Indian women smiling

मुस्कुराहट | Muskurahat

मुस्कुराहट

( Muskurahat )

 

हजार गमों की महफिल में,
तू मुस्कुराहट को न्योता दिया कर।।

नम हुई आंखे तेरी,
दिल को सताती है,
मुकुराहट तो दिल का सुकून कहलाती है।।

ऐ दोस्त ,
तेरी उदास आंखे,
बहुत दिल में हलचल मचाती है,
तू बस हंस दे,
तो सारी कायनात खुशियां मनाती है।।

ज़िंदगी के राहों में चलना
आसान तो नही होता,
मगर होठों पर उदासी लेकर जीना भी
जीवन नही होता ।।

ज़िंदगी तो हर किरदार बखूबी निभाती है,
तू क्यों फिर होठों पर बोझ उठाती है।।

खुल कर जी लिया कर
दो आंसू बहाने हों तो ,
बहा लिया कर,
खुशियां जहा मिले
उन्ही रास्तों पर कदम रखा कर।।

ज़िंदगी के हर रंग में तुम रंग जाओगे
जानती हूं,
मगर यूं दिल पर डर लेकर न घुमाकर।।

गम को भूलकर ,
थोड़ा मुस्कुरा लिया कर।
.मुस्कराहटों को न्योता दिया कर ।।

 

नौशाबा जिलानी सुरिया
महाराष्ट्र, सिंदी (रे)

यह भी पढ़ें :-

ढेरा | Dhera

Similar Posts

  • 21 वीं सदी का यथार्थ

    21 वीं सदी का यथार्थ देव संस्कृति देव भाषा देव लोक की विदाई मानव का प्रौद्योगिकीकरण जड-चेतन का निशचेतन छायावाद का प्रचलन चार्वाक का अनुकरण कृत्रिम इच्छा का सृजन कृत्रिम मेधा का उत्पादन बाजारों के बंजारें आत्ममुग्धता की उपभोक्तायें मानवता का स्खलन सभ्यता का यांत्रिकरण बिलगेटस,मस्क का खगोलीकरण अंबानी,अडानी का आरोहण मूल्यों-नीतियों का मर्दन रक्तबीजों…

  • कठिन परिश्रम | Kathin Parishram

    कठिन परिश्रम ( Kathin parishram )    जो बीत गया दौर , वो लौट कर वापस नही आएगा । वो दौर नहीं फिर आएगा, जो दौड़ कर वर्दी पाएगा ।। वो गया जमाना पीछे बहुत , जो देखेगा सिर्फ पछताएगा। कल नही रुका किसी से , आज को कैसे रोक पाएगा ।। अतीत को देख…

  • महॅंगी हुई तरकारी

    महॅंगी हुई तरकारी आज बेहद-महॅंगी हो गई है देशों में ये तरकारी,क्या बनाएं, क्या खाएं सोच रही घरों की नारी‌।छू रहा दाम आसमान इन तरकारियों का सारी,बढ़ रही है मुसीबतें आम आदमी और हमारी।। कभी सोचूं ये शिकायत करुं मैं किससे तुम्हारी,आलू-प्याज़ ख़रीदना भी आज हो रहा दुश्वारी।ग़रीब अमीर जिसे रोज़ खाते आज़ दे रहें…

  • व्हाट्सएप का संसार | WhatsApp par kavita

    व्हाट्सएप का संसार  ( WhatsApp ka sansar )    आज मैं व्हाट्सएप की गलियों में घूम आया , फिर सोचा मैंने वहां क्यों समय गवाया। मैसज देखकर जब अपने अंदाज से मोबाइल में कुछ समूह को मैंने फुलफिल भरा भरा सा पाया, कुछ समूह का आनंद लिया,बाते करके मैंने बहा कुछ में जाकर टांग अड़ाया,उत्तर…

  • बेचारे मजदूर | Bechare Mazdoor

    बेचारे मजदूर ( Bechare Mazdoor )  उजड़ी हुई दुनिया मजदूर बसाते हैं, अपने पसीने से जहां सजाते हैं। गगनचुंबी इमारतें बनाते हैं देखो, मरुस्थल में फूल यही तो खिलाते हैं। ईंट,पत्थर, सरिया के होते हैं ये बने, यही तो बंगलों में उजाला फैलाते हैं। ऐसा राष्ट्र-धन लोग कुचलते मनमाना, ओढ़ते आसमां, ये धरती बिछाते हैं।…

  • प्रदीप छाजेड़ जी की रचनायें

    ध्यान (Meditation) की शक्ति भारतीय संस्कृति का दर्शन कहता है कि जीवन का सार अपने भीतर की सच्चाई को खोजना है । वह इसके लिए हमको दैनिक कार्यक्रम को भी उस ओर मोड़ना जरूरी है । आज हर कोई बाहर की दुनिया को आकर्षक बनाने में लगा है । वह तन से लेकर सदन सभी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *