदिन
खराब होती जा रही है
वह कहते हैं
लड़कियों को यह खाना है
लड़कियों को यह पहनना है
लड़कियों को यहां जाना है
मतलब मतलब
सभी के सभी
काम
आज मर्दों के हाथ में है
आज भी वही टाइम है
जो आज से सौ वर्ष पहले था
मुझे लगता है
समाज
बदला तो है
और स्त्रियों या महिलाओं के पक्ष पर नहीं
आज भी वैसे ही सोच रखते हैं
जैसी पहले रखते थे
और पीछा करते हैं
सभी
मर्द उन लड़कियों का
घर से महाविद्यालय
विद्यालय पढ़ने के लिए आते हैं
हर रोज उन्हें प्रताड़ित किया जाता है
पता नहीं
कब मेरे देश की
सोच बदलेगी और आगे बढ़ेगी
महिलाओं का शोषण
आज भी जिंदा है
घरों में, मोहल्ले में
हर जगह
सभी जगह
क्या मेरा देश बदलेगा
बदलेगा यह सोचना…।

आजकल

आजकल सभी जगह मुझे
इंसान दिखाई नहीं देते
यह पता नहीं क्यों
इसके पीछे क्या हाथ है
वही हवस के शिकारी
लड़कियों के पीछे भागते रहते हैं
जैसे इन्होंने कभी लड़कियां देखी नहीं
क्यों ऐसा करते हैं
इस अपने समाज में
मुझे कोई बता तो दे
सोचे की जवान जवान काही हवश करताहै
पर उसके बारे में कैसे सोचे
जिसने दुनिया के कुछ ही साल देखे हैं
तीन या चार साल
वह हवस के पुजारी
तीन-चार साल की लड़की को
भी नहीं बख्स़ते
क्या यही हमारा समाज है
या फिर वह अस्सी साल की
वृद्ध औरत
उसको भी नहीं बख्शते
यह कब तक होता रहेगा
मुझे इस ज़हालत की दुनिया से
कैसे निजात पा सकता हूं
है इसका कोई जवाब
मेरे मन में बहुत सारे सवाल है
वह यह सवाल है
किस जवान लड़का जवान लड़की से
मोहब्बत भी कर सकता है
प्यार प्रेम की बातें भी कर सकता है
उसके साथ रात भी बिता सकता है
पर वह दो व तीन साल की लड़की
अर वो सत्तर अस्सी साल की बुढ़िया
क्या चल रहा है दिमाग में
अपने मुल्क लोगों में
मुझे समझ में नहीं आता
आए दिन
पूरा अखबार
इन समाचारों का भरा रहता है
क्या करें
है कोई इसका जवाब
या फिर समय परिवर्तन है
पता नहीं
मुझे नहीं समझ में आ रहा
क्या बताऊं
मेरे मुल्क के लोगों
अब मैं भी थक गया हूं
सुनते सुनते कहते कहते
पर इसका जवाब नहीं
हर रोज
सुबह से लेकर शाम तक
मेरे दिमाग में
हजारों प्रश्न घूमते हैं
उन प्रश्नों का उत्तर नहीं है
क्या करें
आखिर क्या है इनका जवाब
मुझे बताओ…

इनग्राम

एक लंबी यात्रा के बाद

एक लंबे सपने में

बहुत सी परेशानियां मुझे घेर लेती हैं.

पर नियंत्रण

एकाकी अस्तित्व के लिए

मैं बस अवर्णनीय रूप से जीया हूं।

संचार की आधुनिकता से

सुखद स्थिति

नहीं कह पाने में असमर्थ

कहीं और नहीं जा सकते

हमेशा कहीं और जाओ

विपरीत नहीं चलता

ध्यान भटकाने के क्रम में

जो कोई समस्या नहीं है

मैं जोड़ नहीं सकता

आपकी भावनाएँ बहुत समान हैं।

समय लगभग स्थिर है

मेरी मौजूदगी में ऐसा विरोधाभास

मैं उसकी गति से आहत हूं.’

अभिशाप वेक्टर प्रवाह

इस पतझड़ के समय में

आधे मन की पूरी शक्ति

संग्रह करते रहो

पूरी यात्रा में आधा विस्थापन

हमारी यात्राएँ अलग हैं।

लेकिन सभी यात्रा करते हैं

एक बड़े वृत्त का हिस्सा हैं.

