Meri Yaadein

मेरी यादे | Meri Yaadein

मेरी यादे

( Meri yaadein )

 

ना जाने कैसा

दोस्ती का रिश्ता था

 वह बुलाया करते थे,

और हम उनसे मिलने जाया करते थे।

नही दिखते थे तो

वह पूरा स्कूल ढूंढ लिया करते थे।

आज भी उन्हें याद करते हैं,

हर वक्त उनसे मिलने की दुआ रब से करते हैं।

दो पल की मुलाकात से इतनी प्यारी दोस्ती जुड़ गयी थी,

कि जब उसे परेशानी होती थी

तो हम उनके साथ होते थे !

वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त है ,

बोहोत दूर है मगर मेरे दिल के करीब है

तस्वीर नहीं है उसकी कोई मेरे पास,

लेकिन यादें बहोत हैं

तोहफे नहीं हैं उसके कोई,

दोस्ती का धागा नहीं बाँधा उसे

लेकिन वह मेरी अच्छी दोस्त जरूर है।

 

नौशाबा जिलानी सुरिया
महाराष्ट्र, सिंदी (रे)

यह भी पढ़ें :-

 

यह दुनिया है जनाब | Yeh Duniya hai Janab

Similar Posts

  • राम | Shri ram ji ki kavita

    राम ( Ram )   १. रघुपति राघव रघुनाथ राम,भव भंजक प्रभु लीला ललाम आदर्शों के अवतार तुम्हें ,भारत की संस्कृति के प्रणाम! २. हे सर्वश्रेष्ठ मानव स्वरूप , तुम हर युग के इतिहास नवल जग में कोने कोने फैले , तुमसे जीवन विश्वास धवल! ३. यह एक शब्द का “राम” नाम,है जीवन का आधार…

  • वो कोरोना काल के दिन | Corona Kaal par Kavita

    वो कोरोना काल के दिन ( Wo corona kaal ke din )    जब से आया कोरोना है आँसू बहा रहा हूँ, आफत गले पड़ी है उसको निभा रहा हूँ। अब हो गया लाॅकडाउन घर में रह रहा हूँ, आफत गले पड़ी है उसको निभा रहा हूँ।। सुबह के पाॅंच बजें है में चाय बना…

  • सोच कर देखो | Pakshi par Kavita

    सोच कर देखो ( Soch kar dekho ) पक्षी पर कविता   किसी आशियाना को कोई कब तक बनाएगा, जब उखाड़ फेंकने पर कोई तुला हो, बाग बगीचा वन उपवन को छिन्न-भिन्न कर हमें बसाना कौन चाहता है? आज कल वह कौन है जो पेड़ लगाने वाला कोई मिला हो, सुबह होते ही हम कलरव…

  • मणिपुर की व्यथा | Manipur ki Vyatha

    मणिपुर की व्यथा ( Manipur ki vyatha )   मूक बधिर हुआ धृतराष्ट्र द्वापर जैसी फिर चूक हुई सत्ताधारी अब चुप क्यों है, राज सभा क्यूं अब मुक हुई ।। लोक तंत्र की आड़ न लेना क्या वोटो के ही सब गुलाम है या द्वापर जैसी सभा हुई एक पांचाली आज भी समक्ष सबके निर्वस्त्र…

  • समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • प्रार्थना 

    प्रार्थना  हो दया का दान प्रभु , विनती यही है आप से  हम बने इस योग्य प्रभु , बचते रहें हर पाप से।  जो मिला जीवन हमें ,प्रभु एक ही आधार हो  कर  सकें  नेकी  बदी , ऐसा मेरा व्यवहार हो हो  बुराई  दूर  खुद , हे! प्रभु  तेरे  प्रताप  से,  हो दया का दान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *