मेहनत का मोल

मेहनत का मोल | लघु कथा

अरूण स्वाभिमानी लड़का था। वह कक्षा‌ में सदैव प्रथम आता था। सब पूछते ” अरूण तुम घर में कितने घंटे
पढ़ते हो आखिर रोज ?

वह बोलता ” मुझे घर पर समय ही कहां मिलता है।
दो गायें और एक भैंस है। उनको सानी पानी देना और फिर घूम घूम कर दूध बेचना आदि में व्यस्त हो जाता हूं।
एक दोस्त उसके घर‌ के पास ही रहता था, उसने अरूण की भीतर की बात बताई।

अरूण जब नाद में पानी रखता है तब एक पाठ बोलता है, पानी मिलाता है जब भी। और जब एक छोटी लाठी से उसे चलाता है तब भी पाठ का स्मरण करता है। ऐसा कर हर काम में सारा दैनिक पाठ अपना रट लेता है। आस पास रखी पुस्तकों की ताक – झांक करता रहता है।

सुना है कि वह एक आई.ए.एस बन गया है। कहीं दूर नामी गिरामी और दबदबे वाला एस.डी.ओ. है।
एक तीन मंजिला मकान है। उसका पिता बीस बाइस गायों भैंसों का तबेला चलाकर बहुत सुखी एवं सन्तुष्ट है।

श्रीमती उमेश नाग

जयपुर, राजस्थान

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