जिसे यह सदी नहीं खोज सकती.

आंतरिक और अतीत

अफवाहें तो यही कहती हैं

चलन में नहीं हूं

लंबी यात्रा

यात्रा के कारण

मैं थकान महसूस कर रही हूँ

विलंबित

हम गहराई तक जाते हैं।

पवित्र पुष्प मालाओं के समूह गान गाते हैं।

फागुन डाल की दिशा में

अपने आप को मेरी उपस्थिति से मुक्त करो

ऋतुएँ जो चूस गईं

मन का स्वाद

जिसमें

तेजी की तरह फीका पड़ गया

नूर का अजीब रंग

हम सपनों का एक जोड़ा खरीदते हैं।

चावल के लिए एक पैसा

यह मन चित्रों की सपनों की फसल के लिए ईंधन है

और उत्तर-औपनिवेशिक राज्य

औसत उदासी

यातना के ठोस से

लुप्त हो जाना

मंच पर कूदने की आवश्यकता है?

लेकिन स्वाद के इस आनंद में

हमने निर्णय किया-

इस नींद से उस नींद तक का सेतु

इस सपने से उस सपने तक का सफर

इस दुःख को इस दुःख से दूर करो।

पुरुष

जब पुरुष शाम को घर लौटता है
वह केवल लौटता नहीं है
महिला के चेहरे पर खुशी
बच्चों के चेहरे पर खुशी
एक आस बन्धी
शाम की रोटी की
जिसके लिए वह
पूरे दिन कमाता है

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

शराब | Sharab

Similar Posts

  • उदासी | Udasi par Kavita

    उदासी ( Udasi )   बादल  जैसी  छाई  उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।   दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।   सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।।   सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।।   शमा  जली …

  • नशा | Kavita Nasha

    नशा ( Nasha ) नशा एक जलती चिता, नशे का नशा, जिस किसी को लगा, कवेलू तलक, उसके घर का बिका! नशा —— एक जलती चिता, नन्हें बच्चों का भविष्य, दांव पर लगा! घर स्वर्ग से नरक का रूप, धारण करने लगा! अन्न मिलता नहीं, तड़पते हैं बच्चे भूख से, विधवा उसकी पत्नी, लगती है…

  • हकीकत | Haqeeqat

    हकीकत ( Haqeeqat )   सजाने लगे हैं घर, फूल कागज के अब किसी भी चमन में रवानी नही है बुझे बुझे से हैं जज्बात दिलों के सभी अब किसी भी दिलों में जवानी नहीं है बन गया है शौक, खेल मुहब्बत का भीतर किसी को दिली लगाव नहीं है इल्म भी वफा के अब…

  • क्या शैतान सच में होते हैं

    क्या शैतान सच में होते हैं क्या सच में,होते हैं शैतान ?या ये है केवल,हमारा अनुमान ।हां वाकई,होते हैं शैतान ।जब हम करते हैं,कोई बुरा काम ।या फ़िर करते हैं,बड़ों का अपमान ।तब हमारे भीतर ही,प्रविष्ट हो जाते हैं ;ये दुष्ट शैतान ।जब हम, भूल जाते हैं ,सही ग़लत की पहचान ।तभी हमें उकसाते हैं…

  • भरत मिलाप | Kavita bharat milap

    भरत मिलाप ( Bharat milap )   कैसी लीला रची काल ने वन को चले गये रघुराई दशरथ राम राम कर हारे जब अंत घड़ी बन आई   भ्रातप्रेम व्याकुल भरतजी अवध रास ना आया सेना लेकर चला भक्त भगवन कैसी यह माया   जग का पालनहारा वन में जब वनवासी बन आया पाप बढ़…

  • हद से ज्यादा फूलो मत | Geet phoolo mat

     हद से ज्यादा फूलो मत ( Had se jyada phoolo mat )     गफलत मे रह झूलो मत, मर्यादा कभी भूलो मत। हद से ज्यादा फूलो मत, अपनों को भी भूलो मत। मर्यादा कभी भूलो मत अपने अपने ही होते हैं, अतुलित प्रेम भरा सागर। मोती लुटाते प्यार भरा, अपनों से ही मिलता आदर।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *