मुक्तक

Muktak | मुक्तक

मुक्तक

( Muktak )

 

निर्भय  रहकर  जो  जीवन जीता है
धीरज धरकर जो गमों के घूंट पीता है
कर्म  प्रधान है इस चराचर जगत में
आत्मा  अजर  अमर  कहती गीता है

 

वक्त और हालात जिंदगी जीना सिखाते हैं
कौन  अपना  कौन  पराया  सब बताते हैं
संघर्षों से ही फौलाद बनते हैं इरादे मन के
तूफानों  से  टकराने वाले सफलता पाते हैं

 

मौत  के  मुंह  से  बचा  ले वो  भगवान होता है
दर्द औरों का न समझ सके वो नर पाषाण होता है
जिंदगी के मायने धन के पीछे भाग दौड़ ही नहीं
समय पर औरों के काम आए वही इंसान होता है

?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

Kavita | वह बचपन की याद पुरानी

 

Similar Posts

  • खुशनसीब | Khushnaseeb

    खुशनसीब ( Khushnaseeb )    खुशनसीब होते वो लोग जो हंसकर जी लिया करते हैं। भोली मुस्कान रख चेहरे पर दिल जीत लिया करते हैं। जवानी के मद में अंधा बिल्कुल भी नहीं होते कभी वो। शुभ कर्म और व्यवहार से जीवन गुजार लिया करते   जवानी ( Jawani )   जवानी के मद में…

  • महेन्द्र सिंह प्रखर के मुक्तक | Mahendra Singh Prakhar ke Muktak

    ( 13 ) माँ के हाथों का खाना कब कच्चा लगता है । साठ साल का बेटा उसको बच्चा लगता है । कोई कितना भी प्रेम करे जग में मुझसे – बस माँ का ही प्यार जगत में सच्चा लगता है ।। ( 12 ) हमें तो बोलना भी माँ सिखाती है सुनों हिंदी ।…

  • जो ना मचले जवानी जवानी नहीं | Jawani

    जो ना मचले जवानी जवानी नहीं ( Jo na machle jawani jawani nahi )    जो ना मचले जवानी जवानी नहीं। कह ना सके कहानी कहानी नहीं। दिल का दर्द उभर लब तक आया। गले ना पत्थर आंख का पानी नहीं। याद ना दिलाए निशानी निशानी नहीं। उड़ानें भर ना सके भाई वो रवानी नहीं।…

  • बसंत | Basant par Muktak

    बसंत ( Basant )   आ गया मधुमास सुहाना चली मस्त बयार। सर्दी को अलविदा कहने लगे सब नर नार। फागुन महीना आया खिलने लगी धूप भी। लगे पुष्प सारे महकने चमन महकी बयार। कोहरा ओस सारे अब मधुरम चली पुरवाई। खुशबू फैली बागानों में महक उठी अमराई। मस्तानों की टोली आई गीत मस्त गाते…

  • पदांत आंसू | Aansoo par muktak

    पदांत आंसू ( Padant aansoo )    सारे पापों को धो देते हैं वो प्रायश्चित के आंसू। प्रेम का उमडता सागर नैन छलक आते आंसू। महकते फूल प्यारे अब खिलते कहां बागानों में। राज भले छुपा लो दिल में सब कह जाते आंसू।   अपना बनाके हमें वो फिर रूला गए आंसू। आशाओं का चिराग…

  • आरजू | Aarzoo par muktak

    आरजू ( Aarzoo )    एक आरजू एक तमन्ना एक मेरी अभिलाषा। अटल रहूं सीमा पे धर रण कौशल की भाषा। जोश जज्बा रग-रग में हौसला है भरपूर मेरा। तिरंगा की शान में झुका ले हम शीश जरा सा। अरि दल से लोहा लेने को भीड़ जाते तूफां से। तपन धरा की ओज भरती बतियाती…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *