Matdan ka Mahakaj

मतदान का महाकाज | Matdan ka Mahakaj

मतदान का महाकाज

( Matdan ka mahakaj ) 

 

अंतःकरण स्वर से, मतदान का महाकाज हो

शासनिक व्यवस्था लोकतंत्र,
सदा शीर्ष नैतिक स्थान ।
अहम मतदाता सहभागिता,
मौलिक अधिकार अनूप आह्वान।
निष्पक्ष राष्ट्र प्रगति भाव सेतु,
हर मत अंतर्निहित दिव्य राज हो ।
अंतः करण स्वर से, मतदान का महाकाज हो ।।

जाति धर्म पंथ विभेदन,
नित्य देश धरा अहितकारी ।
तज लोभ प्रलोभन चमक दमक,
प्रतिरोध चरित्रहीन भ्रष्टाचारी ।
निज संस्कृति संस्कार वंदन,
मत धर्म सुरभि जन्म भूमि आवाज हो ।
अंतः करण स्वर से, मतदान का महाकाज हो ।।

जन प्रतिनिधि चयन बेला,
परिवर्तन विकल्प अहम बिंदु ।
अंकुश जनतंत्र रूप राजतंत्र ,
नव प्रतिभा अवसर संचेतना सिंधु ।
नारी शक्ति कृषक श्रमिक मान संग,
हिंद शोभित विश्व गुरु सरताज हो ।
अंतः करण स्वर से, मतदान का महाकाज हो ।।

शिक्षा विज्ञान आजीविका सह,
सुनिश्चित युवा पीढ़ी भविष्य ।
अभिरक्षा ऐतिहासिक पर्यटन आभा,
आहूत पारदर्शी तंत्र मिटा भय संशय ।
मानव राष्ट्र सेवा संकल्प साथ,
मुक जीव जंतु हितार्थ पुनीत आगाज हो ।
अंतः करण स्वर से, मतदान का महाकाज हो ।

 

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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